दमोह,20 March/ तेंदूखेड़ा स्थित IES पब्लिक स्कूल तेंदूखेड़ा से जुड़े चर्चित छात्र प्रकरण में अब स्कूल प्रबंधन ने अपना विस्तृत पक्ष सामने रखते हुए लगाए जा रहे आरोपों को तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। प्रबंधन ने इस संबंध में दमोह कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक दमोह को एक लिखित पत्र सौंपकर पूरे घटनाक्रम और मेडिकल तथ्यों को स्पष्ट किया है।
इस संबंध में विद्यालय के प्रबंधक विक्रम सिंह राजपूत ने कहा कि संस्था ने पूरी पारदर्शिता के साथ हर तथ्य प्रशासन के समक्ष रखा है और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं की गई है।
🏥 मेडिकल रिपोर्ट बनी आधार
प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, छात्र की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर प्राप्त चिकित्सकीय परामर्श में F.I.R.E.S सिंड्रोम (एक अत्यंत दुर्लभ और गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति) की संभावना जताई गई है। प्रबंधन का कहना है कि—
- छात्र 20 और 21 फरवरी को सामान्य रूप से विद्यालय में उपस्थित रहा
- इसके बाद वह परिजनों के साथ अन्य कार्यक्रमों में भी शामिल हुआ
- अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने की घटना को विद्यालय में किसी दंड या प्रताड़ना से जोड़ना तथ्यों के विपरीत है
📌 घटनाक्रम पर प्रबंधन का पक्ष
स्कूल प्रबंधन के अनुसार—
- 19 फरवरी को घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित शिक्षिका को नोटिस जारी किया गया
- 20 फरवरी को परिजन विद्यालय पहुंचे, जहां प्रबंधन ने शांतिपूर्वक चर्चा का प्रयास किया
- प्रबंधन का दावा है कि परिजनों द्वारा विवाद की स्थिति उत्पन्न की गई, जिससे विद्यालय का वातावरण प्रभावित हुआ
⚖️ त्वरित कार्रवाई का दावा
प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि संस्था ने अपने स्तर पर नियमों के तहत तत्काल कार्रवाई की—
👉 संबंधित शिक्षिका को कार्य मुक्त (हटा) कर दिया गया
👉 पूरे मामले की आंतरिक जांच प्रक्रिया प्रारंभ की गई
👉 प्रशासन को हर तथ्य पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराया गया
🏥 इलाज में सहयोग
प्रबंधन के अनुसार, छात्र की गंभीर स्थिति को देखते हुए उपचार में भी हरसंभव सहयोग किया गया—
- Apollo Hospital Jabalpur में संपर्क और इलाज संबंधी समन्वय
- आगे बेहतर उपचार के लिए AIIMS Bhopal में भी व्यवस्था कराने में सहयोग
📢 संदेश: तथ्यों पर भरोसा जरूरी
प्रबंधन ने अपील की है कि इस संवेदनशील मामले में बिना पुष्टि के अफवाहों पर ध्यान न दिया जाए।
👉 “मेडिकल रिपोर्ट और वास्तविक तथ्यों को नजरअंदाज कर आरोप लगाना न्यायसंगत नहीं है।”
निष्कर्ष:
विद्यालय प्रबंधक विक्रम सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया है कि छात्र की स्थिति का कारण किसी प्रकार की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना नहीं, बल्कि संभावित गंभीर बीमारी है। अब अंतिम निष्कर्ष प्रशासनिक जांच और चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल प्रबंधन ने अपने पक्ष को मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मजबूती से रखा है।
