नई दिल्ली/ आधार कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि आधार कार्ड केवल 6 वर्ष तक के बच्चों को ही जारी किया जाए और इसके बाद आधार बनवाने की प्रक्रिया उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या तहसीलदार कार्यालय के माध्यम से कराई जाए, ताकि सत्यापन अधिक सख्त हो सके।
यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई है, जिसमें केंद्र सरकार, सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में किशोरों और वयस्कों के लिए सख्त दिशानिर्देश तय करने की मांग की गई है, जिससे आधार के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि कॉमन सर्विस सेंटर और अन्य आधार पंजीयन केंद्रों पर स्पष्ट रूप से बोर्ड लगाए जाएं, जिनमें लिखा हो कि “आधार केवल पहचान का प्रमाण है, नागरिकता, पता या जन्मतिथि का नहीं।” साथ ही, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी पहचान पत्र प्राप्त करने पर मिलने वाली सजा को भी प्रमुखता से प्रदर्शित करने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में सत्यापन प्रक्रिया कमजोर है, जिसके कारण कथित रूप से अवैध प्रवासी आधार बनवा लेते हैं और इसके आधार पर राशन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र तथा ड्राइविंग लाइसेंस जैसे अन्य दस्तावेज भी हासिल कर लेते हैं। इससे सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग होने की आशंका जताई गई है।
याचिकाकर्ता के अनुसार आधार अधिनियम की धारा 3 में “निवासी” शब्द के कारण गैर-नागरिकों को भी आधार मिलने की संभावना बनी रहती है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि UIDAI ने 22 अगस्त 2023 के कार्यालय ज्ञापन में विदेशी और नागरिकों के बीच अंतर की बात कही है, लेकिन इसे कानून में स्पष्ट रूप से लागू नहीं किया गया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में ग्राम प्रधान या पार्षद की सिफारिश पर भी आधार बन जाता है, जिससे अवैध प्रवासी कथित तौर पर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा लेते हैं। उत्तर-पूर्वी राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वहां जनजातीय समुदाय कम दस्तावेज बनवाते हैं, जिससे उनकी पहचान और जमीन पर खतरा बढ़ सकता है।
याचिका में कहा गया है कि 31 मार्च 2026 तक लगभग 144 करोड़ आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं, इसलिए अब केवल नवजात बच्चों के लिए ही आधार की आवश्यकता है और 6 वर्ष की सीमा तय करना उचित होगा। साथ ही नागरिकता साबित करने का दायित्व व्यक्ति पर तय करने और इस संबंध में स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाने की मांग भी की गई है।
मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और अदालत के निर्देश के बाद ही इस पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
