भोपाल , 19 अप्रैल 2026 (रविवार)मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान परशुराम की जन्म-स्थली जानापाव को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाने के लिए इसे भव्य और दिव्य स्वरूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि यहां 17.41 करोड़ रुपये की लागत से परशुराम-श्रीकृष्ण लोक का निर्माण किया जाएगा, जो आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा।मुख्यमंत्री रविवार को इंदौर जिले के जानापाव में आयोजित परशुराम प्रकटोत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की समृद्धि और खुशहाली की कामना की तथा महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्र और चक्रव्यूह कला पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ भी किया।
धर्म, शक्ति और संतुलन का प्रतीक हैं परशुराम
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान परशुराम का जीवन धर्म स्थापना, आस्था और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने हर युग में अधर्म के खिलाफ खड़े होकर धर्म की पुनर्स्थापना की और शस्त्र व शास्त्र दोनों में संतुलन का संदेश दिया।उन्होंने कहा कि परशुराम ने भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महान योद्धाओं को शिक्षा देकर उन्हें दिव्यास्त्रों का ज्ञान प्रदान किया, जिससे उनका व्यक्तित्व एक महान गुरु के रूप में स्थापित होता है।
परशुराम-श्रीकृष्ण लोक: आस्था और पर्यटन का केंद्र
जानापाव में प्रस्तावित लोक में पौराणिक महत्व को दर्शाने वाला भव्य संग्रहालय बनाया जाएगा। इसमें शस्त्र दीर्घा, उत्पत्ति दीर्घा, स्वरूप दीर्घा, संतुलन दीर्घा और ध्यान दीर्घा के माध्यम से भगवान परशुराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत किया जाएगा।परिसर में दोनों भगवानों की कांस्य प्रतिमाएं स्थापित होंगी, 30 फीट ऊंचा भव्य प्रवेश द्वार बनेगा, कथा मंच, गज़ेबो, व्यू पॉइंट, लैंडस्केपिंग और पाथ-वे सहित आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
नदियों के पुनर्जीवन पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि जानापाव क्षेत्र से चंबल, गंभीर, अजनार और चोरल सहित कई नदियों का उद्गम होता है। उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत गंभीर और अजनार नदियों के पुनर्जीवन के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि नदियां धरती की धमनियों के समान हैं और उनका संरक्षण एवं सतत प्रवाह सुनिश्चित करना आवश्यक है, जिससे हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।
श्रीकृष्ण पाथेय और धार्मिक स्थलों का विकास
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण के लीला स्थलों को “श्रीकृष्ण पाथेय” के रूप में विकसित कर उन्हें भव्य तीर्थ बनाया जा रहा है। इन स्थलों को आस्था और पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।
नदी जोड़ो परियोजनाओं से मिलेगा विकास को बल
मुख्यमंत्री ने केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे बुंदेलखंड, मालवा और राजस्थान क्षेत्र को पेयजल, सिंचाई, उद्योग और बिजली उत्पादन में व्यापक लाभ मिलेगा।
संस्कृति, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सड़क, पुल, बांध, नहर, अस्पताल और स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं का तेजी से विस्तार कर रही है। शिक्षा के क्षेत्र में “सांदीपनि विद्यालय” के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ किया जा रहा है।उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उन्हें उनका हक दिलाने के लिए सरकार पूरी तरह संकल्पित है।
भक्ति और संस्कृति का संगम
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, भक्ति गायन और परशुराम नाट्य लीला के माध्यम से भगवान परशुराम के जीवन को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में आस्था और उत्सव का माहौल बना रहा।इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, संत, सामाजिक संगठन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
