भोपाल/ विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की उपस्थिति में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल, शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) नई दिल्ली के बीच हुआ। इस समझौते को प्रदेश के आयुष विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान के नए अवसर खुलेंगे।
कार्यक्रम में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव और आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा की उपस्थिति में होम्योपैथी के वैश्विक प्रभाव और अनुसंधान की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान देशभर में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के विकास, शोध और शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में चल रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया।
इस एमओयू के तहत भोपाल के इन प्रतिष्ठित संस्थानों में ‘मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट डायबिटीज मेलिटस’ के कारण होने वाले ‘फुट अल्सर’ के मामलों में होम्योपैथी दवाओं के प्रभाव पर विस्तृत संयुक्त शोध किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति कीटाणुओं में बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता की समस्या से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही मधुमेह से पीड़ित मरीजों में जटिल घावों के उपचार के लिए वैकल्पिक और प्रभावी चिकित्सा पद्धति विकसित करने की दिशा में यह पहल उपयोगी साबित होगी।
शोध कार्य में एम्स भोपाल का माइक्रोबायोलॉजी विभाग तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग प्रदान करेगा, जबकि शासकीय होम्योपैथी कॉलेज भोपाल चिकित्सकीय मूल्यांकन और उपचार संबंधी अध्ययन करेगा। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा शोध की रूपरेखा, डेटा विश्लेषण और वैज्ञानिक मानकों का समन्वय किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशेषज्ञों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर एम्स भोपाल के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. देवाशीष विश्वास, मुख्य शोधकर्ता डॉ. शाश्वती नेमा, शासकीय होम्योपैथी कॉलेज भोपाल की शोध प्रमुख डॉ. जूही गुप्ता, सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के सचिव डॉ. संजय गुप्ता तथा वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रेनु मित्तल सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
इस त्रिपक्षीय एमओयू से होम्योपैथी और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के बीच समन्वित शोध को बढ़ावा मिलेगा, जिससे मधुमेह से जुड़ी जटिल समस्याओं के उपचार में नई संभावनाएं विकसित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
