एपी सिंह ने 28 जनवरी 1984 को इसी एयर फोर्स एकेडमी से किरण विमान के जरिए अपनी पहली उड़ान भरी थी। चार दशक से अधिक समय बाद उसी स्थान और उसी प्रकार के विमान में अंतिम आधिकारिक उड़ान पूरी करके उन्होंने अपने करियर के एक खास अध्याय को प्रतीकात्मक रूप से पूरा किया। विमान की पहचान संख्या U 707 थी। इस उड़ान के साथ उनकी शुरुआती प्रशिक्षण यात्रा और वर्तमान जिम्मेदारी के बीच एक अनूठा जुड़ाव देखने को मिला।
उड़ान पूरी होने के बाद एपी सिंह ने कहा कि उन्होंने अपनी वायुसेना यात्रा इसी बेसिक ट्रेनर विमान से शुरू की थी। उन्होंने यह भी कहा कि संभवतः वह पहले ऐसे वायुसेना प्रमुख हैं, जो उसी बेसिक ट्रेनर विमान से सेवानिवृत्ति की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में उड़ाया था और जो अब भी सेवा में है। उन्होंने अपने पहले प्रशिक्षक वीएस कोचर के प्रति आभार जताते हुए कहा कि कोचर ने इसी स्थान पर उन्हें उड़ान भरना सिखाया था। इसी वजह से वह अपने फ्लाइंग करियर का यह महत्वपूर्ण पड़ाव उनके साथ पूरा करना चाहते थे।
किरण विमान के एयर फोर्स एकेडमी के रनवे पर उतरते ही वहां मौजूद वायुसेना के अधिकारियों और जवानों ने वाटर कैनन सैल्यूट देकर उनका स्वागत किया। यह सम्मान वायुसेना में एक विशेष अवसर पर दिया जाने वाला पारंपरिक अभिनंदन है। इस मौके पर एपी सिंह के पूर्व प्रशिक्षक वीएस कोचर भी मौजूद थे। 73 वर्षीय कोचर अपने पूर्व छात्र के साथ दोबारा आसमान में उड़ान भरने के अनुभव से भावुक नजर आए।
कोचर ने एपी सिंह की प्रशंसा करते हुए उन्हें अपने सबसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि एपी सिंह बेहतरीन वायुसेना प्रमुखों में शामिल हैं और उनके साथ दोबारा उड़ान भरना किसी सपने के सच होने जैसा है। इस अनुभव ने प्रशिक्षक और प्रशिक्षु के उस रिश्ते को भी रेखांकित किया, जो प्रशिक्षण के वर्षों बाद भी कायम रहता है।
इससे पहले 12 अक्टूबर को एपी सिंह ने जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ के दौरान स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस में अपनी अंतिम फाइटर जेट उड़ान भरी थी। तेजस की उड़ान लड़ाकू विमान संचालन से जुड़ी उनकी यात्रा का एक अहम पड़ाव थी, जबकि किरण विमान में मंगलवार को भरी गई उड़ान वर्दी में उनकी अंतिम आधिकारिक उड़ान बनी।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की सेवानिवृत्ति इसी महीने के अंत में निर्धारित बताई गई है। ऐसे समय में अपने पहले प्रशिक्षक के साथ उसी विमान में उड़ान भरना, जिसमें उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान करियर शुरू किया था, उनके लिए विशेष महत्व रखता है। यह घटना वायुसेना के प्रशिक्षण, पेशेवर अनुशासन और अनुभव की निरंतरता को भी सामने लाती है।
चार दशक से अधिक के फ्लाइंग करियर के इस पड़ाव में पहली उड़ान से अंतिम आधिकारिक उड़ान तक का जुड़ाव विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। जिस संस्थान और विमान से एपी सिंह ने अपने विमानन जीवन की शुरुआत की थी, उसी से जुड़कर उन्होंने वर्दी में अपनी अंतिम उड़ान पूरी की। उनके साथ पहले प्रशिक्षक की मौजूदगी ने इस अवसर को और यादगार बना दिया।
