दमोह, 1 मई। एक तरफ दमोह जिले के गांव-गांव और शहर की कॉलोनियां बूंद-बूंद पानी के लिए तड़प रही हैं, दूसरी तरफ पेयजल के लिए बिछाई गई सरकारी पाइपलाइन में सेंध लगाकर उसी पानी से खेतों की सिंचाई किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।यानी जिन पाइपलाइनों से लोगों की प्यास बुझनी थी, उन्हीं लाइनों से रात के अंधेरे में पानी चुराकर फसलें सींची जा रही थीं—और जिम्मेदार तंत्र को भनक तक नहीं लगी।जल निगम ने बांदकपुर पुलिस चौकी में लिखित शिकायत देकर साफ किया है कि मुख्य सप्लाई लाइन के एयर वॉल्व से छेड़छाड़ कर किसानों द्वारा मोटी पाइप जोड़कर पानी चोरी किया जा रहा था।यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब जल संकट पहले ही विकराल रूप ले चुका है और दर्जनों गांवों की टंकियां पर्याप्त नहीं भर पा रहीं।
रात में वॉल्व खोलो, पाइप जोड़ो, खेत भरो… सुबह सब जस का तस
मामला बांदकपुर के समीप टिकरी बुजुर्ग क्षेत्र का है, जहां जल निगम की मुख्य पेयजल पाइपलाइन के एयर वॉल्व का ऊपरी हिस्सा खोलकर उसमें करीब दो इंच मोटी पाइप फिट कर दी जाती थी।इसके बाद लगभग 500 फीट दूर खेतों तक पानी पहुंचाकर मूंग और उड़द जैसी ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई की जा रही थी।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह काम खुलेआम दिन में नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से रात के अंधेरे में किया जा रहा था।रात में पाइप लगती, घंटों पानी खेतों में बहता और सुबह होने से पहले पाइप निकालकर वॉल्व फिर सामान्य कर दिया जाता, ताकि चोरी पकड़ में न आए।यानी यह कोई आकस्मिक हरकत नहीं, बल्कि पूरी तैयारी के साथ किया जा रहा अवैध जल दोहन था।
जल निगम की रात गश्त में फूटा भंडाफोड़, तब खुली चोरी की परत
कई दिनों से दर्जनों गांवों की पानी टंकियां पूरी तरह नहीं भर रही थीं। पंपिंग होने के बावजूद सप्लाई प्रेशर गायब था।शक गहराया तो जल निगम के कर्मचारियों ने रात में पाइपलाइन की निगरानी शुरू की।30 अप्रैल की मध्यरात्रि 2:54 बजे जब कर्मचारी बांदकपुर-टिकरी बुजुर्ग मार्ग पर पहुंचे तो नजारा देखकर दंग रह गए—एयर वॉल्व में मोटी पाइप फंसी हुई थी और पानी खेतों की तरफ जा रहा था।यहीं से खुला कि पिछले करीब पंद्रह दिनों से पेयजल की खुली चोरी हो रही थी।
सोचने वाली बात यह है कि एक पखवाड़े तक मुख्य लाइन से पानी चोरी होता रहा, लेकिन स्थानीय स्तर पर किसी जिम्मेदार को भनक नहीं लगी।क्या निगरानी इतनी कमजोर थी, या फिर सब कुछ जानते हुए आंखें मूंदी गई थीं?
प्यासे गांवों का पानी फसलों में, आखिर जिम्मेदार कौन?
जल निगम का कहना है कि मुख्य लाइन से पानी चोरी होने के कारण कई गांवों की टंकियां पूरी तरह नहीं भर पा रही थीं।भीषण गर्मी में जहां लोग सुबह-शाम एक बाल्टी पानी के लिए परेशान हैं, वहां पेयजल के लिए आरक्षित पानी का खेतों में बहाया जाना सीधे-सीधे जनता के हिस्से पर डाका है।
यह केवल पानी चोरी नहीं है—
यह प्यासी आबादी के अधिकार की चोरी है।
जब सरकार करोड़ों खर्च कर गांवों और शहरों तक पेयजल पहुंचाने की योजना बनाती है और कुछ लोग उसी पानी को निजी सिंचाई में मोड़ देते हैं, तो यह सामान्य उल्लंघन नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य है।
ऊपर से बिजली कटौती ने तोड़ी कमर, नीचे से चोरी ने निकाला दम
स्थिति को और भयावह बना रही है सतधरू डैम की बार-बार गुल हो रही बिजली।पिछले दस दिनों से डैम पर बिजली कटते ही पंप बंद हो जाते हैं और पूरी जलापूर्ति व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है।बुधवार को बड़ी मुश्किल से सप्लाई बहाल हुई थी, लेकिन गुरुवार शाम फिर बिजली बंद होने से पंपिंग ठप हो गई।याद रहे कि सतधरू डैम से दमोह शहरी-ग्रामीण क्षेत्र सहित तेंदूखेड़ा, जबेरा और पटेरा ब्लॉक के लगभग 500 गांवों को पानी सप्लाई किया जाता हैऐसे में एक ओर बिजली कटौती और दूसरी ओर पाइपलाइन चोरी—दोहरी मार ने पेयजल संकट को विस्फोटक बना दिया है।
शहर से लगे 20 हजार लोग भी त्राहिमाम
चौपराखुर्द, जबलपुर नाका, हिरदेपुर, सुरेखा कॉलोनी, अभिनव होम्स सहित शहर से लगे इलाके भी पिछले कई दिनों से जलसंकट झेल रहे हैं।करीब 20 हजार आबादी को या तो 400-500 रुपये के टैंकर खरीदने पड़ रहे हैं या फिर दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है।
लो प्रेशर के कारण नलों में पानी नाम मात्र का पहुंच रहा है।
लोग पूछ रहे हैं—
जब जल निगम की मुख्य लाइन से ही पानी चोरी हो रहा था, तब हम तक पानी कैसे पहुंचता?
सिर्फ चेतावनी नहीं, सीधे एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग
बांदकपुर चौकी प्रभारी ने संबंधित किसानों को हिदायत देने की बात कही है, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या इतनी बड़ी पेयजल चोरी केवल समझाइश से निपटा दी जाएगी?
जब हजारों लोगों की प्यास छीनकर सरकारी लाइन से पानी खेतों में मोड़ा गया, तब यह मामला सीधे आपराधिक श्रेणी में आता है।
जनता मांग कर रही है कि—
- दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज हो,
- जल निगम के स्थानीय निगरानी तंत्र की जिम्मेदारी तय हो,
- पूरी मुख्य पाइपलाइन पर रात्रिकालीन पुलिस गश्त बढ़ाई जाए,
- और जिनकी वजह से दर्जनों गांव प्यासे रहे, उनसे वसूली की जाए।
दमोह में जलसंकट अब प्राकृतिक नहीं, प्रशासनिक और आपराधिक दोनों हो चुका है
अब तस्वीर साफ है—
एक तरफ बिजली कटौती, दूसरी तरफ पाइपलाइन चोरी, तीसरी तरफ कमजोर निगरानी और चौथी तरफ प्यासी जनता।यानी दमोह का जलसंकट सिर्फ मौसम की मार नहीं, बल्कि लापरवाही, चोरी और ढीले प्रशासन का संयुक्त परिणाम बन चुका है।
सबसे बड़ा प्रश्न यही है—
जब जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही थी, तब उनके हिस्से का पानी खेतों में बहाने वालों पर अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
