घंटाघर पर हजारों की भीड़, पांचों मार्गों पर थमा यातायात; करीब दो घंटे तक चला प्रदर्शन — पुलिस की कार्रवाई और क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
दमोह शहर में शनिवार को कसाई मंडी क्षेत्र में गोवंश के अवशेष मिलने और एक गर्भवती गाय की हत्या किए जाने के आरोप के बाद हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। घटना की जानकारी जैसे-जैसे शहर में फैली, वैसे-वैसे लोगों का आक्रोश भी बढ़ता गया। गौ सेवकों और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शहर के हृदय स्थल घंटाघर पर एकत्र हुए और चक्काजाम कर दिया।
देखते ही देखते घंटाघर से जुड़े पांचों प्रमुख मार्गों पर आवागमन प्रभावित हो गया। प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती गई और मामला केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा। जब कुछ लोगों ने कसाई मंडी की ओर आगे बढ़ने का आह्वान किया तो बड़ी संख्या में लोग उस दिशा में बढ़ने लगे। अचानक बढ़ी भीड़ के बीच पुलिस और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई।मौके की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कसाई मंडी तथा थाना क्षेत्र की ओर जाने वाले मार्गों पर अतिरिक्त बल तैनात किया। बैरिकेडिंग कर लोगों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया गया। करीब एक घंटे तक थाना क्षेत्र के आसपास नारेबाजी, बहस और समझाइश का दौर चलता रहा।
अब सवाल यह है कि आखिर ऐसी स्थिति बनने की नौबत क्यों आई?
क्या निगरानी व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित थी?

कसाई मंडी क्षेत्र में गोवंश से जुड़ी घटनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आज की घटना के बाद एक बार फिर सबसे बड़ा सवाल पुलिस और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर खड़ा हुआ है।यदि संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्र में पुलिस की नियमित निगरानी थी तो कथित रूप से गोवंश की हत्या जैसी घटना वहां तक कैसे पहुंची?क्या क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस पेट्रोलिंग होती है?क्या संवेदनशील स्थानों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे प्रभावी रूप से काम कर रहे हैं?क्या पुलिस के पास क्षेत्र की गतिविधियों की नियमित जानकारी पहुंचती है?क्या पूर्व में सामने आई शिकायतों और सूचनाओं पर ठोस कार्रवाई हुई?
और यदि कार्रवाई हुई थी तो उसके बावजूद फिर ऐसी घटना सामने आने की स्थिति कैसे बनी?ये सवाल केवल प्रदर्शनकारियों के नहीं हैं, बल्कि घटना के बाद उत्पन्न कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण प्रशासन के सामने भी जवाबदेही का विषय बनते हैं।स्थानीय रिपोर्टिंग में भी क्षेत्र में निगरानी, पेट्रोलिंग और पूर्व में सीसीटीवी तथा ड्रोन निगरानी को लेकर सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है।
घंटाघर पर बैठा आक्रोश, हनुमान चालीसा से दिया संदेश
घटना के विरोध में हिंदू संगठनों और गौ सेवकों ने घंटाघर क्षेत्र में धरना दिया। कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया।संगठन के पदाधिकारियों का कहना था कि हनुमान चालीसा का पाठ प्रशासन और पुलिस को सद्बुद्धि देने तथा मामले में दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग के साथ किया जा रहा है।विश्व हिंदू परिषद के जिला संयोजक अंजू खत्री ने घटना को लेकर प्रशासन और पुलिस के सामने गंभीर नाराजगी जताई। संगठन की ओर से स्पष्ट रूप से कहा गया कि केवल औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि मामले में शामिल लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
जब भीड़ कसाई मंडी की ओर बढ़ने लगी
घंटाघर पर प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई, जब कुछ लोगों की ओर से कसाई मंडी की ओर आगे बढ़ने का आह्वान किया गया।इसके बाद बड़ी संख्या में गौ भक्त और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता कसाई मंडी की दिशा में आगे बढ़ने लगे। भीड़ लगातार बढ़ रही थी और पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि प्रदर्शनकारियों को कानून हाथ में लेने से रोकते हुए स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखा जाए।प्रशासन और पुलिस के अधिकारी लगातार भीड़ को समझाने का प्रयास करते रहे। थाना क्षेत्र के पास काफी देर तक नारेबाजी और बहस का दौर चला।यही वह क्षण था जब स्थिति केवल एक आपराधिक घटना की जांच का विषय नहीं रह गई थी, बल्कि कानून-व्यवस्था की गंभीर परीक्षा बन चुकी थी।
कलेक्टर को स्वयं पहुंचना पड़ा प्रदर्शनकारियों के बीच
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव स्वयं प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने लोगों की बात सुनी और उन्हें आश्वासन दिया कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।कलेक्टर ने भरोसा दिलाया कि दोषियों को किसी भी स्थिति में छोड़ा नहीं जाएगा और पुलिस को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।
कलेक्टर के आश्वासन के बाद धीरे-धीरे भीड़ को समझाने में सफलता मिली और स्थिति नियंत्रण की ओर बढ़ी।यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि यदि प्रशासन और पुलिस के आश्वासन के बाद स्थिति नियंत्रित हो सकती है तो प्रारंभिक स्तर पर ही ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई कि लोगों को सड़क पर उतरकर चक्काजाम और आंदोलन की स्थिति तक पहुंचना ही न पड़े?
पुलिस का दावा—संदिग्धों की पहचान, गिरफ्तारी और तलाश जारी

मामले में नगर पुलिस अधीक्षक एच.आर. पांडे ने पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी। उनके अनुसार पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान के आधार पर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है तथा मामले में सहयोग करने वालों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।आज की उपलब्ध रिपोर्टिंग में पुलिस की ओर से तीन संदिग्धों की पहचान और एक गिरफ्तारी की जानकारी भी प्रकाशित हुई है। इसलिए अंतिम संख्या और आरोपियों की भूमिका पुलिस की आधिकारिक केस डायरी तथा आगे की जांच से ही स्पष्ट होगी।पुलिस ने घटनास्थल से मिले अवशेषों को कब्जे में लेकर जांच प्रारंभ की है। घटनास्थल, समय, उपयोग किए गए वाहन तथा इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर तथ्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तहसीलदार बोले—सूचना के आधार पर होगी कार्रवाई
तहसीलदार रॉबिन जैन से जब मामले और क्षेत्र में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर संवाद किया गया तो उन्होंने बताया कि अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की सूचना प्रशासन को प्राप्त होगी, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।लेकिन यहां भी एक बड़ा सवाल सामने आता है—क्या कसाई मंडी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रशासन को कार्रवाई के लिए केवल घटना या शिकायत का इंतजार करना चाहिए, या नियमित निरीक्षण और निगरानी की कोई प्रभावी व्यवस्था पहले से मौजूद होनी चाहिए?
प्रशासन-पुलिस-नगरपालिका की संयुक्त कार्रवाई
प्रदर्शन के बाद प्रशासन, पुलिस और नगर पालिका की संयुक्त टीम ने कसाई मंडी क्षेत्र में कार्रवाई प्रारंभ की। क्षेत्र में अवैध रूप से बनाए गए आवासों और परिसरों के संबंध में कार्रवाई की गई।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी भी निर्माण को अवैध घोषित करने और उसे हटाने की कार्रवाई संबंधित अभिलेख, स्वीकृति, अतिक्रमण की स्थिति और सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया के आधार पर ही की जानी चाहिए।इस कार्रवाई ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—यदि क्षेत्र में अवैध निर्माण या अतिक्रमण पहले से मौजूद थे तो उनकी पहचान और कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई?क्या प्रशासन के पास इस क्षेत्र का अद्यतन सर्वे है?
क्या सभी निर्माणों की वैधता की जांच की गई?क्या राजस्व, नगर पालिका और अन्य संबंधित विभागों के रिकॉर्ड का मिलान हुआ?और यदि अनियमितताएं पहले से मौजूद थीं तो अब कार्रवाई के लिए घटना के बाद ही माहौल बनने का इंतजार क्यों करना पड़ा?
केवल गिरफ्तारी से खत्म होगा मामला या पूरी व्यवस्था की होगी जांच?
घटना में आरोपियों की गिरफ्तारी निश्चित रूप से जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन मामला केवल कुछ व्यक्तियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
जांच का दायरा यह भी तय कर सकता है कि—
- गोवंश वहां तक कैसे पहुंचा?
- घटना के लिए स्थान का चयन कैसे हुआ?
- घटना के समय वहां कौन-कौन लोग मौजूद थे?
- क्या किसी वाहन का उपयोग किया गया?
- घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे या नहीं?
- घटना से पहले और बाद की गतिविधियों की निगरानी हुई या नहीं?
- क्या पुलिस को पहले से किसी प्रकार की सूचना या शिकायत मिली थी?
- यदि मिली थी तो उस पर क्या कार्रवाई हुई?
- संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग कितनी प्रभावी थी?
- क्या क्षेत्र में अवैध निर्माण या अन्य गतिविधियों की पूर्व से जानकारी प्रशासन के पास थी?
- और सबसे महत्वपूर्ण—क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई या यह घटना पूरी तरह अचानक हुई?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आने चाहिए।
कानून हाथ में लेने की बजाय कानून के जरिए कार्रवाई की मांग
घटना को लेकर आक्रोश स्वाभाविक रूप से सामने आया, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। किसी भी आरोपी की पहचान और दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।प्रदर्शनकारियों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। वहीं प्रशासन और पुलिस के सामने चुनौती यह है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो, वास्तविक दोषियों की पहचान हो और किसी निर्दोष व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर कार्रवाई का सामना न करना पड़े।यही वह संतुलन है जिसकी इस मामले में सबसे अधिक आवश्यकता है।
दमोह के सामने अब सबसे बड़ा सवाल
घटना के बाद सड़क पर उतरा आक्रोश केवल एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं है। इसने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी, अवैध निर्माणों पर कार्रवाई और पूर्व शिकायतों के निस्तारण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।क्या कसाई मंडी क्षेत्र की पूरी निगरानी व्यवस्था की समीक्षा होगी?क्या पूर्व में सामने आई शिकायतों की फाइलें दोबारा खोली जाएंगी?क्या क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरों की तकनीकी जांच होगी?
क्या पुलिस पेट्रोलिंग की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जाएगी?क्या प्रशासन यह पता लगाएगा कि संवेदनशील क्षेत्र में अवैध निर्माण कब और कैसे हुए?क्या नगर पालिका और राजस्व विभाग संयुक्त रूप से क्षेत्र का सर्वे करेंगे?क्या इस घटना में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसकी भी जवाबदेही तय होगी?और क्या इस पूरे मामले की जांच केवल घटना तक सीमित रहेगी या उस पूरी व्यवस्था की भी पड़ताल होगी जिसके बीच ऐसी घटना होने की स्थिति बनी?
अब जांच की रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल पुलिस ने घटनास्थल से मिले अवशेषों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों और संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है। दूसरी ओर प्रशासन ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ कार्रवाई शुरू कर दी है।घंटाघर पर प्रदर्शन और चक्काजाम के बाद फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन घटना ने दमोह प्रशासन के सामने कई ऐसे सवाल छोड़ दिए हैं जिनका जवाब केवल गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि ठोस जांच और पारदर्शी कार्रवाई से मिलना चाहिए।सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि संवेदनशील क्षेत्र में निगरानी और कानून-व्यवस्था की व्यवस्था मौजूद थी, तो कथित रूप से ऐसी घटना होने की नौबत आखिर आई कैसे?अब निगाह पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और उन सवालों के जवाब पर है जो आज दमोह की सड़कों से उठकर सीधे जिम्मेदार विभागों के सामने खड़े हो गए हैं।
