वर्ष 1969 से 2022 तक के पूर्व विद्यार्थियों और वर्तमान छात्र-छात्राओं की रही सहभागिता, महाविद्यालय के विकास एवं उत्थान पर हुआ विचार-विमर्श

इंदौर। शासकीय संस्कृत महाविद्यालय, रामबाग, इंदौर में आज भूतपूर्व छात्र मिलन समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। इस समारोह में महाविद्यालय के विभिन्न वर्षों में अध्ययन कर चुके पूर्व विद्यार्थियों के साथ वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। समारोह में वर्ष 1969 से लेकर वर्ष 2022 तक के पूर्व विद्यार्थियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। वर्षों बाद पुराने सहपाठियों, गुरुजनों और महाविद्यालय से जुड़े साथियों के मिलन से परिसर में आत्मीयता, उत्साह और पुरानी स्मृतियों का वातावरण दिखाई दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण, मां सरस्वती के पूजन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत भाषा और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए अतिथियों ने आयोजन की शुरुआत की। इसके पश्चात महाविद्यालय के प्राध्यापकों द्वारा समारोह में पधारे भूतपूर्व विद्यार्थियों का पुष्प एवं दुपट्टा भेंट कर स्वागत और अभिनंदन किया गया। इस आत्मीय स्वागत ने पूर्व विद्यार्थियों और महाविद्यालय के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
मंदिरों के प्रमुख पुजारियों की विशेष उपस्थिति ने बढ़ाई समारोह की गरिमा
समारोह में धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े विशिष्ट व्यक्तियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। रणजीत हनुमान मंदिर, खजराना गणेश मंदिर और हरसिद्धि मंदिर से जुड़े मुख्य पुजारियों के साथ मुंबई से पधारे गणेश मंदिर के पुजारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इन विशिष्ट अतिथियों की सहभागिता ने समारोह को धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष गरिमा प्रदान की।कार्यक्रम में महाविद्यालय क्षेत्र के विधायक श्री गोलू शुक्ला की उपस्थिति भी रही। पूर्व विद्यार्थियों, शिक्षकों, अतिथियों और वर्तमान विद्यार्थियों की सामूहिक सहभागिता ने इस आयोजन को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं सामाजिक मिलन का स्वरूप प्रदान किया।
पुरानी यादें हुईं ताजा, महाविद्यालय के भविष्य को लेकर रखे विचार
समारोह का मुख्य उद्देश्य विभिन्न वर्षों में महाविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर चुके पूर्व विद्यार्थियों को एक मंच पर एकत्रित करना, उनके अनुभवों और उपलब्धियों को साझा करना तथा वर्तमान में महाविद्यालय के विकास एवं उत्थान के लिए सामूहिक प्रयासों की दिशा तय करना रहा।इस अवसर पर भूतपूर्व विद्यार्थियों ने अपने अध्ययनकाल की स्मृतियां साझा कीं और महाविद्यालय से जुड़े अपने अनुभवों को व्यक्त किया। वर्षों बाद एक-दूसरे से मिलकर पूर्व विद्यार्थियों ने पुराने दिनों को याद किया। गुरुजनों के प्रति सम्मान और महाविद्यालय से जुड़े आत्मीय संबंधों की झलक पूरे आयोजन में देखने को मिली।
कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व विद्यार्थियों ने महाविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा को और अधिक सशक्त बनाने, संस्कृत शिक्षा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने तथा संस्थान के सर्वांगीण विकास के लिए अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। इस बात पर विशेष जोर रहा कि भूतपूर्व विद्यार्थियों का अनुभव और मार्गदर्शन वर्तमान विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। पूर्व छात्रों के सहयोग, आपसी समन्वय और सक्रिय सहभागिता से महाविद्यालय की प्रतिष्ठा एवं विकास को नई दिशा देने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों के बीच संवाद की बनी संभावनाएं
इस प्रकार के आयोजन केवल पुराने साथियों के पुनर्मिलन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे शैक्षणिक संस्थान की परंपराओं, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करते हैं। समारोह के माध्यम से वरिष्ठ पूर्व विद्यार्थियों और वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों के बीच संवाद तथा अनुभवों के आदान-प्रदान का मार्ग प्रशस्त हुआ।पूर्व विद्यार्थियों की सहभागिता से वर्तमान पीढ़ी को महाविद्यालय की गौरवशाली शैक्षणिक परंपरा को समझने और उससे प्रेरणा लेने का अवसर मिला। वहीं, पूर्व छात्रों को भी अपने शिक्षण संस्थान से पुनः जुड़ने और उसके विकास में योगदान देने की संभावनाओं पर विचार करने का अवसर प्राप्त हुआ।
प्रतिवर्ष मिलन समारोह आयोजित करने पर दिया जोर
समारोह में शामिल पूर्व विद्यार्थियों एवं अन्य उपस्थितजनों ने इस प्रकार के मिलन समारोह को प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सभी की भावना रही कि भविष्य में अधिक से अधिक भूतपूर्व विद्यार्थी इस आयोजन से जुड़ें, जिससे महाविद्यालय के साथ उनका संपर्क निरंतर बना रहे और संस्थान के विकास के लिए सामूहिक प्रयासों को गति मिल सके।आयोजन को सफल बनाने में भूतपूर्व छात्र समिति के अध्यक्ष, सचिव, महाविद्यालय की प्राचार्या तथा अन्य सहयोगियों की विशेष भूमिका रही। सभी के समन्वित प्रयासों और सहभागिता से समारोह व्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।कार्यक्रम के अंत में सचिव एवं कोषाध्यक्ष द्वारा समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों, पूर्व विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और वर्तमान विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। साथ ही भविष्य में भी इसी प्रकार आपसी सद्भाव, सहयोग और आत्मीयता के साथ ऐसे आयोजन करते रहने की भावना व्यक्त की गई।शासकीय संस्कृत महाविद्यालय, रामबाग, इंदौर का यह भूतपूर्व छात्र मिलन समारोह पुराने संबंधों को पुनर्जीवित करने, गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान और महाविद्यालय के उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक सहभागिता का महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आया।
