दमोह/ भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते जल संकट को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने आज दिनांक 9 अप्रैल, गुरुवार को जिले के बटियागढ़ क्षेत्र के 10 से अधिक गांवों का विस्तृत दौरा कर पेयजल व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। पूरे दिन चले इस निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जल स्रोतों, हैंडपंपों, टंकियों, पाइपलाइन आपूर्ति व्यवस्था तथा ग्रामीणों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की स्थिति का मौके पर जायजा लिया।
भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं। कई गांवों में हैंडपंप खराब होने, जल स्तर नीचे जाने, नल-जल योजनाओं की धीमी आपूर्ति तथा पेयजल की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आईं। कुछ स्थानों पर ग्रामीणों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों को विशेष परेशानी हो रही है। इन समस्याओं को देखते हुए कलेक्टर ने संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन गांवों में पेयजल संकट गंभीर है, वहां 15 दिनों के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत खराब हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत, अतिरिक्त हैंडपंपों की स्थापना, टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति, नल-जल योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग तथा पाइपलाइन लीकेज सुधार कार्य प्राथमिकता से किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी गांव में पेयजल की समस्या बनी रहने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जूडी नदी की वर्तमान स्थिति का भी अवलोकन किया। नदी में जमा गाद, कम जल स्तर और गंदगी को देखते हुए उन्होंने गहरीकरण एवं स्वच्छता अभियान को तेज करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि जूडी नदी का वैज्ञानिक तरीके से गहरीकरण कराया जाए, ताकि जल संचयन क्षमता बढ़े और आसपास के गांवों के कुएं एवं हैंडपंपों का जल स्तर भी सुधर सके। उन्होंने इस कार्य को प्राथमिकता में लेते हुए शीघ्र कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
सीवरेज से हो रहे जल प्रदूषण को लेकर भी कलेक्टर ने अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की। कई स्थानों पर गंदा पानी जल स्रोतों में मिल रहा है, जिससे पेयजल प्रभावित हो रहा है। इस पर कलेक्टर ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि सीवरेज के पानी को जल स्रोतों से अलग करने के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाए और स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ किया जाए। उन्होंने कहा कि आमजन को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संकट वाले गांवों की सूची तैयार कर प्रतिदिन समीक्षा की जाए। साथ ही पंचायत स्तर पर जल प्रबंधन समितियों को सक्रिय कर स्थानीय स्तर पर भी समाधान के प्रयास किए जाएं। उन्होंने जल संरक्षण के लिए तालाबों की सफाई, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वर्षा जल संचयन के उपायों को भी प्राथमिकता देने को कहा।
भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से अपील की कि पानी का उपयोग सोच-समझकर करें और जल संरक्षण में प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में जल की बचत और स्थानीय जल स्रोतों की देखभाल से ही भविष्य में संकट को कम किया जा सकता है।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार कलेक्टर आज पूरे दिन क्षेत्र भ्रमण पर रहेंगे और अन्य प्रभावित गांवों का भी निरीक्षण कर पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। साथ ही संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि कार्यों की प्रगति की नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।जल संकट केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक चुनौती भी है। जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण और जिम्मेदार उपयोग ही भविष्य के जल संकट से बचाव का स्थायी समाधान है। प्रशासन के प्रयासों के साथ जनभागीदारी से ही हर गांव तक स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल पहुंचाया जा सकता है।
