प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में विजय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की क्षेत्रीय पीठ स्थापित करने की मांग वर्ष 1980 से उठती रही है। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को उच्चतम न्यायालय तक पहुंचने का अधिकार देता है। यह अधिकार व्यक्ति की आर्थिक स्थिति या उसके निवास स्थान पर निर्भर नहीं होना चाहिए। हालांकि, व्यावहारिक रूप से दिल्ली से दूर रहने वाले लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचना अधिक कठिन हो जाता है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर पक्षकारों को यात्रा, ठहरने और अन्य खर्चों का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने इसी भौगोलिक और आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए चेन्नई में स्थायी पीठ की जरूरत बताई है।
विजय के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की एक स्थायी पीठ चेन्नई में स्थापित होने से दक्षिण भारत के नागरिकों को न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचने में सुविधा होगी। अभी दक्षिणी राज्यों के लोगों को उच्चतम न्यायालय में अपने मामलों की सुनवाई के लिए नई दिल्ली जाना पड़ता है। लंबी दूरी के कारण समय और धन दोनों खर्च होते हैं। मुख्यमंत्री का तर्क है कि क्षेत्रीय पीठ से इस परेशानी को कम किया जा सकता है और न्याय व्यवस्था को आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाया जा सकता है।
चेन्नई को इस पीठ के लिए उपयुक्त स्थान बताते हुए मुख्यमंत्री ने मद्रास हाई कोर्ट की ऐतिहासिक और कानूनी विरासत का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि मद्रास हाई कोर्ट देश के सबसे पुराने उच्च न्यायालयों में शामिल है और इसकी स्थापना वर्ष 1862 में हुई थी। इस संस्थान की लंबी न्यायिक परंपरा के साथ यहां उपलब्ध कानूनी विशेषज्ञता भी चेन्नई के पक्ष में महत्वपूर्ण आधार है। विजय ने मद्रास हाई कोर्ट बार की पेशेवर क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि चेन्नई दक्षिण भारत के राज्यों को न्यायिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिहाज से रणनीतिक रूप से उपयुक्त स्थान है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में इस प्रस्ताव को लेकर पहले उठे विरोध और कानूनी पहलुओं का भी जिक्र किया है। उन्होंने वर्ष 2007 में न्यायाधीशों की पूर्ण अदालत यानी फुल कोर्ट में इस मुद्दे पर हुई चर्चा का संदर्भ दिया। विजय के मुताबिक, उस समय भी इस प्रस्ताव का विरोध करने के लिए कोई ठोस आधार सामने नहीं आया था। उन्होंने इस पुराने घटनाक्रम को बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय पीठ की स्थापना पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।
विजय ने वर्ष 2016 के एक मामले का भी उल्लेख किया। यह मामला ‘वी. वसंतकुमार बनाम एच. सी. भाटिया व अन्य’ के नाम से दायर रिट याचिका से जुड़ा था। इसमें सुप्रीम कोर्ट की क्षेत्रीय पीठों की स्थापना से संबंधित कानूनी सवाल भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेजे गए थे। मुख्यमंत्री ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख पर फिर से विचार करने की जरूरत बताई और क्षेत्रीय पीठ के समर्थन में पहले दी गई सिफारिशों का हवाला दिया।
चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की स्थायी पीठ स्थापित करने के प्रस्ताव पर संभावित प्रशासनिक और संस्थागत चिंताओं का जवाब देते हुए विजय ने कहा कि इससे उच्च न्यायालयों की न्यायिक स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होगी। उनके मुताबिक, नई क्षेत्रीय पीठ का प्रशासनिक नियंत्रण भी भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास ही रहेगा। इस व्यवस्था से न्यायिक संस्थानों की स्वतंत्रता और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर किसी तरह का टकराव नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार इस मांग को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे, ताकि प्रस्ताव पर आगे विचार किया जा सके। अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और उच्चतम न्यायालय के स्तर पर होने वाली पहल महत्वपूर्ण होगी।
