राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर आयुष चिकित्सालय में व्याख्यान माला एवं स्वास्थ्य शिविर आयोजित, नागरिकों का हुआ निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण
दमोह। आज 23 सितंबर बुधवार को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित आयुष चिकित्सालय में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद के महत्व, स्वस्थ जीवनशैली, आहार-विहार, रोगों से बचाव तथा आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर में बड़ी संख्या में नागरिकों ने पहुंचकर अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया। चिकित्सकों द्वारा मरीजों को आवश्यक परामर्श देने के साथ ही जरूरत के अनुसार निःशुल्क आयुर्वेदिक औषधियां भी उपलब्ध कराई गईं।आयुष मंत्रालय के अनुसार आयुर्वेद दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी। पहले यह आयोजन धनतेरस के अवसर पर किया जाता था। वर्ष 2025 में भारत सरकार ने 23 सितंबर को प्रत्येक वर्ष आयुर्वेद दिवस मनाने की निश्चित तिथि के रूप में अधिसूचित किया।

भगवान धन्वंतरि के पूजन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला आयुष अधिकारी डॉ. राजकुमार पटेल एवं मुख्य वक्ता डॉ. एल.एन. वैष्णव ने भगवान धन्वंतरि के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्प अर्पित कर किया। इस अवसर पर महेंद्र जैन, सेवानिवृत्त डीएसपी श्री सेन, वरिष्ठ नागरिक रमेश ठाकुर, डॉ. बृजेश कुलपरिया, डॉ. अनंत राम पटेल, डॉ. प्रियंका जैन सहित अन्य अतिथियों ने भगवान धन्वंतरि का पूजन-अर्चन किया।आयोजन समिति की ओर से सभी अतिथियों का तिलक-वंदन कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में आयुष विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं स्वास्थ्य शिविर में पहुंचे लोग उपस्थित रहे।
समय-समय पर शरीर की भी जरूरत है ‘सर्विसिंग‘ की : डॉ. प्रियंका जैन

कार्यक्रम के आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए डॉ. प्रियंका जैन ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए केवल बीमारी होने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच कराते रहना चाहिए।उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की नियमित सर्विसिंग आवश्यक होती है, उसी प्रकार मनुष्य के शरीर की भी समय-समय पर जांच-पड़ताल जरूरी है। शरीर की आवश्यकता और चिकित्सक की सलाह के अनुसार आहार-विहार एवं औषधियों का सेवन किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि आयुर्वेद जीवनशैली को व्यवस्थित करने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम का उद्देश्य भी लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग करना और आयुर्वेद के महत्व से परिचित कराना है।
‘आयुर्वेद केवल पैथी नहीं, यह जीवन जीने की समग्र दृष्टि है‘ : डॉ. एल.एन. वैष्णव

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. एल.एन. वैष्णव ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि आयुर्वेद को केवल एक चिकित्सा पद्धति मानकर सीमित कर देना उचित नहीं है। आयुर्वेद भारतीय जीवन परंपरा में स्वास्थ्य, आहार, दिनचर्या और रोगों से बचाव की व्यापक अवधारणा प्रस्तुत करता है।उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का मूल उद्देश्य ही स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी व्यक्ति के रोग का उचित उपचार करना है। भारतीय चिकित्सा परंपरा में महर्षि सुश्रुत और महर्षि चरक के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा ने विश्व को स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण ज्ञान दिया है।डॉ. वैष्णव ने ऋतु के अनुसार खान-पान, दिनचर्या और जीवनशैली में आवश्यक बदलाव पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने योग, प्राणायाम और ध्यान सहित स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े विभिन्न आयामों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के अनेक हिस्सों में आयुर्वेद और भारतीय स्वास्थ्य परंपराओं के प्रति रुचि बढ़ रही है।अपने संबोधन के दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों से आयुर्वेद के सिद्धांतों को समझने, तर्क के साथ विचार करने तथा किसी भी औषधि का सेवन योग्य चिकित्सक की सलाह से करने का आग्रह किया।
रोग न हो और हो तो सही निदान हो, यही आयुर्वेद का उद्देश्य : डॉ. राजकुमार पटेल

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला आयुष अधिकारी डॉ. राजकुमार पटेल ने कहा कि रोगों की रोकथाम और रोग होने पर उचित उपचार आयुर्वेद की मूल अवधारणा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने आयुर्वेद में वर्णित आचार रसायन का उल्लेख करते हुए स्वस्थ आचरण और अनुशासित जीवनशैली के महत्व को रेखांकित किया।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य आयुर्वेद के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना और इसकी उपयोगिता को जन-जन तक पहुंचाना है। आयुष विभाग द्वारा जिले में किए जा रहे विभिन्न स्वास्थ्य एवं जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी भी उन्होंने दी।
आयुर्वेद अपनाकर जीवन को बनाया जा सकता है अधिक व्यवस्थित : डॉ. बृजेश कुलपरिया

डॉ. बृजेश कुलपरिया ने कहा कि आयुर्वेद केवल रोग होने के बाद उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की पद्धति भी है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने खान-पान, दिनचर्या और जीवनशैली पर ध्यान दे तो अनेक स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव संभव है।उन्होंने लोगों से आयुर्वेद को समझने और योग्य चिकित्सकों के मार्गदर्शन में इसके सिद्धांतों को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
जिलेभर में आयोजित हुए विविध कार्यक्रम
राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर दमोह जिले के विभिन्न आयुष औषधालयों एवं चिकित्सालयों में भी विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। विभिन्न स्थानों पर स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, व्याख्यान माला, जनजागरूकता कार्यक्रम एवं वृक्षारोपण जैसे आयोजन हुए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को आयुर्वेद, स्वस्थ जीवनशैली और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।आयुष चिकित्सालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डॉ. हंसा वैष्णव ने भगवान धन्वंतरि के चरणों में नमन करते हुए उपस्थित सभी लोगों को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं दीं।कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अनंत राम पटेल ने किया। आयोजन के दौरान आयुष विभाग के चिकित्सक एवं कर्मचारी, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे। स्वास्थ्य शिविर में नागरिकों का परीक्षण कर उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श एवं निःशुल्क औषधियां प्रदान की गईं।
