शुक्रवार सुबह के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में मिला-जुला रुख देखने को मिला। सुबह करीब 10 बजकर 33 मिनट पर सेंसेक्स 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ 79 हजार 917.60 अंक पर पहुंच गया जबकि निफ्टी 50 में 0.51 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 24 हजार 662.80 अंक पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले गुरुवार को बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 2008.61 अंक यानी 2.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 79 हजार 310.01 अंक पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 576 अंक यानी 2.40 प्रतिशत चढ़कर 24 हजार 536.60 अंक पर पहुंच गया था।
भारतीय बाजार में तेजी के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी को महत्वपूर्ण वजह माना जा रहा है। गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 15 हजार करोड़ रुपये की खरीदारी की। यह लगभग छह साल में एक दिन की सबसे बड़ी खरीदारी बताई जा रही है। विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार में भरोसा बढ़ा है और आने वाले कारोबारी सत्रों को लेकर सकारात्मक उम्मीदें मजबूत हुई हैं।
दूसरी तरफ अमेरिकी और एशियाई बाजारों में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। अमेरिका में तकनीकी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। नैस्डैक में करीब 5.5 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि डाउ जोंस और एसएंडपी 500 भी बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई भी दबाव में रहे। इसके बावजूद भारतीय बाजार पर इसका असर अपेक्षाकृत सीमित दिखाई दिया।
सेक्टर के लिहाज से देखें तो शुक्रवार को IT शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। TCS और इंफोसिस जैसे बड़े शेयरों में तेजी रही। इसके अलावा निजी बैंकिंग और फार्मा शेयरों ने भी बाजार को सहारा दिया। दूसरी ओर मेटल और रियल्टी सहित कुछ सेक्टरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हिंदाल्को और कुछ अन्य शेयरों में गिरावट ने निवेशकों का ध्यान खींचा।
कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे रहने से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई और आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को केवल एक दिन की तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचना चाहिए। किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी के नतीजे और कारोबार की स्थिति का आकलन करना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों पर नजर रखना बेहतर रणनीति हो सकती है। बाजार में निवेश हमेशा जोखिम के अधीन होता है इसलिए अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार ही फैसला लेना चाहिए।
