हुमायूं कबीर के मुताबिक भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए नहीं, बल्कि सीधे द्विपक्षीय स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को नए रिश्ते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आपसी हितों को प्राथमिकता देनी होगी।
कबीर ने शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहने के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंधों को असहज बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को भारत के साथ संबंधों को लेकर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने वाली सोच से बाहर निकलना होगा। उनका कहना था कि नई दिल्ली के साथ रिश्तों को संतुलित तरीके से देखा जाना चाहिए और इसे बांग्लादेश के दूसरे देशों के साथ संबंधों के व्यापक हिस्से के रूप में समझना चाहिए।
बांग्लादेश का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में BRICS समिट अपने अंतिम दौर में है। बांग्लादेश ने कहा था कि उसके प्रधानमंत्री तारिक रहमान BRICS समिट में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उन्हें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर निमंत्रण नहीं दिया गया था। ढाका के अनुसार, उन्हें BIMSTEC के अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित किया गया था। BIMSTEC बंगाल की खाड़ी से जुड़े दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों का क्षेत्रीय संगठन है।
इससे पहले अगस्त में भी प्रधानमंत्री तारिक रहमान का भारत दौरा टल गया था। BRICS समिट से पहले भारत ने दोनों देशों के बीच अलग द्विपक्षीय बैठक के लिए उन्हें 22 अगस्त को भारत आने का निमंत्रण दिया था। हालांकि यात्रा से पहले ही यह कार्यक्रम स्थगित हो गया।
उस समय बांग्लादेश ने भारत के सामने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया था। दोनों देशों के बीच इस विषय को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। उस दौरान हुमायूं कबीर ने कहा था कि माहौल अनुकूल होने पर द्विपक्षीय दौरे होंगे और जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है।
भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़ने की एक वजह शेख हसीना की भारत में मौजूदगी और उनके सार्वजनिक राजनीतिक बयानों को भी माना गया। 5 अगस्त को शेख हसीना ने दिल्ली से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। यह कार्यक्रम अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी के मौके पर आयोजित किया गया था।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश सरकार ने आपत्ति जताई थी। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के संबंध सामान्य करने की कोशिशों को प्रभावित कर सकता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने दावा किया था कि भारत को पहले इस संबंध में आगाह किया गया था।
भारत ने हालांकि शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार किया था। भारत का कहना था कि कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था की ओर से आयोजित किया गया था और सरकार का उससे कोई संबंध नहीं था। अब बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री की ओर से सीधे संवाद और आपसी हितों पर आधारित नए रिश्ते की बात दोनों देशों के संबंधों को लेकर ढाका के रुख को सामने रखती है।
