काशी में आयोजित इस एयर शो को बड़े स्तर पर आयोजित किया गया। इसमें भारतीय वायुसेना के कई प्रमुख लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरकर अपनी क्षमता दिखाई। राफेल, सुखोई, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे विमानों ने हवाई प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इनके अलावा अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टरों ने भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। सी-295, सी-17 और सी-130 जैसे परिवहन विमानों की मौजूदगी भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही।
इस आयोजन में देश के 12 एयरबेस से विमान वाराणसी पहुंचे। इनमें चेन्नई और ग्वालियर के एयरबेस भी शामिल थे। काशी में पहली बार इतने बड़े स्तर पर एयर शो आयोजित किया गया। विभिन्न विमानों की उड़ानों और सामूहिक फॉर्मेशन के जरिए वायुसेना की परिचालन क्षमता और हवाई प्रदर्शन का परिचय दिया गया।
एयर शो में विमानों की उड़ान के साथ वाराणसी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी प्रदर्शित किया गया। आसमान में विमानों ने अलग-अलग समूह बनाकर कई आकृतियां तैयार कीं। इन फॉर्मेशन को महादेव, नटराज, कैलाश, विश्वनाथ, त्रिदेव, वरुणा, हनुमान, ओंकार, भागीरथी, काशी और रुद्र जैसे नाम दिए गए। इन नामों के माध्यम से काशी की परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को हवाई प्रदर्शन से जोड़ने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। पूरे जिले को 30 जोन और 50 से अधिक सेक्टर में बांटा गया। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए 11,500 से ज्यादा जवान तैनात किए गए। इसके साथ ही निगरानी के लिए 200 सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल किया गया।
प्रशासन ने करीब 50 लाख लोगों की भीड़ को संभालने के मद्देनजर इंतजाम किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी पहुंचने और रोड शो के कार्यक्रम को देखते हुए भी सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। शहर में विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती और निगरानी के जरिए आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी की गई।
विंग्स ओवर गंगा एयर शो में लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और परिवहन विमानों की भागीदारी के साथ काशी की सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता दी गई। 12 एयरबेस से आए 100 विमानों की मौजूदगी ने इस आयोजन को बड़े स्तर का हवाई प्रदर्शन बनाया।
