दमोह/ जिला मुख्यालय स्थित कृषि उपज मंडी इन दिनों अव्यवस्थाओं का केंद्र बनती जा रही है। मंडी परिसर में आवारा और पालतू जानवरों का खुलेआम प्रवेश किसानों और व्यापारियों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। स्थिति यह है कि मंडी में लाई जा रही कृषि उपज को मवेशी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, मंडी में चोरी की घटनाओं का भी डर बना रहने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।
मंडी में घूमते मवेशी, फसल को हो रहा नुकसान

किसानों का कहना है कि वे गांवों से मेहनत से तैयार अनाज और अन्य उपज लेकर मंडी पहुंचते हैं, लेकिन तौल से पहले ही आवारा और पालतू जानवर उपज को बिखेर देते हैं या खा जाते हैं। कई बार बोरी फट जाती है, जिससे अनाज जमीन पर गिरकर खराब हो जाता है। इससे सीधे तौर पर किसानों की आमदनी प्रभावित हो रही है। किसानों ने बताया कि मंडी परिसर में हर दिन बड़ी संख्या में मवेशी घूमते नजर आते हैं, लेकिन उन्हें बाहर करने की कोई स्थायी व्यवस्था दिखाई नहीं देती।
व्यापारियों ने भी जताई चिंता
मंडी के व्यापारियों ने बताया कि जानवरों की वजह से कामकाज प्रभावित हो रहा है। नीलामी के दौरान मवेशियों के बीच आने से अव्यवस्था फैलती है और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कई बार वाहन और मवेशियों के बीच टकराव की स्थिति भी बन जाती है। व्यापारियों का कहना है कि मंडी जैसे व्यस्त स्थान पर इस तरह की स्थिति होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद हालात जस के तस
सूत्रों के अनुसार मंडी परिसर में सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात हैं, सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और काऊ कैचर जैसी व्यवस्था भी बताई जाती है। इसके बावजूद आवारा और पालतू जानवरों का लगातार प्रवेश होना और चोरी की घटनाओं की आशंका बने रहना व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि या तो व्यवस्थाएं कागजों तक सीमित हैं या फिर जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का सही निर्वहन नहीं कर रहे।
चोरी की घटनाओं से भी बढ़ी चिंता
किसानों और व्यापारियों का आरोप है कि मंडी में रात के समय उपज और अन्य सामान की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। कुछ मामलों में उपज या सामग्री गायब होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में सुरक्षा गार्ड और निगरानी व्यवस्था की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रदेश की प्रमुख मंडियों में शामिल दमोह
विदित हो कि दमोह कृषि उपज मंडी मध्यप्रदेश की बड़ी मंडियों में शामिल मानी जाती है। यहां जिले के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी मात्रा में कृषि उपज आती है। ऐसे में मंडी परिसर में इस प्रकार की अव्यवस्था किसानों और व्यापारियों दोनों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
व्यापारियों और किसानों का कहना है कि यदि मंडी में सुरक्षा व्यवस्था, काऊ कैचर और निगरानी प्रणाली मौजूद है तो फिर मवेशियों का प्रवेश और चोरी की घटनाएं कैसे हो रही हैं। इससे यह चर्चा भी बनी हुई है कि या तो व्यवस्थाओं में घोर लापरवाही बरती जा रही है या फिर निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं है।
कार्रवाई की मांग
किसानों और व्यापारियों ने मंडी प्रबंधन और प्रशासन से मांग की है कि
- मंडी परिसर में आवारा व पालतू जानवरों के प्रवेश पर तत्काल रोक लगाई जाए
- गेटों पर सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए
- काऊ कैचर की नियमित कार्रवाई कराई जाए
- रात में सुरक्षा गार्ड की संख्या बढ़ाई जाए
- सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सक्रिय की जाए
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसानों और व्यापारियों का नुकसान बढ़ने की आशंका बनी रहेगी। मंडी परिसर की अव्यवस्था अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है और जिम्मेदारों से शीघ्र समाधान की अपेक्षा की जा रही है।
