यह कार्रवाई कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर की गई। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रोहित भदकारिया के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम सबसे पहले फूल राज होटल के सामने स्थित धाकड़ मेडिकल स्टोर पहुंची। टीम ने मेडिकल स्टोर की जांच के साथ उसके पास संचालित किए जा रहे एएस अस्पताल का भी निरीक्षण किया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्पताल डॉ. पुष्पेंद्र सिंह के नाम पर बताया गया था लेकिन मौके पर एक ऐसा व्यक्ति मरीजों का इलाज करता मिला जो इसके लिए पात्र नहीं था।
जांच के दौरान अस्पताल के अंदर मरीजों को भर्ती करने के लिए 10 पलंग भी रखे हुए मिले। इससे स्पष्ट हुआ कि वहां केवल सामान्य मेडिकल स्टोर का संचालन नहीं हो रहा था बल्कि मरीजों के इलाज और भर्ती की व्यवस्था भी बनाई गई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संचालक से अस्पताल के पंजीयन सहित अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे लेकिन मौके पर संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद विभाग ने एएस अस्पताल के साथ धाकड़ मेडिकल स्टोर को भी सील कर दिया।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम कटरा मोहल्ले में स्थित गोपाल मेडिकल स्टोर पहुंची। यहां भी जांच के दौरान मेडिकल स्टोर के पास बने कमरों में अस्पताल जैसी व्यवस्था दिखाई दी। इन कमरों में मरीजों को भर्ती करने के लिए पलंग मौजूद थे। इसके अलावा मरीजों को बोतल चढ़ाने और इलाज करने की व्यवस्था भी मिली। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में संचालक रंजन अधिकारी से अस्पताल के पंजीयन से जुड़े दस्तावेज मांगे लेकिन वह भी जरूरी कागजात टीम के सामने प्रस्तुत नहीं कर सके।
दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गोपाल मेडिकल स्टोर और उसके पास संचालित हो रहे अस्पताल को भी सील कर दिया। विभाग की इस कार्रवाई के बाद इलाके में बिना अनुमति या पंजीयन के स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषीश्वर ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर जिले में अवैध स्वास्थ्य संस्थानों की लगातार जांच की जा रही है। विभाग का उद्देश्य ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई करना है जहां नियमों का पालन किए बिना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। कार्रवाई करने वाली टीम में खंड चिकित्सा अधिकारी कोलारस डॉ. संजय राठौड़ और फार्मासिस्ट बालेंदु रघुवंशी भी शामिल रहे।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से यह सवाल भी सामने आया है कि बिना पंजीयन और आवश्यक दस्तावेजों के मरीजों के इलाज तथा भर्ती की व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही थी। विभाग अब जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की जांच जारी रखने की तैयारी में है।
