इन झुमकों को ‘मयूर सहस्र’ नाम दिया गया है। इस नाम का अर्थ ‘एक हजार मोर’ बताया गया है। इनका डिजाइन मोर से प्रेरित है, जिसे भारतीय संस्कृति में सुंदरता और शालीनता का प्रतीक माना जाता है। आभूषणों की बनावट में दक्षिण एशिया की शादियों में पहने जाने वाले पारंपरिक घंटीनुमा झुमकों की झलक भी दिखाई देती है। इस तरह डिजाइन में सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिक आभूषण निर्माण का मेल देखने को मिलता है।
इन विशाल झुमकों को बनाने में 55 कुशल कारीगरों ने कुल 5,840 घंटे काम किया। इनकी लंबाई 1.215 मीटर और व्यास 0.682 मीटर है। वजन, आकार और निर्माण में लगे समय के कारण यह परियोजना कंपनी के लिए एक बड़ी उपलब्धि बन गई है। इतने बड़े आभूषण को तैयार करने के लिए डिजाइन से लेकर अंतिम रूप देने तक कारीगरों को लंबे समय तक काम करना पड़ा।
24 अक्टूबर को इन झुमकों को दुबई के गोल्ड डिस्ट्रिक्ट स्थित ज्वेल ऑफ जॉय शोरूम में प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री भी मौजूद थे। अब इन रिकॉर्डधारी झुमकों को इसी क्षेत्र में स्थित ज्वेल ऑफ जॉय बाय जॉयअलुक्कास शोरूम में स्थायी रूप से प्रदर्शित किया गया है। यहां आने वाले लोग इस विशाल स्वर्ण आभूषण को देख सकते हैं।
जॉयअलुक्कास ज्वेलरी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जॉन पॉल अलुक्कास के अनुसार, इस रचना के पीछे दुबई के साथ कंपनी का लंबा जुड़ाव और शहर के विकास से जुड़ी प्रेरणा रही है। दुबई को लंबे समय से सोने के कारोबार के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। कंपनी का मानना है कि यह रचना शहर की इसी पहचान को दर्शाती है और उसके साथ उसके व्यावसायिक संबंधों का प्रतीक है।
समूह के चेयरमैन जॉय अलुक्कास ने इस उपलब्धि को दुबई और इसे बनाने वाले कारीगरों के प्रति सम्मान बताया। उनके मुताबिक, कंपनी करीब चार दशकों से दुबई के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस परियोजना को कारीगरों की मेहनत का परिणाम बताते हुए कहा कि एक ही रचना के लिए दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिलना कंपनी, कर्मचारियों और उसके ग्राहकों के लिए गर्व का विषय है।
जॉय अलुक्कास केरल के कारोबारी हैं और जॉयअलुक्कास समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक हैं। कंपनी की शुरुआत 1987 में हुई थी। इसका कारोबार भारत सहित ब्रिटेन, अमेरिका, सिंगापुर, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन और ओमान जैसे देशों तक फैला है। परिवार ने केरल के त्रिशूर से आभूषण कारोबार शुरू किया था। बाद में जॉय अलुक्कास ने 2001 में अपने नाम से ज्वेलरी कारोबार को आगे बढ़ाया। दुबई में तैयार किए गए ये विशाल झुमके अब कंपनी की अंतरराष्ट्रीय पहचान और पारंपरिक आभूषण निर्माण कौशल की एक खास मिसाल बन गए हैं।
