लोकायुक्त ने इस मामले में मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी और तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचूरा तथा हरियाणा के झज्जर निवासी शराब ठेकेदार जसवंत सिंह को आरोपी बनाया है। मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 में भोपाल के पीएंडटी चौराहा कंपोजिट शराब दुकान समूह के ठेके से जुड़ा है। आरोप है कि ठेका हासिल करने के लिए कथित फर्जी एफडीआर के साथ उसकी सत्यापन रिपोर्ट भी सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में प्रस्तुत की गई। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि दस्तावेज कहां तैयार हुए और सत्यापन की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कैसे हुई।
इस मामले में दीपम रायचूरा की भूमिका भी जांच के दायरे में है। विभागीय जांच के बाद उन्हें 12 अक्टूबर को निलंबित किया गया था। इससे पहले उन्हें उप मुख्यमंत्री के ओएसडी के अतिरिक्त प्रभार से भी मुक्त कर दिया गया था। अब लोकायुक्त की ओर से एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला विभागीय कार्रवाई से आगे बढ़कर आपराधिक जांच के दायरे में आ गया है। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों के फैसलों और दस्तावेजों को मंजूरी देने की प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी।
लोकायुक्त जांच में सबसे अहम सवाल एफडीआर के सत्यापन से जुड़ा है। एजेंसी यह पता लगाएगी कि कथित एफडीआर किसने तैयार कराई और बैंक के नाम पर सत्यापन रिपोर्ट किसने बनाई। इसके साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि दस्तावेजों की जांच करने वाले अधिकारियों ने उन्हें स्वीकार करने से पहले आवश्यक पुष्टि की थी या नहीं। यदि बैंक ने वास्तव में एफडीआर जारी नहीं की थी तो उसके बावजूद उसे वैध प्रतिभूति मानने का आधार क्या था यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
जांच एजेंसी ठेका आवंटन और लाइसेंस हस्तांतरण की प्रक्रिया की भी पड़ताल कर सकती है। इसमें यह देखा जाएगा कि निर्धारित नियमों का पालन किया गया या नहीं और दस्तावेजों की पुष्टि के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी भूमिका किस तरह निभाई। लोकायुक्त संगठन के अनुसार जांच केवल नामजद आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि संबंधित सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका भी जांची जाएगी।
इस मामले में कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर उन्हें जमा कराने और स्वीकार किए जाने तक की पूरी कड़ी स्पष्ट करना जांच एजेंसी के सामने चुनौती होगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि ठेका आवंटन की प्रक्रिया में किसी स्तर पर जानबूझकर अनियमितता की गई थी या दस्तावेजों की जांच में लापरवाही हुई। जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदार लोगों की भूमिका और आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल एफआईआर दर्ज होने के बाद भोपाल के शराब ठेका आवंटन से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक और आबकारी विभाग के स्तर पर चर्चा में है।
