किसी के प्रश्न का उत्तर पूरा होने से पहले दूसरे सवालों की बौछार, कई महत्वपूर्ण विषय दबते दिखे; कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
दमोह में रावण दहन की 40 वर्ष पुरानी परंपरा और मोरगंज काली के 99 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य आयोजन की तैयारी, महिला सुरक्षा एवं नागरिक सुविधाओं पर विशेष जोर
दमोह, 08 अक्टूबर 2026/मध्यप्रदेश के दमोह जिला मुख्यालय पर आगामी शारदेय नवरात्र, गरबा महोत्सव, दशहरा चल समारोह, दीपावली एवं गुरु नानक जयंती सहित विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और भव्य तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से आयोजित शांति समिति की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। वहीं बैठक के दौरान कुछ ऐसे दृश्य भी सामने आए, जिन्होंने शांति समिति की बैठकों के उद्देश्य और उनकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि, प्रशासनिक अधिकारी, शांति समिति के सदस्य, व्यापारी प्रतिनिधि तथा विभिन्न आयोजनों से जुड़े लोग उपस्थित रहे।बैठक का प्रमुख उद्देश्य त्योहारों के दौरान सुरक्षा, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, यातायात, पंडालों की सुरक्षा, प्रतिमा विसर्जन तथा नागरिक सुविधाओं को लेकर कार्ययोजना तैयार करना था। लेकिन चर्चा के बीच कई बार व्यक्तिगत, राजनीतिक और व्यापारिक हितों से जुड़े मुद्दे भी उठते रहे।
कुछ सदस्य एक प्रश्न का उत्तर पूरा होने से पहले ही दूसरा प्रश्न सामने रख रहे थे। कई अवसरों पर ऐसा प्रतीत हुआ मानो कुछ लोगों में अपनी बात रखने और उपस्थिति दर्ज कराने की होड़ लगी हो। इसके चलते कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा का क्रम प्रभावित होता दिखाई दिया।हालांकि कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बैठक के दौरान सामने आई समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कई मामलों में उनका सख्त प्रशासनिक रुख भी देखने को मिला।
शांति समिति की बैठक या व्यक्तिगत समस्याओं का मंच?
शांति समिति की बैठक का उद्देश्य धार्मिक पर्वों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना, सामाजिक सौहार्द को मजबूत करना और आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों का समय रहते समाधान सुनिश्चित करना है।लेकिन बैठक के दौरान कुछ ऐसे मुद्दे भी सामने आए, जिनका त्योहारों की व्यवस्थाओं से सीधा संबंध स्पष्ट नहीं था। व्यक्तिगत, राजनीतिक और व्यापारिक विषयों के बीच कई बार मूल एजेंडे से चर्चा भटकती दिखाई दी।
सवाल यह है कि जब प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस अधिकारी और विभिन्न विभागों के जिम्मेदार एक ही स्थान पर मौजूद हों, तब क्या बैठक का अधिकतम समय सामूहिक समस्याओं के समाधान पर केंद्रित नहीं होना चाहिए?क्या व्यक्तिगत समस्याओं के लिए अलग व्यवस्था बनाकर सामूहिक महत्व के विषयों पर अधिक समय नहीं दिया जा सकता?
नगर पालिका की व्यवस्थाओं पर सर्वाधिक सवाल, आखिर त्योहार आने पर ही क्यों याद आती हैं समस्याएं?
बैठक में सर्वाधिक समस्याएं नगरीय निकाय से संबंधित सामने आईं। नगर की सड़कों पर गड्ढे, खराब प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई, जलापूर्ति, अतिक्रमण और बाजारों में यातायात की परेशानियों को लेकर चर्चा हुई।इन समस्याओं को लेकर कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि त्योहारों से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं।नगर पालिका को प्रमुख धार्मिक स्थलों, मंदिरों, पंडालों, विसर्जन स्थलों तथा प्रमुख मार्गों पर नियमित सफाई और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
आखिर जिन सड़कों की मरम्मत, सफाई और प्रकाश व्यवस्था नियमित प्रशासनिक जिम्मेदारी है, उनके लिए हर बार त्योहारों से पहले विशेष निर्देश देने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?क्या संबंधित विभागों द्वारा समय-समय पर व्यवस्थाओं की समीक्षा नहीं की जाती? क्या नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए किसी बड़े त्योहार का इंतजार करना आवश्यक है?
कलेक्टर यादव का सख्त अंदाज, अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने के निर्देश
बैठक में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव कई अवसरों पर अपने चिरपरिचित प्रशासनिक अंदाज में दिखाई दिए। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि त्योहारों से जुड़ी सभी तैयारियां समय से पहले पूरी की जाएं।उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। आयोजन समितियों और प्रशासनिक विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
कलेक्टर ने कहा कि सभी त्योहार उत्साह, शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हों, इसके लिए प्रशासन आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा।अब देखना यह होगा कि कलेक्टर के निर्देशों का संबंधित विभाग कितनी गंभीरता से पालन करते हैं और त्योहारों से पहले व्यवस्थाओं में कितना सुधार दिखाई देता है।
रावण दहन की 40 वर्ष पुरानी परंपरा, मोरगंज काली के 99 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष तैयारियां
दमोह की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी परंपराएं भी शांति समिति की बैठक में चर्चा का महत्वपूर्ण विषय रहीं।नगर में रावण दहन की 40 वर्ष पुरानी परंपरा तथा मोरगंज काली की 99 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा का विशेष महत्व है। इन आयोजनों को लेकर श्रद्धालुओं और आयोजन समितियों में उत्साह रहता है।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि दमोह की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं नगर की पहचान हैं। इन्हें गरिमा, भव्यता और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
दशहरा चल समारोह, रावण दहन स्थल, मोरगंज काली से जुड़े आयोजन, श्रद्धालुओं की आवाजाही, यातायात तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियों पर जोर दिया गया।प्रशासन ने आयोजन समितियों से आपसी समन्वय बनाए रखने और व्यवस्थाओं में सहयोग करने की अपील की।
गरबा आयोजनों में महिला सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, शक्ति टीम रखेगी निगरानी
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि ने कहा कि त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।विशेष रूप से गरबा आयोजनों में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा पर जोर दिया गया।प्रमुख आयोजन स्थलों पर शक्ति टीम की निगरानी रहेगी तथा आवश्यकता के अनुसार महिला पुलिस बल तैनात किया जाएगा।
गरबा आयोजकों को सुरक्षा संबंधी जांच सूची का पालन करने, प्रवेश और निकास द्वार व्यवस्थित रखने, पहचान-पत्र की जांच करने तथा पूरे आयोजन परिसर को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखने के निर्देश दिए गए।महाकाली चौराहा, बड़ी देवी मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई।पुलिस अधीक्षक ने बताया कि विभिन्न आयोजन समितियों के पदाधिकारियों के साथ अलग से बैठक कर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी।
पंडालों में विद्युत और अग्नि सुरक्षा पर विशेष ध्यान
शांति समिति की बैठक में धार्मिक पंडालों की सुरक्षा को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई।पंडालों में सुरक्षित विद्युत कनेक्शन, जनरेटर, अग्निशमन यंत्र, पानी और आपातकालीन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।बड़े पंडालों की मजबूती का संबंधित अधिकारियों द्वारा परीक्षण कर आवश्यक प्रमाण-पत्र जारी करने को कहा गया।मूर्ति स्थापना स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे इस प्रकार लगाने के निर्देश दिए गए कि प्रवेश द्वार, निकास द्वार, मूर्ति स्थल और पूरे परिसर की निगरानी हो सके।आयोजकों से कहा गया कि प्रतिमा लाने से पहले संबंधित थाना प्रभारी और तहसीलदार को आवश्यक सूचना दें, ताकि व्यवस्थाएं समय पर बनाई जा सकें।
प्रतिमा विसर्जन और जवारा विसर्जन के लिए विशेष इंतजाम
बैठक में दीवान जी की तलैया में जवारा विसर्जन के लिए साफ-सफाई, पर्याप्त पानी और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।प्रतिमा विसर्जन के दौरान भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्रेन के माध्यम से विसर्जन की व्यवस्था पर सहमति बनी।इसके लिए आठ गुणा आठ फीट का प्लेटफॉर्म तैयार करने तथा आयोजन समितियों और यातायात पुलिस के बीच समन्वय स्थापित करने पर चर्चा हुई।विसर्जन के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना न हो, इसके लिए सुरक्षा संबंधी आवश्यक इंतजाम पहले से करने को कहा गया।
घंटाघर और प्रमुख बाजारों में यातायात की चुनौती
त्योहारों के दौरान दमोह के घंटाघर और प्रमुख बाजारों में खरीदारी करने वालों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रहती है।बैठक में दुकानों के बाहर सामान रखने, सड़क किनारे अस्थायी दुकानें लगाने तथा अतिक्रमण के कारण आवागमन प्रभावित होने के विषय पर चर्चा हुई।
जिला व्यापारी संघ के प्रतिनिधियों ने प्रशासन को सहयोग देने का आश्वासन दिया।छोटे व्यापारियों को तहसील ग्राउंड में व्यवस्थित करने तथा उन्हें पहले से सूचना देने पर भी सहमति बनी।यहां सवाल यह भी है कि क्या प्रशासन त्योहारों के दौरान ही अतिक्रमण और यातायात की समस्या का समाधान करेगा या फिर नगर में स्थायी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे?
पटाखा बाजार और ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर भी निर्देश
दीपावली को देखते हुए पटाखा बाजार की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। अस्थायी पटाखा लाइसेंस के आवेदनों पर नियमानुसार 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।पटाखा बाजार के लिए ऐसे स्थान का चयन करने को कहा गया जहां पर्याप्त पार्किंग, दुकानों के बीच निर्धारित दूरी तथा आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध हो।
ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग निर्धारित नियमों और सीमाओं के अंतर्गत करने तथा धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
शांति समिति के सदस्यों की भी जिम्मेदारी, केवल सवाल उठाना पर्याप्त नहीं
शांति समिति में शामिल सदस्यों की भूमिका केवल समस्याएं गिनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। समाज में सौहार्द बनाए रखना, आयोजकों और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करना तथा नागरिकों को नियमों के पालन के लिए प्रेरित करना भी उनकी जिम्मेदारी है।बैठक में व्यक्तिगत और व्यापारिक विषयों के उठने के बीच यह प्रश्न भी सामने आया कि क्या शांति समिति की बैठकों को अधिक व्यवस्थित और विषय केंद्रित बनाने की आवश्यकता है?यदि प्रत्येक सदस्य को निर्धारित समय में अपने क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं रखने का अवसर मिले और विभागीय अधिकारियों से स्पष्ट जवाब प्राप्त हो, तो ऐसी बैठकों की उपयोगिता और बढ़ सकती है।
निर्देशों की वास्तविक परीक्षा अब धरातल पर
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव और पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगि ने आगामी त्योहारों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने का भरोसा दिलाया है।लेकिन बैठक में सामने आई नगरीय समस्याओं ने यह भी स्पष्ट किया कि त्योहारों से पहले अनेक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।अब सवाल यह है कि क्या नगर पालिका समय रहते सड़कों की मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक कार्य पूरे कर पाएगी? क्या बाजारों में यातायात सुगम होगा? क्या धार्मिक आयोजनों में महिलाओं और श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण मिलेगा?दमोह की रावण दहन और मोरगंज काली जैसी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की गरिमा बनाए रखना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही आवश्यक है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और नागरिकों की सुविधाओं से कोई समझौता न हो।शांति समिति की बैठक में निर्देश तो अनेक दिए गए, अब देखना यह होगा कि इनका असर सड़कों, बाजारों, मंदिरों और आयोजन स्थलों पर कितना दिखाई देता है। क्योंकि किसी भी प्रशासनिक बैठक की वास्तविक सफलता उसके निर्णयों के धरातल पर क्रियान्वयन से ही निर्धारित होती है।
