150 से अधिक संतों, विद्वानों और शोधार्थियों की सहभागिता, वेदांगों के शास्त्रीय महत्व पर हुआ विचार-विमर्श
इंदौर। आज 26 अक्टूबर 2026, सोमवार को इंदौर प्रेस क्लब सभागार में ‘द्वितीय वेदांग वार्ता महोत्सव’ का आयोजन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। प्रातः 11 बजे से सायं 5 बजे तक आयोजित इस महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 150 से अधिक मूर्धन्य विद्वानों, संतों, आचार्यों और शोधार्थियों ने सहभागिता करते हुए वेदांगों के महत्व, ज्योतिष शास्त्र के विविध आयामों तथा पंचांग और तिथियों को लेकर प्रचलित मत-भिन्नताओं पर गहन विचार-विमर्श किया। महोत्सव में शास्त्रीय परंपराओं के संरक्षण, प्राचीन ज्ञान के अध्ययन और धार्मिक विषयों में उत्पन्न होने वाली जिज्ञासाओं के समाधान पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व राज्य मंत्री योगेंद्र महंत तथा उपस्थित पूज्य संतों और विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। वैदिक ज्ञान, भारतीय शास्त्रीय परंपरा और आध्यात्मिक चिंतन को समर्पित इस आयोजन में विभिन्न विषयों पर विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्वत् विमर्श, शास्त्रीय तर्क और परंपरागत ज्ञान के आदान-प्रदान का वातावरण बना रहा।
वेदांगों के अध्ययन और शास्त्रीय परंपरा पर केंद्रित रहे सत्र

महोत्सव का प्रारंभ प्रातःकालीन ‘पंचम वेदांगम’ सत्र से हुआ। इसके बाद ‘वेदांगामृतम’ और ‘ज्योतिर्वेदांगामृतम’ सहित विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया। इन सत्रों में ज्योतिष शास्त्र के साथ-साथ वेदांगों के अन्य महत्वपूर्ण पक्षों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।विमर्श के दौरान छंद, कल्प, निरुक्त और व्याकरण जैसे वेदांगों की उपयोगिता तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके स्थान को रेखांकित किया गया। विद्वानों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वेदों के सही अर्थ, उच्चारण, व्याख्या और अनुष्ठान संबंधी विधियों को समझने में वेदांगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। शास्त्रों का अध्ययन केवल परंपरागत जानकारी तक सीमित न रहकर उनके मूल सिद्धांतों और प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए।
महोत्सव का एक प्रमुख विषय पंचांग और तिथियों को लेकर सामने आने वाली मत-भिन्नता रहा। इस विषय पर शास्त्रीय आधारों के अनुरूप समाधान तलाशने के लिए विद्वानों ने अपने विचार रखे। धार्मिक पर्वों, व्रतों और विभिन्न आयोजनों की तिथियों के निर्धारण में उत्पन्न होने वाली असहमति के संदर्भ में ज्योतिषीय गणना, शास्त्रीय मान्यताओं और संबंधित प्रमाणों के महत्व पर चर्चा की गई। आयोजन का उद्देश्य विभिन्न मतों को समझते हुए शास्त्रसम्मत दृष्टिकोण से विषयों का विवेचन करना रहा।
संतों के सान्निध्य में आध्यात्मिक वातावरण

वेदांग वार्ता महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे संतों की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। बनारस से पधारे श्री श्री 1008 भगवान जी वेदांताचार्य, इंदौर के प्रेमानंद महाराज तथा श्री श्री 1008 रामगोपाल दास महाराज ने कार्यक्रम में सहभागिता की और उपस्थितजनों को अपना शुभाशीष प्रदान किया।
संतों के सान्निध्य ने आयोजन को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर भारतीय सनातन परंपरा, शास्त्रों के अध्ययन और आध्यात्मिक मूल्यों के महत्व को रेखांकित किया गया। संतों और विद्वानों की सहभागिता से महोत्सव में ज्ञान, साधना और शास्त्रीय विमर्श का समन्वित स्वरूप देखने को मिला।
देशभर के विद्वानों ने रखे अपने विचार
महोत्सव के विभिन्न सत्रों में महामहोपाध्याय एवं पूर्व कुलपति प्रो. मिथिला प्रसाद त्रिपाठी, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र, वरिष्ठ विद्वान पं. तुलसीदास परोहा और पं. उपेंद्र भार्गव सहित अनेक विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।इसके अतिरिक्त इंदौर के आचार्य गोपाल वैरागी, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विनायक पांडे, पं. रामचरण शर्मा ‘वैदिक’, संतोष भार्गव, आचार्य पं. नारायण वैष्णव, पं. दिनेश गुरु तथा भोपाल से पधारे पं. कृपाराम उपाध्याय ने भी विमर्श में सहभागिता की।
अमृतसर से पं. अनु भुटानी और झारखंड से पधारीं पं. अनुराधा शास्त्री सहित अन्य विद्वानों और शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। अलग-अलग क्षेत्रों से आए विद्वानों की सहभागिता ने आयोजन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया। सत्रों के माध्यम से शास्त्रीय विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ और वेदांगों के अध्ययन को अधिक व्यापक दृष्टि से समझने का अवसर मिला।
विद्वानों और अतिथियों का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न से सम्मान
समारोह के दौरान बाहर से पधारे विद्वानों, शोधार्थियों और अतिथियों का आत्मीय स्वागत-सत्कार किया गया। सम्मान समारोह में अतिथियों को शॉल, श्रीफल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वानों की सहभागिता को महोत्सव की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।कार्यक्रम की अध्यक्षता सुनील भार्गव ने की। आयोजन की व्यवस्थाओं और समन्वय में कार्यक्रम प्रभारी पं. राकेश पांडे, सचिव अवधेश व्यास, महिला सचिव अष्टांगिनी वानखेड़े, आयोजक गिरीश व्यास तथा वास्तुविद गौरव गुप्ता की प्रमुख भूमिका रही।
आचार्य गोपाल वैरागी और सुश्री पूजा आर्या ने किया संचालन
महोत्सव का कुशल एवं प्रभावी संचालन इंदौर के आचार्य गोपाल वैरागी तथा रीवा से पधारीं सुश्री पूजा आर्या ने किया। दोनों ने विभिन्न सत्रों और कार्यक्रम की गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. गिरीश व्यास ने उपस्थित संतों, विद्वानों, शोधार्थियों, अतिथियों और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।इस प्रकार इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित द्वितीय वेदांग वार्ता महोत्सव का सफलतापूर्वक समापन हुआ। महोत्सव ने वेदांगों के अध्ययन, भारतीय शास्त्रीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और पंचांग एवं तिथि संबंधी विषयों पर शास्त्रसम्मत संवाद को एक साझा मंच प्रदान किया। आयोजन में देशभर से विद्वानों की सहभागिता ने इस बात को रेखांकित किया कि प्राचीन ज्ञान परंपराओं को समझने, उनके सिद्धांतों पर चर्चा करने और समकालीन जिज्ञासाओं के समाधान के लिए ऐसे विद्वत् आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
