भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में बैंकों का गोल्ड लोन सालाना आधार पर 83 प्रतिशत बढ़कर 5.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी का गोल्ड लोन 69 प्रतिशत बढ़कर 3.6 लाख करोड़ रुपये हो गया। इन आंकड़ों से साफ है कि सोने के बदले कर्ज लेने का चलन तेजी से बढ़ा है। सोना गिरवी होने के कारण वित्तीय संस्थानों को कर्ज के बदले सुरक्षा मिलती है लेकिन ग्राहकों के समय पर भुगतान नहीं करने की स्थिति में जोखिम बढ़ सकता है।
बजाज फाइनेंस ने जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के नतीजों में बताया कि 30 दिनों से अधिक समय से बकाया कर्ज से जुड़ी उसकी स्टेज दो और स्टेज तीन परिसंपत्तियों में पिछली तिमाही के मुकाबले 15 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी के अनुसार इसके पीछे कम अवधि वाले गोल्ड लोन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी वजह से बजाज फाइनेंस ने अब ऐसे शॉर्ट टर्म गोल्ड लोन देना बंद कर दिया है। कंपनी का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो करीब 24 हजार करोड़ रुपये का है। हालांकि सितंबर तिमाही में कंपनी का समेकित मुनाफा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 30 प्रतिशत बढ़ा है लेकिन कर्ज की गुणवत्ता पर निगरानी जारी है।
दूसरी ओर पीरामल फाइनेंस ने भी गोल्ड लोन बाजार में बढ़ते जोखिम को लेकर चिंता जताई है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जयराम श्रीधरन ने विश्लेषकों के साथ बातचीत में कहा कि गोल्ड लोन में तेजी से बढ़ोतरी इस क्षेत्र को जोखिम के लिहाज से महत्वपूर्ण बना रही है। उनके मुताबिक कंपनी के करीब 35 प्रतिशत ग्राहकों के पास किसी दूसरी वित्तीय संस्था से भी गोल्ड लोन है। ऐसे मामलों में ग्राहकों की कुल कर्ज देनदारी और भुगतान क्षमता को समझना जरूरी हो जाता है।
पीरामल फाइनेंस के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में उद्योग स्तर पर करीब 4.7 लाख करोड़ रुपये के गोल्ड लोन ऐसे ग्राहकों को दिए गए जिनके दूसरे कर्ज 90 दिनों से अधिक समय से बकाया थे। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के पास गोल्ड लोन होना अपने आप में उसे जोखिम वाला कर्जदार साबित नहीं करता। इसके बावजूद कई संस्थानों से कर्ज लेने वाले ग्राहकों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। पीरामल फाइनेंस ने सितंबर तिमाही में 545 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया जो पिछले साल की समान अवधि से 66 प्रतिशत अधिक है।
गोल्ड लोन बाजार में बढ़ती गतिविधियों के बीच बजाज फाइनेंस के लिए महंगाई में बढ़ोतरी और नियामकीय बदलाव जैसे दूसरे जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में ग्राहकों को कर्ज लेने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति और भुगतान क्षमता का आकलन करना चाहिए। समय पर किस्त या ब्याज नहीं चुकाने की स्थिति में गिरवी रखा सोना भी खतरे में पड़ सकता है। वहीं वित्तीय संस्थानों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे कर्ज देने से पहले ग्राहकों की मौजूदा देनदारियों और भुगतान के रिकॉर्ड का बेहतर आकलन करें।
