बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में निकलेगी सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा, पांच जिलों में धर्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता का संदेश
13 अक्टूबर को दमोह में होगा ऐतिहासिक संत समागम का आयोजन, पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में विशाल धर्मसभा की तैयारियां तेज, प्रशासन भी व्यवस्थाओं को लेकर सक्रिय
दमोह/बुंदेलखंड की धरती एक बार फिर सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और हिंदू एकता के व्यापक संदेश की साक्षी बनने जा रही है। बागेश्वर धाम सिद्ध तीर्थ क्षेत्र के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में 11 अक्टूबर से पांच दिवसीय सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा का शुभारंभ होने जा रहा है। सात प्रमुख संकल्पों के साथ निकलने वाली यह यात्रा बुंदेलखंड के पन्ना, दमोह, सागर, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में जनजागरण का संदेश देगी। यात्रा के दौरान संत समागम, धार्मिक प्रवचन, हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ और संकटनाशन हवन जैसे धार्मिक आयोजन होंगे।
इस यात्रा की विशेषता यह है कि इसमें धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सुधार, व्यसन मुक्ति, समानता, समरसता, मंदिरों के संरक्षण और भारतीय संस्कृति के संवर्धन जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई है। पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री स्वयं विभिन्न स्थानों पर जनसमुदाय को संबोधित करते हुए यात्रा के सात संकल्पों का महत्व बताएंगे। उनके साथ बड़ी संख्या में साधु-संतों के शामिल होने की जानकारी भी सामने आई है।
अजयगढ़ से प्रारंभ होगी यात्रा, हटा में रात्रि विश्राम के बाद 13 अक्टूबर को दमोह आगमन
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा 11 अक्टूबर को पन्ना जिले के अजयगढ़ से प्रारंभ होगी। यात्रा पन्ना जिले के पवई पहुंचेगी, जहां भोजन एवं विश्राम की व्यवस्था रहेगी। इसके बाद 12 अक्टूबर को यात्रा पवई से दमोह जिले के हटा के लिए प्रस्थान करेगी। हटा में रात्रि विश्राम के साथ धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।13 अक्टूबर को प्रातः यात्रा हटा से रवाना होकर पटेरा, हिंडोरिया और समन्ना होते हुए दोपहर में दमोह जिला मुख्यालय पहुंचेगी। यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों द्वारा स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं।दमोह में इस यात्रा को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन से जुड़े लोग इसे केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि बुंदेलखंड में सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा देने वाला अभियान बता रहे हैं।
पॉलिटेक्निक कॉलेज के विशाल मैदान में धीरेंद्र शास्त्री का संबोधन, संतों के आशीर्वचन भी होंगे
दमोह जिला मुख्यालय पर यात्रा का मुख्य आयोजन स्थानीय शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के विशाल प्रांगण में प्रस्तावित है। यहां लगभग दो घंटे की धर्मसभा एवं संत समागम का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा के उद्देश्य, समाज के समक्ष उपस्थित चुनौतियों और सात संकल्पों पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे। उनके साथ यात्रा में शामिल साधु-संत भी श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान करेंगे।धर्मसभा में दमोह शहर के अतिरिक्त हटा, पथरिया, तेंदूखेड़ा, जबेरा, बटियागढ़, पटेरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोजन स्थल पर व्यापक व्यवस्थाओं की तैयारियां की जा रही हैं।
सात संकल्पों के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का प्रयास
सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा के केंद्र में सात प्रमुख संकल्प रखे गए हैं। इनमें व्यसन मुक्ति, समानता एवं सामाजिक समरसता, सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार, कथित लव जिहाद के विरुद्ध जागरूकता एवं प्रतिकार, जीर्ण-शीर्ण मंदिरों का जीर्णोद्धार एवं सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संगठन एवं संत समागम तथा भव्य और परम वैभवशाली भारत के निर्माण का संकल्प सम्मिलित है।इन संकल्पों में व्यसन मुक्ति को विशेष महत्व दिया गया है। समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और उसके कारण परिवारों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए युवाओं को नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने का उद्देश्य रखा गया है।
वहीं समानता एवं समरसता के माध्यम से जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी सद्भाव और एकजुटता बढ़ाने का संदेश दिया जाएगा। मंदिरों के जीर्णोद्धार का संकल्प उन प्राचीन धार्मिक स्थलों के संरक्षण से जुड़ा है, जो देखरेख के अभाव में उपेक्षित अवस्था में हैं।यात्रा के माध्यम से सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक संगठन को मजबूत करने और नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का प्रयास भी किया जाएगा। आयोजकों का उद्देश्य धार्मिक चेतना के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन का वातावरण तैयार करना है।
चार रात्रि विश्राम, हनुमान चालीसा पाठ और सामूहिक संकटनाशन हवन
पांच दिवसीय रथ यात्रा के दौरान चार रात्रि विश्राम निर्धारित किए गए हैं। विभिन्न पड़ावों पर धार्मिक अनुष्ठान, हनुमान चालीसा पाठ और सामूहिक संकटनाशन हवन आयोजित होंगे।इन आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक गतिविधियों में सहभागी बनाने के साथ यात्रा के संकल्पों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। यात्रा में संतों की उपस्थिति और उनके प्रवचन प्रमुख आकर्षण रहेंगे।बुंदेलखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में संतों का विशेष स्थान रहा है। ऐसे में इस यात्रा को संत समाज और जनसामान्य के बीच संवाद स्थापित करने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।
दमोह में भव्य स्वागत की तैयारी, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था रहेगी महत्वपूर्ण
13 अक्टूबर को दमोह में आयोजित होने वाली धर्मसभा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। आयोजकों द्वारा मंच, श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था, पेयजल, ध्वनि विस्तारक यंत्र, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।यात्रा के नगर में प्रवेश से लेकर कार्यक्रम स्थल तक श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। विशेषकर हटा, पटेरा, हिंडोरिया और समन्ना मार्ग से आने वाले वाहनों तथा नगर के भीतर संभावित भीड़ को देखते हुए यातायात प्रबंधन की आवश्यकता रहेगी।शासन-प्रशासन और आयोजन से जुड़े लोगों के बीच समन्वय के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण में संपन्न हो सके।
बुंदेलखंड से पूरे देश को एकता का संदेश देने की पहल
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पिछले कुछ समय से देश के विभिन्न क्षेत्रों में पदयात्राओं, धार्मिक सभाओं और प्रवचनों के माध्यम से सनातन संस्कृति तथा सामाजिक एकता का संदेश देते रहे हैं। उनके धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता देखने को मिलती रही है।इसी क्रम में बुंदेलखंड के सागर संभाग में आयोजित होने वाली यह रथ यात्रा क्षेत्र के धार्मिक और सामाजिक जीवन में एक महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में सामने आ रही है।दमोह में धर्मसभा के पश्चात यात्रा निर्धारित मार्ग से सागर, टीकमगढ़ और जतारा होते हुए छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम पहुंचेगी। विभिन्न पड़ावों पर यात्रा के संकल्पों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
दमोह की धरती से उठेगा सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति का संदेश
अब दमोह सहित समूचे बुंदेलखंड की निगाहें इस पांच दिवसीय यात्रा पर केंद्रित हैं। विशेष रूप से 13 अक्टूबर को पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में होने वाली धर्मसभा को लेकर उत्साह है।इस आयोजन के माध्यम से पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री समाज को क्या संदेश देते हैं, सात संकल्पों को व्यवहार में उतारने के लिए कौन-सा आह्वान करते हैं और सामाजिक समरसता तथा सांस्कृतिक एकता को लेकर क्या दिशा प्रस्तुत करते हैं, यह देखने का विषय होगा।धार्मिक आस्था, संतों के सान्निध्य और सामाजिक जागरूकता के संकल्पों के साथ निकलने वाली यह यात्रा बुंदेलखंड में एकता और सांस्कृतिक चेतना का व्यापक संदेश देने का प्रयास करेगी।
