दमोह। किसी भी शहर का बस स्टैंड वहां की व्यवस्थाओं का पहला परिचय माना जाता है, लेकिन दमोह में सरकारी और प्राइवेट दोनों बस स्टैंडों की स्थिति यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।रोजाना करीब 300 से अधिक बसों की आवाजाही के बावजूद यहां यात्रियों को न तो शुद्ध पेयजल की सुविधा मिल रही है और न ही बैठने-ठहरने के लिए समुचित प्रतीक्षालय उपलब्ध है। भीषण गर्मी में यह अव्यवस्था यात्रियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा रही है।
मंगलवार दोपहर किए गए मौके के जायजे में सामने आया कि दोनों बस स्टैंडों पर यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है, ऐसे में बसों का इंतजार कर रहे यात्री तेज धूप, गर्म हवाओं और उमस के बीच बेहाल नजर आए।सबसे गंभीर समस्या पेयजल की है। बस स्टैंड परिसर में यात्रियों के लिए पानी की कोई ठोस और व्यवस्थित व्यवस्था नहीं है। नल-जल सुविधा निष्प्रभावी है और हैंडपंप भी लंबे समय से खराब पड़ा बताया गया। ऐसे में यात्रियों को मजबूरन आसपास की दुकानों और होटलों से पानी की बोतल खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है।आर्थिक रूप से कमजोर यात्रियों के लिए यह स्थिति और भी कष्टदायक है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।
केवल टीनशेड का ढांचा, चारों तरफ से खुला प्रतीक्षालय
सरकारी बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए जो प्रतीक्षालय बना है, वह केवल टीनशेड का एक अस्थायी ढांचा भर है। यह चारों तरफ से खुला होने के कारण धूप और गर्म हवाओं से कोई राहत नहीं देता।दोपहर के समय यहां बैठना तक मुश्किल हो जाता है। गर्म हवा के थपेड़े सीधे यात्रियों को झुलसा रहे थे।
बस स्टैंड परिसर में पर्याप्त पेड़-पौधे भी नहीं हैं, जिससे प्राकृतिक छांव का भी अभाव है। कई यात्री जमीन पर बैठकर या बसों के नीचे खड़े होकर धूप से बचने की कोशिश करते दिखाई दिए।प्राइवेट बस स्टैंड की हालत भी इससे अलग नहीं है। वहां भी बैठने के लिए सीमित और असुविधाजनक जगह है, जबकि यात्रियों की संख्या लगातार अधिक रहती है।
जर्जर शेड से हादसे का खतरा
सरकारी बस स्टैंड परिसर में पुराने शेड की हालत भी चिंताजनक बनी हुई है।जहां हटा और सागर रूट की बसें खड़ी होती हैं, वहां ऊपर लगे सीमेंट और लोहे के हिस्से कई जगह से टूटकर लटक रहे हैं।यह जर्जर ढांचा किसी भी समय यात्रियों पर गिर सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन अब तक इसकी मरम्मत या हटाने की दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं हुई।
यात्रियों ने जताई नाराजगी
रोजाना सफर करने वाले यात्री रमेश यादव ने बताया कि बस स्टैंड पर पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। हर बार 20 रुपये की पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है, जो हर किसी के लिए संभव नहीं है।यात्री राकेश अहिरवार का कहना है कि यहां सैकड़ों बसें आती-जाती हैं, लेकिन सुविधाएं शून्य हैं। हैंडपंप महीनों से खराब है, फिर भी किसी जिम्मेदार ने ध्यान नहीं दिया।सीता पटैल ने कहा कि बच्चों के साथ सफर करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इतनी गर्मी में न पानी मिल रहा है, न बैठने की ठीक जगह। मजबूरी में टीनशेड के नीचे इंतजार करना पड़ता है।वहीं दिनेश पटेल ने कहा कि बस स्टैंड शहर की महत्वपूर्ण सार्वजनिक जगह होती है। बाहर से आने वाले लोग सबसे पहले यहीं उतरते हैं। ऐसी बदहाल स्थिति शहर की छवि खराब करती है।
नगर पालिका और प्रशासन पर उठ रहे सवाल
यात्रियों का कहना है कि बस स्टैंड जैसी बुनियादी सार्वजनिक सुविधा पर नगर पालिका और प्रशासन का ध्यान नहीं है।जहां प्रतिदिन हजारों लोग आवागमन करते हों, वहां पेयजल, पक्का प्रतीक्षालय, शौचालय, पंखे और साफ-सफाई जैसी न्यूनतम सुविधाएं होना जरूरी है, लेकिन दमोह के दोनों बस स्टैंड इन सुविधाओं से लगभग वंचित हैं।
पड़ोसी जिलों के बस स्टैंड अपेक्षाकृत बेहतर होने की बात कहकर यात्री सवाल उठा रहे हैं कि आखिर दमोह में अब तक इस दिशा में ठोस काम क्यों नहीं हुआ।भीषण गर्मी के इस दौर में यात्रियों की मांग है कि तत्काल पेयजल की स्थायी व्यवस्था, सुरक्षित यात्री प्रतीक्षालय और जर्जर शेड की मरम्मत कराई जाए, ताकि सफर शुरू होने से पहले ही लोगों को परेशानी न झेलनी पड़े।
