ग्राम कुंवरपुर खेजरा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का विशाल मेगा शिविर, कानून जागरूकता के साथ स्वास्थ्य, पर्यावरण और नारी सम्मान का दिया संदेश
(डॉ एल एन वैष्णव)

दमोह, 28 मार्च। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आमजन को सुलभ न्याय उपलब्ध कराने तथा उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दमोह द्वारा ग्राम कुंवरपुर खेजरा में एक विशाल मेगा विधिक सेवा एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रधान न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष सुभाष सोलंकी के मार्गदर्शन एवं मुख्य उपस्थिति में सम्पन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं एवं युवाओं ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ शिविर स्थल के समीप स्थित प्राचीन मंदिर में मां भगवती की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। प्रधान न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने विधिवत पूजन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर सरपंच प्रतिनिधि विकास गुप्ता ने चुनरी एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। बीएलओ रजनीश चौरसिया ने न्यू मॉड्यूल के अनुसार आयोजित मेगा विधिक जागरूकता शिविर की रूपरेखा, उद्देश्य और कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी उपस्थित ग्रामीणों को दी।
विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य और जनहित कार्य
प्रधान न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने अपने उद्बोधन में कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेष रूप से गरीब, जरूरतमंद, महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, श्रमिकों और दिव्यांगजनों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के पास आर्थिक संसाधनों की कमी है, उन्हें न्याय प्राप्त करने में कठिनाई नहीं होनी चाहिए, इसलिए विधिक सेवा प्राधिकरण उन्हें निःशुल्क अधिवक्ता, परामर्श एवं न्यायिक प्रक्रिया में सहायता प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर विधिक साक्षरता शिविर, लोक अदालत, प्री-लिटिगेशन काउंसलिंग, मध्यस्थता एवं सुलह के माध्यम से विवादों का निराकरण किया जाता है, जिससे लोगों को त्वरित और सस्ता न्याय मिल सके। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे किसी भी कानूनी समस्या, घरेलू विवाद, भूमि विवाद, मजदूरी, दुर्घटना, महिला उत्पीड़न, बाल अधिकार, पेंशन, श्रम या अन्य मामलों में विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करें और निःशुल्क सहायता प्राप्त करें।
कृत्रिम विकास बनाम प्राकृतिक जीवन पर चिंता
प्रधान न्यायाधीश सोलंकी ने कहा कि आज कृत्रिम विकास तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ मनुष्य की आयु घटती जा रही है, जो चिंताजनक स्थिति है। पहले के समय में लोग 100 से 125 वर्ष तक स्वस्थ जीवन जीते थे। इसका कारण प्राकृतिक जीवनशैली, शुद्ध भोजन और स्वच्छ वातावरण था। आज रासायनिक खेती, प्रदूषण और तनावपूर्ण जीवनशैली ने स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।
उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने, रसायन मुक्त भोजन अपनाने और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि यदि हम प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखें तो स्वस्थ और दीर्घायु जीवन संभव है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे खेती में रसायनों का कम से कम उपयोग करें और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करें।
नारी सम्मान को बताया समाज की आधारशिला
उन्होंने कहा कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। समाज की उन्नति महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़ी है। उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और आवश्यकता पड़ने पर विधिक सेवा प्राधिकरण की सहायता लेने का आह्वान किया।
सृष्टि की चार मुख्य रचनाओं का उल्लेख
अपने संबोधन में उन्होंने सृष्टि की चार मुख्य रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पत्थर और धरती हमें सब कुछ देते हैं, वन संपदा हमें जीवन देती है, पशु-पक्षी संवेदनशीलता सिखाते हैं और मनुष्य को बुद्धि का वरदान मिला है। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे हमें फल, औषधि और ऑक्सीजन देते हैं, जबकि पशु-पक्षी हमें वफादारी और सह-अस्तित्व का संदेश देते हैं।
उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने समय में बिना आधुनिक तकनीक के विशाल मंदिरों का निर्माण हुआ, जो मानव श्रम, धैर्य और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली का उदाहरण है। आज आधुनिक तकनीक होने के बावजूद मनुष्य का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, इसलिए हमें विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना होगा।
अधिवक्ताओं ने दी महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी
शिविर में अधिवक्ता मनीष नगाईच ने मेगा शिविर के उद्देश्य और विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं की जानकारी दी। अधिवक्ता रमेश श्रीवास्तव ने डिफेंस काउंसिल प्रणाली एवं पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। अधिवक्ता मदन जैन ने अपराध पीड़ित प्रतिकर योजना के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ितों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। अधिवक्ता ऋचा त्रिपाठी ने महिलाओं के अधिकार, घरेलू हिंसा अधिनियम, निःशुल्क हेल्पलाइन तथा विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी दी।
स्वास्थ्य परीक्षण और योजनाओं की जानकारी
शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया गया, जिसमें ग्रामीणों की जांच कर उन्हें आवश्यक परामर्श दिया गया। साथ ही केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। उपस्थित ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर संबंधित विभागों को निराकरण हेतु निर्देशित किया गया।
ग्रामीणों ने जताया उत्साह
शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर कानून, स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं सामाजिक विषयों पर जानकारी प्राप्त की। ग्रामीणों ने कहा कि इस प्रकार के शिविरों से उन्हें न्याय, अधिकार और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलती है, जिससे वे अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
समाज के लिए दिया महत्वपूर्ण संदेश
कार्यक्रम के अंत में प्रधान न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने कहा कि न्याय तभी सार्थक है जब वह अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य न्याय को सरल, सुलभ और निःशुल्क बनाना है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम विकास के साथ यदि हम प्रकृति, मानवता और सामाजिक मूल्यों को साथ लेकर चलें तो ही स्वस्थ, सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण संभव है।कानून की जानकारी, निःशुल्क विधिक सहायता, नारी सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक जीवनशैली — यही समृद्ध, स्वस्थ और न्यायपूर्ण समाज की मजबूत नींव है।
