
पूर्व भारतीय क्रिकेटर मुरली कार्तिक ने वैभव की मौजूदा स्थिति पर अपनी राय रखते हुए कहा है कि क्रिकेट में हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को तुरंत प्लेइंग इलेवन में जगह मिल जाए यह जरूरी नहीं है। कई बार खिलाड़ियों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है और इस सच्चाई को स्वीकार करना उनके करियर का अहम हिस्सा होता है। कार्तिक के मुताबिक किसी खिलाड़ी को केवल इसलिए टीम से बाहर नहीं किया जा सकता कि कोई दूसरा युवा खिलाड़ी अधिक रोमांचक प्रतिभा के रूप में सामने आया है। चयन के पीछे ठोस वजह और टीम की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।
भारतीय टीम में ओपनिंग की जगह को लेकर इस समय मुकाबला काफी दिलचस्प है। अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन जैसे स्थापित खिलाड़ियों के रहते वैभव के लिए तुरंत नियमित जगह बनाना आसान नहीं होगा। दोनों खिलाड़ी 2026 टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में केवल एक युवा खिलाड़ी को मौका देने के लिए मौजूदा संयोजन में बदलाव करना टीम प्रबंधन के लिए आसान फैसला नहीं होगा।
मुरली कार्तिक ने भी इस बात पर जोर दिया कि केवल बदलाव करने के लिए बदलाव नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि भारतीय ओपनिंग जोड़ी के प्रदर्शन में उतार चढ़ाव जरूर रहा है लेकिन इसी जोड़ी ने टीम को कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में जीत भी दिलाई है। ऐसे में कुछ मैचों के प्रदर्शन के आधार पर स्थापित खिलाड़ियों को बाहर करना सही रणनीति नहीं मानी जा सकती। टीम प्रबंधन को खिलाड़ियों के पिछले योगदान और भविष्य की योजनाओं दोनों को ध्यान में रखकर फैसला लेना होता है।
वैभव सूर्यवंशी के लिए यशस्वी जायसवाल का उदाहरण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रतिभाशाली बल्लेबाज होने के बावजूद सीमित ओवरों की टीम में नियमित जगह हासिल करना आसान नहीं होता। टीम में पहले से मौजूद खिलाड़ियों और टीम संयोजन के कारण कई बार अच्छे खिलाड़ी को भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इससे यह साफ होता है कि प्रतिभा किसी खिलाड़ी को पहचान दिला सकती है लेकिन नियमित अवसर हासिल करने के लिए परिस्थितियों का साथ देना भी जरूरी है।
कार्तिक के मुताबिक कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर वैभव से इस मुद्दे पर बातचीत कर रहे होंगे। इसका अर्थ यह नहीं है कि युवा बल्लेबाज टीम की योजनाओं से बाहर हैं। बल्कि उन्हें सही समय पर अवसर देने और भविष्य के लिए तैयार रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। वैभव को इस दौरान अपनी फिटनेस तकनीक और बल्लेबाजी की निरंतरता पर ध्यान देना होगा ताकि मौका मिलने पर वह प्रभावशाली प्रदर्शन कर सकें।
दूसरी ओर संजू सैमसन का हालिया प्रदर्शन वैभव के लिए प्रतिस्पर्धा को और कठिन बना रहा है। टी20 विश्व कप 2026 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे संजू ने अपने पिछले दस मैचों में चार अर्धशतक लगाए हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में भी उनके प्रदर्शन ने टीम में उनकी दावेदारी को मजबूत किया है। अभिषेक शर्मा और ईशान किशन जैसे विकल्पों की मौजूदगी से भारतीय टीम के पास शीर्ष क्रम में कई विकल्प उपलब्ध हैं।
ऐसे में वैभव सूर्यवंशी को समझना होगा कि आईपीएल की सफलता उनके करियर की बड़ी उपलब्धि जरूर है लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबी पारी खेलने के लिए धैर्य और निरंतरता भी जरूरी है। कम उम्र में मिली लोकप्रियता उनके लिए अवसरों के दरवाजे खोल सकती है लेकिन दबाव को संभालना और अपने मौके का पूरा फायदा उठाना ही उन्हें आगे बढ़ाएगा। फिलहाल उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती इंतजार के इस दौर में खुद को तैयार रखना है क्योंकि टीम इंडिया में जगह बनाने की असली परीक्षा अभी बाकी है।
