मृतक तुकाराम भिलाला बुधनी के भीमकोठी गांव के निवासी थे। वह वन विभाग में कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे और रातापानी क्षेत्र के बरखेड़ा में अपनी सेवाएं दे रहे थे। बुधवार को उनका शव नेशनल हाईवे-46 पर डिवाइडर के पास संदिग्ध हालत में बरामद हुआ। घटनास्थल पर शव मिलने की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई।
सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। फिलहाल पुलिस मौत के कारणों का पता लगाने में जुटी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, शव हाईवे के बीच बने डिवाइडर के पास मिला था। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि तुकाराम की मौत किस परिस्थिति में हुई और वह वहां तक कैसे पहुंचे।
इस मामले में मृतक के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों ने जांच को महत्वपूर्ण बना दिया है। परिजनों का कहना है कि तुकाराम को घटना से पहले आखिरी बार एक वनरक्षक के साथ देखा गया था। इसी आधार पर परिवार ने वनरक्षक की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि तुकाराम की हत्या करने के बाद शव को नेशनल हाईवे पर डिवाइडर के पास फेंका गया, ताकि घटना को सड़क दुर्घटना का रूप दिया जा सके।
परिजनों ने इस आशंका के आधार पर मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि मौत की परिस्थितियों और घटना से पहले तुकाराम के साथ मौजूद लोगों की जानकारी सामने आनी चाहिए। हालांकि, वनरक्षक पर लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
घटना के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि तुकाराम भिलाला की मौत दुर्घटना में हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह है। शव हाईवे के डिवाइडर पर किस परिस्थिति में पहुंचा, घटना से पहले मृतक कहां थे और आखिरी बार उनके साथ कौन मौजूद था, इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले को अलग-अलग संभावित पहलुओं से देख रही है।
मामले में मौत की वास्तविक वजह सामने आने के लिए पुलिस की जांच और जरूरी साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल न तो हत्या की पुष्टि हुई है और न ही इसे सड़क दुर्घटना घोषित किया गया है। ऐसे में पोस्टमार्टम और अन्य जांच संबंधी निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। मृतक के परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है और अब सभी की नजर पुलिस की कार्रवाई पर है।
