स्वीटी अख्तर मध्य बांग्लादेश के तंगाइल जिले के मिर्जापुर उपजिला के नगर छावली गांव की रहने वाली थी। उसके पिता फजल मिया दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और मां का नाम जोहोरा बेगम है। पांच बहनों में सबसे छोटी स्वीटी की जिंदगी बचपन से ही मुश्किलों से घिरी रही। जब वह आठवीं कक्षा में पढ़ रही थी तभी उसकी शादी कर दी गई थी। पहली शादी टूटने के बाद वह अपनी बेटी को लेकर मायके लौट आई। परिवार के दबाव में उसने दूसरी शादी की लेकिन दूसरा पति भी उसे छोड़कर चला गया। लगातार टूटते रिश्तों और आर्थिक परेशानियों ने उसे विदेश में नौकरी तलाशने के लिए मजबूर कर दिया।
परिवार ने स्वीटी को सऊदी अरब भेजने के लिए करीब डेढ़ लाख टका का कर्ज लिया था। मार्च 2023 में वह एक पंजीकृत भर्ती एजेंसी के माध्यम से सऊदी अरब पहुंची और मक्का की ग्रैंड मस्जिद में सफाईकर्मी के तौर पर काम करने लगी। शुरुआती पांच से छह महीनों तक वह घर पैसे भेजती रही। इससे परिवार को उम्मीद जगी कि अब उनकी परेशानियां कम होंगी और बेटी का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा। लेकिन कुछ समय बाद पैसे आने बंद हो गए। परिवार को बाद में पता चला कि स्वीटी को जेल में बंद कर दिया गया है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक स्वीटी को 2 अगस्त 2023 को व्यभिचार के आरोपों में हिरासत में लिया गया था। उसके साथ काम करने वाले बांग्लादेशी नागरिक नाजरुल इस्लाम अब्दुल बासिर को भी गिरफ्तार किया गया था। स्वीटी को जेद्दा की महिला जेल में रखा गया। हालांकि उसने अपने पिता को गिरफ्तारी की अलग वजह बताई थी। उसके परिवार को आशंका थी कि उसे गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है। इन आरोपों और मामले की परिस्थितियों को लेकर परिवार के पास पूरी जानकारी नहीं थी।
जेल में रहने के दौरान स्वीटी कभी हर सप्ताह तो कभी एक महीने के अंतराल पर अपने घर फोन करती थी। परिवार को मालूम था कि वह जेल में है लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि मामला इतना गंभीर हो चुका है। उसके पिता के मुताबिक 13 अक्टूबर को मगरिब की नमाज के बाद उनकी बेटी से आखिरी बार बात हुई थी। बातचीत के दौरान स्वीटी ने न तो मुकदमे का जिक्र किया और न ही मौत की सजा की आशंका जताई। परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द जेल से बाहर आ जाएगी।
14 अक्टूबर को सऊदी अरब में स्वीटी अख्तर और नाजरुल इस्लाम को फांसी दिए जाने की घोषणा हुई। परिवार को इसकी जानकारी सीधे अधिकारियों से नहीं मिली बल्कि एक फेसबुक वीडियो के जरिए मौत की खबर सामने आई। बांग्लादेश के राजनयिक मिशन ने भी कहा था कि उसे फांसी से पहले इसकी सूचना नहीं दी गई। बाद में बांग्लादेश ने न्यायिक फैसलों की प्रतियां और मामले से जुड़ी जानकारी मांगी।
स्वीटी की मां अपनी बेटी का शव बांग्लादेश वापस लाने की गुहार लगा रही हैं ताकि वह आखिरी बार उसका चेहरा देख सकें। जिस परिवार ने कर्ज लेकर उसे बेहतर जिंदगी की उम्मीद में विदेश भेजा था वह अब गहरे सदमे में है। पीछे छूट गई उसकी छोटी बेटी और परिवार के लिए यह घटना ऐसा दर्द बन गई है जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।
