नई दिल्ली। चीन के गुआंगडोंग प्रांत के एक स्कूल का कथित फरमान इन दिनों चर्चा में है। रूयुआन काउंटी हाई स्कूल में छात्रों के लिए ऐसा नियम बनाए जाने की बात सामने आई है, जिसके तहत छह महीने के सेमेस्टर में क्लास के दौरान छात्र सिर्फ एक बार टॉयलेट जा सकते हैं। दूसरी बार टॉयलेट जाने पर अभिभावकों को स्कूल बुलाने और तीसरी बार ऐसा करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।
मामला सामने आने के बाद चीन के सोशल मीडिया पर स्कूल प्रशासन की आलोचना शुरू हो गई। स्थानीय शिक्षा विभाग ने भी अभिभावकों और आम लोगों से मिली शिकायतों के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।
शिक्षक ने लीक की PPT की तस्वीर
इस नियम का खुलासा स्कूल की एक स्टाफ मीटिंग में इस्तेमाल की गई पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन की तस्वीर इंटरनेट पर सामने आने के बाद हुआ। बताया गया कि स्कूल के एक शिक्षक ने यह तस्वीर ऑनलाइन साझा की थी।
PPT में क्लासरूम मैनेजमेंट से जुड़े कई सख्त नियम बताए गए थे। इनमें टॉयलेट जाने से संबंधित नियम सबसे ज्यादा चर्चा में आया।
बताया गया कि पहली बार भी छात्र को तभी क्लास से बाहर जाकर टॉयलेट जाने की अनुमति मिलेगी, जब स्थिति गंभीर या आपातकालीन हो। दूसरी बार ऐसा करने पर उसके माता-पिता को स्कूल बुलाया जाएगा और छात्र के आचरण तथा अनुशासन को लेकर बातचीत होगी। तीसरी बार टॉयलेट जाने पर छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।
शिक्षकों की नौकरी पर भी नियमों का असर
रिपोर्ट के मुताबिक, PPT में शिक्षकों के मूल्यांकन को भी छात्रों के अनुशासन से जोड़ने की बात कही गई थी। बताया गया कि शिक्षक की कक्षा के छात्र नियमों का कितना पालन करते हैं, इसे उनके प्रदर्शन के आकलन का आधार बनाया जाएगा।
इसी आधार पर शिक्षकों के प्रमोशन, वार्षिक वेतन वृद्धि और पुरस्कारों पर भी असर पड़ने की बात सामने आई है। इससे इस कथित नियम को लेकर विवाद और बढ़ गया।
सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई नाराजगी
मामला सार्वजनिक होने के बाद चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों ने स्कूल के नियमों पर सवाल उठाए। कुछ यूजर्स ने इसे छात्रों की बुनियादी शारीरिक जरूरतों को अनुशासन से जोड़ने वाला कदम बताया।
एक यूजर ने सवाल किया कि आखिर यह स्कूल है या जेल। वहीं, कुछ लोगों ने शिक्षा विभाग से नियम को तत्काल रद्द कराने और स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
एक अन्य यूजर ने अपने स्कूल के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वहां क्लास के दौरान टॉयलेट जाने के लिए शिक्षक से हस्ताक्षर वाला पास लेना पड़ता था।
पहले स्कूल ने बताया गलतफहमी, अब जांच शुरू
विवाद बढ़ने के बाद स्थानीय मीडिया ने स्कूल प्रशासन से इस संबंध में जवाब मांगा। शुरुआत में एक स्टाफ सदस्य ने इसे महज गलतफहमी बताया। बाद में स्कूल की ओर से इसे विरोधी तत्वों की ओर से फैलाई गई अफवाह करार दिया गया।
हालांकि, स्थानीय शिक्षा ब्यूरो ने कहा कि उसे अभिभावकों और आम लोगों से इस मामले में बड़ी संख्या में शिकायतें मिली हैं। इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल में औपचारिक जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल PPT में बताए गए नियम वास्तव में स्कूल की आधिकारिक नीति का हिस्सा थे या नहीं।
