श्योपुर,26 march/ जिले में साल 2021 की भीषण बाढ़ के बाद पीड़ितों के लिए आई राहत राशि में हुए चर्चित घोटाले में आखिरकार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को गिरफ्तार कर लिया है। गुरुवार को पुलिस ने उन्हें ग्वालियर स्थित उनके निवास से हिरासत में लिया। मामला बड़ौदा तहसील में करीब ढाई करोड़ रुपये के बाढ़ राहत घोटाले से जुड़ा है, जिसमें फर्जी नामों पर भुगतान कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया था।
फर्जी नामों पर निकाली गई राहत राशि
जांच में सामने आया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए स्वीकृत राहत राशि का वितरण करते समय बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं।
- कई अपात्र व्यक्तियों के नाम जोड़े गए
- काल्पनिक लाभार्थियों की सूची तैयार की गई
- वास्तविक पीड़ितों को राहत नहीं मिल सकी
- दस्तावेजों में हेरफेर कर भुगतान स्वीकृत किए गए
ऑडिट जांच में खुलासा हुआ कि योजनाबद्ध तरीके से फर्जी भुगतान कर लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये की राशि निकाल ली गई। इस मामले में अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई गई है।
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
बड़ौदा थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 439/23 के तहत पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराएं लगाई हैं, जिनमें
- धारा 420 (धोखाधड़ी)
- धारा 467 (जालसाजी)
- धारा 468 (फर्जी दस्तावेज)
- धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग)
- धारा 120-बी (षड्यंत्र)
के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
विवेचना के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की।
विजयपुर से हटते ही गिरफ्तारी
जानकारी के अनुसार अमिता सिंह तोमर को एक दिन पहले ही विजयपुर तहसीलदार पद से हटाया गया था। पद से हटाए जाने के तुरंत बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए ग्वालियर स्थित निवास से उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब उन्हें श्योपुर लाकर न्यायालय में पेश करेगी।
जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज
इस मामले में आरोपी की जमानत याचिका पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज हो चुकी है। इसके बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई तेज हुई और पुलिस ने गुरुवार को उन्हें हिरासत में ले लिया।
जांच की आंच और लोगों तक पहुंचेगी
पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार अग्रवाल ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए संकेत दिए हैं कि इस घोटाले में अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। दस्तावेजों की जांच जारी है और संबंधित बैंक खातों तथा भुगतान रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।जांच एजेंसियों का मानना है कि यह घोटाला सुनियोजित तरीके से किया गया और इसमें कई स्तरों पर मिलीभगत संभव है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
