नव शक्ति गरबा महोत्सव की भव्य तैयारियां अंतिम चरण की ओर, प्रतिदिन तीन घंटे चल रहा नृत्य अभ्यास; इस बार नए स्वरूप, विशेष प्रस्तुतियों और पारंपरिक गरबा से होगा मां आदिशक्ति का गुणगान
एक दशक से अधिक समय से सनातन संस्कृति और नारी शक्ति की पहचान बना महोत्सव, अध्यक्ष मंजू राजपूत, सचिव डॉ. हंसा वैष्णव सहित समिति के पदाधिकारी तैयारियों में जुटे
दमोह। शक्ति की आराधना, भक्ति की अनुभूति, भारतीय संस्कृति की अनुपम छटा और पारंपरिक लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों का अद्भुत संगम एक बार फिर दमोह की धरती पर दिखाई देने वाला है। नवरात्रि के पावन अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक तहसील ग्राउंड का विशाल प्रांगण एक बार फिर मां आदिशक्ति की आराधना और गरबा की मधुर ताल से गुंजायमान होगा। नव शक्ति गरबा उत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस वृहद सांस्कृतिक एवं धार्मिक महोत्सव की तैयारियां उत्साह और उमंग के साथ चल रही हैं। विशेष बात यह है कि इस वर्ष आयोजन को पूर्व वर्षों की अपेक्षा और अधिक आकर्षक, भव्य तथा नवीन स्वरूप प्रदान करने की तैयारी की जा रही है।
मां दुर्गा की भक्ति में सराबोर होने के लिए मातृशक्ति और युवतियों में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। पारंपरिक गरबा गीतों की मधुर धुन, नृत्य की लयबद्ध मुद्राएं और सामूहिक प्रस्तुतियों का अभ्यास आयोजन से पहले ही उत्सव जैसा वातावरण निर्मित कर रहा है। आयोजकों का प्रयास है कि यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन बनकर न रह जाए, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और नारी शक्ति के सम्मान का प्रेरणादायी संदेश भी समाज तक पहुंचाए।
एक दशक से अधिक की गौरवशाली परंपरा, दमोह की सांस्कृतिक पहचान बना महोत्सव
नव शक्ति गरबा महोत्सव पिछले एक दशक से अधिक समय से दमोह की धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में अपना विशिष्ट स्थान बनाए हुए है। वर्ष दर वर्ष बढ़ती सहभागिता और नागरिकों के सहयोग ने इस आयोजन को जिले के प्रमुख गरबा महोत्सवों में स्थापित किया है।इस आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता भारतीय संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों के प्रति इसकी प्रतिबद्धता है। यहां गरबा को केवल नृत्य अथवा मनोरंजन के रूप में नहीं, बल्कि मां आदिशक्ति की आराधना के एक माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। पारंपरिक भारतीय परिधान, धार्मिक गीत, सामूहिक नृत्य और भक्तिमय वातावरण आयोजन को विशेष पहचान प्रदान करते हैं।
आयोजन समिति का मानना है कि आधुनिकता के इस दौर में नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। गरबा महोत्सव के माध्यम से युवतियों और महिलाओं को भारतीय लोककला, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से परिचित कराने का भी प्रयास किया जा रहा है।
सांसद राहुल सिंह लोधी के आवास से अब तहसील ग्राउंड पहुंचा गरबा अभ्यास
महोत्सव की तैयारियों का विधिवत शुभारंभ प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना और भूमि पूजन के साथ किया गया था। इसके पश्चात गरबा नृत्य के प्रशिक्षण और अभ्यास का क्रम प्रारंभ हुआ।प्रारंभिक दिनों में दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी के आवास पर मातृशक्ति द्वारा गरबा नृत्य का अभ्यास किया जा रहा था। अब अभ्यास का स्थान परिवर्तित कर आयोजन स्थल तहसील ग्राउंड कर दिया गया है, जहां प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक प्रतिभागी गरबा की विभिन्न प्रस्तुतियों का अभ्यास कर रही हैं।
अभ्यास के दौरान महिलाओं और युवतियों का उत्साह देखते ही बन रहा है। कोई पारंपरिक गरबा की मुद्राओं को सीखने में व्यस्त है, तो कोई समूह नृत्य में तालमेल बैठाने का अभ्यास कर रही है। संगीत की लय और कदमों की थाप के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय दिखाई देता है।विशेष रूप से सामूहिक प्रस्तुतियों को प्रभावशाली बनाने के लिए नृत्य की गति, लय, ताल और पारंपरिक मुद्राओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
इस बार कुछ नया और विशेष देखने को मिलेगा — मंजू राजपूत
नव शक्ति गरबा उत्सव समिति की अध्यक्ष मंजू राजपूत ने बताया कि महोत्सव की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ चल रही हैं। समिति के सभी पदाधिकारी और सहयोगी आयोजन को सफल बनाने के लिए अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि नव शक्ति गरबा महोत्सव को दमोह की मातृशक्ति और नागरिकों का निरंतर स्नेह एवं सहयोग मिलता रहा है। यही जनसमर्थन आयोजन समिति के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।
मंजू राजपूत के अनुसार, इस वर्ष आयोजन को और अधिक भव्य एवं आकर्षक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विशेष रूप से गरबा प्रस्तुतियों में नवीनता लाने तथा पारंपरिक संस्कृति की झलक को और प्रभावशाली तरीके से सामने रखने की तैयारियां चल रही हैं।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस बार भी महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गरिमा और सामाजिक सहभागिता की सुंदर मिसाल प्रस्तुत करेगा।
गरबा केवल नृत्य नहीं, मां की आराधना और संस्कृति के संरक्षण का माध्यम — डॉ. हंसा वैष्णव
समिति की सचिव डॉ. हंसा वैष्णव ने बताया कि भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना और भूमि पूजन के साथ आयोजन की तैयारियों को धार्मिक स्वरूप प्रदान किया गया है। इसके बाद से ही मातृशक्ति द्वारा नियमित रूप से गरबा नृत्य का अभ्यास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। नौ दिनों तक मां आदिशक्ति के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है। गरबा इसी भक्ति परंपरा का एक सुंदर और सामूहिक स्वरूप है।
डॉ. हंसा वैष्णव ने कहा कि आयोजन का मूल उद्देश्य भारतीय संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, धार्मिक गीतों और सनातन मूल्यों को प्रोत्साहित करना है। विशेष रूप से नई पीढ़ी को यह समझाना आवश्यक है कि गरबा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि इसके पीछे हमारी धार्मिक आस्था, लोकपरंपराएं और सांस्कृतिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं।उन्होंने कहा कि जब मातृशक्ति सामूहिक रूप से मां की आराधना करती है, तो वह दृश्य न केवल आकर्षक होता है, बल्कि समाज में एकता, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना का संदेश भी देता है।
मातृशक्ति की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता — संगीता राजपूत
समिति की पदाधिकारी संगीता राजपूत ने बताया कि नव शक्ति गरबा महोत्सव में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां सहभागिता करती हैं। ऐसे में आयोजन समिति महिलाओं की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान को विशेष प्राथमिकता देती है।उन्होंने कहा कि आयोजन स्थल पर व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित बनाने तथा प्रतिभागियों को सुरक्षित और सहज वातावरण उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।संगीता राजपूत के अनुसार, समिति का प्रयास है कि आयोजन में सम्मिलित होने वाली प्रत्येक महिला और युवती बिना किसी असुविधा के धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सहभागिता कर सके। गरबा महोत्सव में अनुशासन, मर्यादा और भारतीय परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
कोरियोग्राफर वतन विश्वकर्मा तैयार कर रहे विशेष प्रस्तुतियां
महोत्सव में गरबा नृत्य प्रशिक्षण की जिम्मेदारी कोरियोग्राफर वतन विश्वकर्मा संभाल रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रतिदिन महिलाओं और युवतियों को पारंपरिक गरबा की विभिन्न मुद्राओं, समूह नृत्य, तालमेल और मंचीय प्रस्तुतियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।वतन विश्वकर्मा ने बताया कि इस वर्ष गरबा महोत्सव में दर्शकों को कुछ नया देखने को मिलेगा। इसके लिए विशेष रूप से पारंपरिक गीतों और आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि नृत्य के दौरान भारतीय संस्कृति और धार्मिक भावनाओं की झलक प्रमुखता से दिखाई दे, इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। सामूहिक प्रस्तुतियों को प्रभावशाली बनाने के लिए प्रतिभागियों को नियमित अभ्यास कराया जा रहा है।उनका प्रयास है कि जब तहसील ग्राउंड में मातृशक्ति एक साथ गरबा की ताल पर मां आदिशक्ति की आराधना करे, तो प्रत्येक प्रस्तुति में भक्ति, अनुशासन और भारतीय लोककला की सुंदर अनुभूति हो।
पारंपरिक परिधान, भक्ति गीत और सामूहिक नृत्य होंगे प्रमुख आकर्षण
आयोजन समिति के अनुसार, महोत्सव में भारतीय पारंपरिक वेशभूषा को विशेष महत्व दिया जाएगा। गरबा प्रस्तुतियों में मातृशक्ति का पारंपरिक परिधानों में सामूहिक नृत्य आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगा।मां दुर्गा की आराधना से जुड़े गीतों और पारंपरिक गरबा संगीत के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजन में आधुनिकता के साथ सांस्कृतिक मर्यादाओं और धार्मिक परंपराओं का संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।गरबा की लयबद्ध ताल, पारंपरिक परिधानों की रंग-बिरंगी छटा और मां की आराधना में लीन मातृशक्ति का उत्साह इस महोत्सव को एक अलग पहचान प्रदान करेगा।
नारी शक्ति के उत्साह से जीवंत होगी भारतीय संस्कृति
नव शक्ति गरबा महोत्सव की एक विशेष पहचान इसमें महिलाओं और युवतियों की सक्रिय भागीदारी भी है। आयोजन के माध्यम से मातृशक्ति को अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।विभिन्न आयु वर्ग की महिलाओं का एक साथ गरबा अभ्यास करना सामाजिक एकता और सांस्कृतिक सहभागिता का सुंदर उदाहरण है। यहां नृत्य के साथ अनुशासन, सामूहिक समन्वय और परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित होती है।समिति से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि दमोह के नागरिकों, राष्ट्रप्रेमी समाज और मातृशक्ति का सहयोग ही इस आयोजन की वास्तविक शक्ति है। पिछले एक दशक से अधिक समय से निरंतर मिल रहा जनसमर्थन महोत्सव को हर वर्ष नई ऊर्जा प्रदान करता रहा है।
तहसील ग्राउंड बनेगा भक्ति और संस्कृति का संगम
नव शक्ति गरबा महोत्सव को लेकर चल रही तैयारियों ने यह संकेत दे दिया है कि इस बार भी तहसील ग्राउंड में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उल्लास का विशेष वातावरण देखने को मिलेगा।एक ओर मां आदिशक्ति की आराधना होगी, तो दूसरी ओर पारंपरिक गरबा की ताल पर मातृशक्ति भारतीय संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरेगी। सामूहिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भक्ति, शक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश दिया जाएगा।
नव शक्ति गरबा महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहां गरबा के कदम केवल संगीत की ताल पर नहीं उठते, बल्कि प्रत्येक कदम के साथ मां आदिशक्ति के प्रति श्रद्धा, भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण और सनातन परंपराओं के संरक्षण का भाव भी जुड़ा होता है।अब दमोहवासियों को उस अवसर की प्रतीक्षा है, जब तहसील ग्राउंड का विशाल प्रांगण मां के जयकारों, पारंपरिक गरबा गीतों और मातृशक्ति की मनमोहक प्रस्तुतियों से गुंजायमान होगा तथा आस्था, शक्ति और संस्कृति का यह उत्सव एक बार फिर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।
