गेहूं की सरकारी खरीद निर्धारित लक्ष्य से अधिक होने के बावजूद बाजार में कीमतों में मजबूती बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस बार सरकार ने 356 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा था, जिसे पार कर लिया गया। इसके बावजूद पिछले सप्ताह मंडियों में गेहूं की आवक कम होने से कीमतों को सहारा मिला। नमी और रंग के आधार पर गेहूं के भाव 3,110 से 3,135 रुपये प्रति क्विंटल के बीच पहुंच गए। हाल के दिनों में कीमतों में 30 से 35 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त बढ़ोतरी भी दर्ज की गई।
बाजार से जुड़े कारोबारियों के अनुसार, पिछले दो महीनों से गेहूं की मांग में तेजी बनी हुई है। इसके चलते कीमतों में लगभग 250 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ है। वहीं, निचले स्तरों की तुलना में भाव में कुल तेजी का अंतर 500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचने की बात कही जा रही है। पिछले एक महीने से किसानों की ओर से मंडियों में गेहूं की आवक का दबाव भी कम रहा है। इससे कारोबारियों को पर्याप्त मात्रा में माल जुटाने के लिए खरीद जारी रखनी पड़ रही है।
गेहूं की कीमतों को मजबूती देने में रोलर फ्लोर मिलों की मांग की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। ये मिलें गेहूं से आटा, मैदा और सूजी तैयार करती हैं। त्योहारों के दौरान इन उत्पादों की खपत बढ़ने की संभावना को देखते हुए मिलों की खरीद प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही मैदा और सूजी के व्यापार में बढ़ती गतिविधियों से भी गेहूं की मांग को समर्थन मिल रहा है। यदि कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रहती है, तो इसका असर प्रसंस्करण से जुड़े कारोबार पर पड़ सकता है।
दक्षिण भारत की ओर गेहूं की खेप भेजे जाने से भी बाजार में मांग बनी हुई है। माल की ढुलाई के लिए रेल रैक उपलब्ध होने से दूसरे क्षेत्रों तक आपूर्ति करने में मदद मिल रही है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में भी गेहूं के भाव में दोबारा तेजी आने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा निर्यात मांग को भी कीमतों को सहारा देने वाले कारकों में शामिल किया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग मंडियों में गेहूं की गुणवत्ता, उपलब्धता और परिवहन लागत के आधार पर भाव में अंतर हो सकता है।
अब बाजार की नजर सरकारी गेहूं की बिक्री पर टिकी हुई है। कारोबारियों का मानना है कि यदि सरकार बाजार में पर्याप्त मात्रा में गेहूं उपलब्ध कराती है, तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। दूसरी ओर, सरकारी आपूर्ति सीमित रहने और मंडियों में आवक कम बनी रहने की स्थिति में भाव मजबूत रह सकते हैं। आगे कीमतों की दिशा काफी हद तक इन दोनों कारकों पर निर्भर करेगी।
आम उपभोक्ताओं के लिए गेहूं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बन सकती है। आटा, मैदा और सूजी रोजमर्रा के भोजन के साथ त्योहारों पर तैयार होने वाले कई पकवानों में इस्तेमाल होते हैं। मांग बढ़ने पर इन उत्पादों की खुदरा कीमतों में बदलाव की आशंका रहती है, हालांकि गेहूं के थोक भाव में हुई तेजी का असर उपभोक्ताओं तक कितना पहुंचेगा, यह भी प्रसंस्करण लागत, व्यापारियों के मार्जिन और स्थानीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
