अधीक्षण अभियंता अमित चौहान ने आयोजन समितियों को दिया महत्वपूर्ण संदेश, सुरक्षित विद्युत कनेक्शन और वायरिंग पर विशेष जोर
श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि, कटे-फटे तारों से बचें, बिजली की सजावट में बरतें सावधानी, पंडालों का निरीक्षण करेंगी विद्युत विभाग की टीमें
(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
दमोह, 12 अक्टूबर 2026/शक्ति की आराधना, भक्ति, उल्लास और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा के प्रतीक शारदीय नवरात्रि, दुर्गोत्सव एवं गरबा महोत्सव के दौरान जहां एक ओर आकर्षक विद्युत सजावट से पंडाल जगमगाते हैं, वहीं दूसरी ओर विद्युत सुरक्षा की अनदेखी कभी-कभी गंभीर दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकती है। धार्मिक आयोजनों की भव्यता के बीच श्रद्धालुओं, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रत्येक आयोजन समिति की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। इसी उद्देश्य को लेकर मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, दमोह द्वारा दुर्गोत्सव एवं गरबा आयोजन समितियों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
इस संबंध में जानकारी देते हुए अमित चौहान, अधीक्षण अभियंता (संचालन एवं संधारण), वृत्त मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, दमोह ने बताया कि दुर्गोत्सव और गरबा महोत्सव के दौरान आयोजन स्थलों पर सुरक्षित विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विभागीय अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आयोजन समितियों से अपील की है कि वे विद्युत सुरक्षा को औपचारिकता न समझें, बल्कि इसे श्रद्धालुओं के जीवन की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानकर आवश्यक सावधानियां बरतें।
भक्ति और उत्सव के बीच मानव जीवन की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण
अधीक्षण अभियंता अमित चौहान ने बताया कि नवरात्रि के दौरान देवी प्रतिमाओं की स्थापना, आकर्षक झांकियों, विद्युत सजावट, गरबा नृत्य एवं धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे अवसरों पर विद्युत उपकरणों का उपयोग भी सामान्य दिनों की अपेक्षा बढ़ जाता है।विशेष रूप से रात के समय पंडालों में आकर्षक रोशनी, सजावटी झालरों, साउंड सिस्टम और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग किया जाता है। ऐसे में असुरक्षित वायरिंग, खुले तार, ढीले कनेक्शन अथवा विद्युत क्षमता से अधिक भार दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा सकते हैं।उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन तभी सार्थक माने जाएंगे, जब उनमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति सुरक्षित वातावरण में पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग ले सके। आयोजन की भव्यता के साथ सुरक्षा व्यवस्थाओं की मजबूती भी उतनी ही आवश्यक है।
अस्थायी विद्युत कनेक्शन लेना जरूरी, अवैध तरीके से बिजली का उपयोग न करें
अमित चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि दुर्गोत्सव एवं गरबा आयोजन समितियों को नियमानुसार अस्थायी विद्युत कनेक्शन प्राप्त करना चाहिए। इसके लिए संबंधित विद्युत वितरण केंद्र के अधिकारियों से संपर्क कर निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जाए।उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अधिकृत कनेक्शन के सीधे विद्युत लाइन से तार जोड़ना अथवा असुरक्षित तरीके से बिजली का उपयोग करना खतरनाक हो सकता है। इससे न केवल विद्युत दुर्घटना की आशंका रहती है, बल्कि अन्य लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।आयोजन समितियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पंडालों में विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था प्रशिक्षित एवं योग्य इलेक्ट्रिशियन की सहायता से कराई जाए। विद्युत भार के अनुरूप तारों और उपकरणों का चयन किया जाए तथा आवश्यक सुरक्षा उपकरण लगाए जाएं।
कटे-फटे तार, खुले जोड़ और असुरक्षित वायरिंग से रहें सावधान
अधीक्षण अभियंता ने बताया कि दुर्गा पंडालों और गरबा आयोजन स्थलों पर क्षतिग्रस्त, कटे-फटे तथा खुले विद्युत तारों का किसी भी स्थिति में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।कई बार आकर्षक सजावट के लिए बड़ी संख्या में विद्युत झालरें, एलईडी लाइटें और अन्य उपकरण लगाए जाते हैं। इनकी वायरिंग यदि सुरक्षित नहीं है, तो करंट लगने अथवा शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाएं हो सकती हैं।विशेष रूप से उन स्थानों पर अधिक सावधानी आवश्यक है, जहां श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक रहती है। प्रवेश और निकास द्वार, मंच, प्रतिमा स्थल, गरबा नृत्य क्षेत्र तथा बच्चों की पहुंच वाले स्थानों पर खुले तार या असुरक्षित विद्युत उपकरण नहीं होने चाहिए।
बारिश और नमी के दौरान बढ़ जाता है करंट लगने का खतरा
विद्युत सुरक्षा के दृष्टिकोण से आयोजन समितियों को बारिश, नमी और जलभराव की परिस्थितियों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।गीली जमीन पर रखे विद्युत उपकरण, पानी के संपर्क में आने वाले तार तथा असुरक्षित विद्युत जोड़ गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। इसलिए विद्युत बोर्ड, स्विच और अन्य उपकरणों को पानी एवं नमी से सुरक्षित स्थानों पर स्थापित किया जाना चाहिए।
धातु के खंभों, लोहे के ढांचों और पंडालों में लगे विद्युत उपकरणों की अर्थिंग तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच योग्य तकनीकी व्यक्ति से कराई जानी चाहिए।आयोजन समितियों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि विद्युत तार श्रद्धालुओं के आवागमन वाले रास्तों पर खुले न पड़े हों और किसी भी उपकरण से करंट आने की आशंका दिखाई देने पर तत्काल उसका उपयोग बंद कर विद्युत विभाग अथवा योग्य इलेक्ट्रिशियन की सहायता ली जाए।
गरबा पंडालों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
गरबा महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य एवं धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। ऐसे आयोजनों में प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि उपकरण, मंच तथा सजावट से जुड़े विद्युत कनेक्शनों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।नृत्य स्थल के आसपास विद्युत तारों को सुरक्षित ढंग से व्यवस्थित किया जाए, ताकि नृत्य करते समय किसी प्रतिभागी का संपर्क असुरक्षित उपकरण या खुले तार से न हो।विशेष रूप से साउंड सिस्टम, प्रकाश व्यवस्था और अन्य अधिक विद्युत भार वाले उपकरणों के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्था की जानी चाहिए।
इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर की एनओसी और सुरक्षा मानकों का पालन करें
अधीक्षण अभियंता अमित चौहान ने बताया कि आयोजन समितियों को विद्युत सुरक्षा संबंधी निर्धारित नियमों का पालन करने तथा आवश्यकतानुसार इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्राप्त करने के लिए निर्देशित किया गया है।उन्होंने कहा कि विद्युत सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को केवल आयोजन प्रारंभ होने के समय ही नहीं, बल्कि पूरे आयोजन के दौरान बनाए रखना जरूरी है।समिति पदाधिकारियों को अस्थायी विद्युत कनेक्शन, सुरक्षित वायरिंग और आवश्यक सावधानियों के संबंध में लिखित रूप से जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए गए हैं।
विद्युत विभाग की टीमें करेंगी पंडालों का समय-समय पर निरीक्षण
अमित चौहान ने बताया कि दमोह ग्रामीण एवं तेंदूखेड़ा उपसंभाग सहित संबंधित वितरण केंद्रों के अधिकारियों को दुर्गोत्सव समितियों से संपर्क स्थापित कर सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों से अवगत कराने के लिए कहा गया है।विभागीय अधिकारी अपनी टीमों के साथ दुर्गा पंडालों का समय-समय पर निरीक्षण करेंगे। इस दौरान अस्थायी विद्युत कनेक्शन, तारों की स्थिति और सुरक्षा मानकों के पालन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।शांति समिति की बैठकों के माध्यम से भी आयोजकों और समिति पदाधिकारियों को विद्युत सुरक्षा संबंधी जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
दुर्घटना की स्थिति में स्वयं तार छूने या सुधार करने का प्रयास न करें
विद्युत सुरक्षा के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। यदि किसी पंडाल में विद्युत तार टूटने, उपकरण में करंट आने, चिंगारी निकलने अथवा शॉर्ट सर्किट जैसी स्थिति दिखाई दे, तो तत्काल लोगों को उस स्थान से दूर किया जाना चाहिए।बिना प्रशिक्षण के किसी व्यक्ति को विद्युत तार या उपकरण छूकर सुधार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में संबंधित विद्युत वितरण केंद्र अथवा विद्युत विभाग के अधिकृत कर्मचारियों को सूचना देना आवश्यक है।करंट लगने की स्थिति में विद्युत आपूर्ति सुरक्षित रूप से बंद कराए बिना प्रभावित व्यक्ति को सीधे हाथ से छूना भी खतरनाक हो सकता है। आवश्यकता पड़ने पर तत्काल आपातकालीन सहायता प्राप्त की जानी चाहिए।
केवल आयोजन की भव्यता नहीं, सुरक्षित आयोजन भी बने पहचान
अधीक्षण अभियंता अमित चौहान ने आयोजन समितियों और नागरिकों से अपील की है कि दुर्गोत्सव एवं गरबा महोत्सव के दौरान सुरक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी निभाएं।उन्होंने बताया कि सुरक्षित अस्थायी विद्युत कनेक्शन लेने और विद्युत सुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन करने की जिम्मेदारी संबंधित आयोजन समितियों की होगी। वहीं विभागीय अधिकारी भी आवश्यक मार्गदर्शन एवं निरीक्षण के माध्यम से सुरक्षित विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सजावट, रोशनी और भव्यता का अपना महत्व है, लेकिन इन सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानव जीवन की सुरक्षा है। थोड़ी सी सावधानी किसी परिवार को बड़ी दुर्घटना और अपूरणीय क्षति से बचा सकती है।दुर्गोत्सव एवं गरबा महोत्सव केवल आस्था और उत्साह के आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और सामूहिक अनुशासन के भी अवसर हैं। इसलिए प्रत्येक समिति को चाहिए कि आयोजन की तैयारियों में विद्युत सुरक्षा को प्रमुख स्थान दे।
संदेश स्पष्ट है—मां शक्ति की आराधना का पर्व सुरक्षित हो, हर पंडाल रोशन हो, हर श्रद्धालु सुरक्षित हो और उत्सव की खुशियां किसी भी लापरवाही के कारण प्रभावित न हों।
