2020 में हुई थी मनीष शुक्ला की हत्या
भाजपा नेता मनीष शुक्ला की 4 अक्टूबर 2020 को टीटागढ़ में भाजपा कार्यालय के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच सीआईडी ने की थी और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। अब कौस्तुव बागची ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेताओं उत्तम दास और प्रशांत चौधरी के साथ अर्जुन सिंह की मौजूदगी पर आपत्ति जताई है।
बागची का दावा है कि मनीष शुक्ला के पिता ने हत्या के मामले में इन दोनों के नाम आरोपियों के तौर पर लिए थे। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों के साथ पार्टी नेताओं की तस्वीरें सामने आने से उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र में लोगों के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम मामले में आने और अदालत में दोष सिद्ध होने के बीच अंतर है।
अर्जुन सिंह से निजी नाराजगी नहीं, लेकिन साथ मंच साझा करने पर आपत्ति
कौस्तुव बागची ने कहा कि अर्जुन सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उनसे उनकी कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है। उनकी आपत्ति उन लोगों के साथ मंच साझा करने को लेकर है, जिनके नाम मनीष शुक्ला हत्याकांड में सामने आने का दावा किया जा रहा है।
बागची ने कहा कि वह इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, मुख्य सचिव, सीआईडी के महानिदेशक और बैरकपुर पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखने की बात कही है।
BJP में शामिल करने का भी कर रहे विरोध
बागची ने उत्तम दास और प्रशांत चौधरी को भाजपा में शामिल किए जाने का भी विरोध किया। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर वह भाजपा के प्रदेश मुख्यालय के सामने खुद को आग लगा लेंगे। इससे पहले भी उन्होंने इस मुद्दे पर सिर मुंडवाकर विरोध जताने की बात कही थी।
उनके बयान से पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। हालांकि, दोनों व्यक्तियों की भाजपा में औपचारिक सदस्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया जरूरी होगी।
अर्जुन सिंह और उत्तम दास ने क्या कहा?
अर्जुन सिंह ने बागची के आरोपों को ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि राजनीति कैसे करनी है।” वहीं, उत्तम दास ने मंत्री के साथ अपनी मौजूदगी को निजी संबंधों से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि वह काफी समय पहले तृणमूल कांग्रेस से अलग हो चुके हैं और उन्होंने भाजपा में शामिल होने की इच्छा नहीं जताई है।
TMC ने भी BJP पर साधा निशाना
इस विवाद पर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने भी भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सार्वजनिक रूप से तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को पार्टी में शामिल नहीं करने की बात करती है, लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं करती।
इस तरह मनीष शुक्ला हत्याकांड को लेकर भाजपा के भीतर उठे सवालों ने बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब इस मामले में संबंधित नेताओं की आगे की प्रतिक्रिया और बागची की प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।
