सीएसआईआर की 85वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में मिली बड़ी उपलब्धि, नई दिल्ली में मंच से मयंक गार्डिया का सम्मान

दमोह। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की स्थापना की 85वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय स्तर की डाक टिकट डिजाइन प्रतियोगिता में दमोह के युवा मयंक गार्डिया ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। देशभर से प्रतिभागियों द्वारा तैयार की गई डाक टिकट डिजाइनों में मयंक गार्डिया द्वारा तैयार की गई डिजाइन को सर्वश्रेष्ठ डिजाइन के रूप में चयनित किया गया। उनकी इस उपलब्धि के बाद दमोह का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ है।
आज 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स के भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार में आयोजित विशेष कार्यक्रम में सीएसआईआर की 85वीं वर्षगांठ के अवसर पर चयनित डिजाइन पर आधारित डाक टिकट का विधिवत विमोचन किया गया। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने डाक टिकट का विमोचन किया। विमोचन के साथ ही यह डाक टिकट संपूर्ण देश में जारी किया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस प्रतियोगिता में देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए डाक टिकट की डिजाइन तैयार की थी। इन डिजाइनों में दमोह निवासी मयंक गार्डिया की डिजाइन को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया जाना उनके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह उपलब्धि न केवल उनकी रचनात्मक सोच और प्रतिभा को दर्शाती है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा में अपनी पहचान बनाने का अवसर भी प्रदान करती है।
मंच से किया गया सम्मान
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डाक टिकट की सर्वश्रेष्ठ डिजाइन तैयार करने वाले मयंक गार्डिया को मंच से सम्मानित किया गया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में हुए इस सम्मान ने मयंक की उपलब्धि को विशेष महत्व प्रदान किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और सीएसआईआर से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।
डाक टिकट के रूप में देशभर में पहुंचेगी डिजाइन

मयंक गार्डिया द्वारा तैयार की गई डिजाइन का चयन होने के बाद अब उनकी रचनात्मक प्रतिभा का स्वरूप डाक टिकट के माध्यम से पूरे देश तक पहुंचा है। डाक टिकट का संपूर्ण भारत में जारी होना इस उपलब्धि को और महत्वपूर्ण बनाता है। एक युवा शोधार्थी द्वारा तैयार डिजाइन का राष्ट्रीय स्तर पर चयन और फिर उसी डिजाइन पर आधारित डाक टिकट का विमोचन दमोह के लिए भी गौरव की बात है।
ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में कर रहे हैं पीएचडी
मयंक गार्डिया वर्तमान में आईआईसीबी, कोलकाता से ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में पीएचडी कर रहे हैं। विज्ञान के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ उन्होंने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में सफलता हासिल की है। उनका शैक्षणिक और शोध कार्य विज्ञान के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
दमोह निवासी मधुकांत गार्डिया के पुत्र मयंक गार्डिया की इस उपलब्धि की जानकारी सामने आने के बाद शहर के लोगों और उनके शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। प्रशंसकों, मित्रों और परिचितों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
परिवार और शहर के लिए गौरव का अवसर
मयंक गार्डिया की उपलब्धि उनके परिवार के लिए विशेष गौरव का अवसर है। वहीं दमोह जैसे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ डिजाइन का चयन होना स्थानीय युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। विज्ञान के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे मयंक ने अपनी रचनात्मक क्षमता के माध्यम से एक अलग पहचान बनाई है।
सीएसआईआर की 85वीं वर्षगांठ जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर उनकी डिजाइन का चयन होना और उसी डिजाइन पर आधारित डाक टिकट का देशभर में जारी होना मयंक गार्डिया के लिए यादगार उपलब्धि बन गया है। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में मंच से सम्मानित किए जाने के साथ उनकी इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
मयंक की इस उपलब्धि पर दमोह के गणमान्य नागरिकों, शुभचिंतकों, मित्रों और प्रशंसकों ने उन्हें बधाई देते हुए आशा व्यक्त की है कि वे भविष्य में विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में भी इसी तरह दमोह और देश का नाम रोशन करेंगे।
