प्रदेश के बड़े आईपीएस फेरबदल में दमोह को मिले युवा पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी, कानून-व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद
(डॉ. एल.एन. वैष्णव)
दमोह/भोपाल, 6 मई/मध्यप्रदेश शासन द्वारा मंगलवार देर रात भारतीय पुलिस सेवा के 62 अधिकारियों के व्यापक तबादले किए गए, जिनमें दमोह जिले को नया पुलिस अधीक्षक प्राप्त हुआ है। वर्ष 2020 बैच के युवा आईपीएस अधिकारी आनंद कलादगी को दमोह जिले की कमान सौंपी गई है, जबकि वर्तमान पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी का स्थानांतरण नई प्रशासनिक जिम्मेदारी के अंतर्गत किया गया है। शासन के इस निर्णय को केवल नियमित प्रशासनिक रोटेशन नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था को अधिक सक्रिय, उत्तरदायी और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दमोह जिले के लिए यह परिवर्तन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि आनंद कलादगी हाल तक इंदौर नगर पुलिस के जोन-4 में पुलिस उपायुक्त के रूप में कार्यरत रहे हैं। इंदौर प्रदेश का सबसे सक्रिय और चुनौतीपूर्ण नगरीय क्षेत्र माना जाता है, जहां अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, रात्रिकालीन गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी तथा त्वरित पुलिस कार्रवाई पर निरंतर दबाव बना रहता है। ऐसे महत्त्वपूर्ण दायित्व का अनुभव अब दमोह जिले को मिलने जा रहा है।
पुलिस विभाग के जानकारों का मानना है कि इंदौर में विकसित तेज, चुस्त और परिणाममुखी पुलिस कार्यप्रणाली का सीधा लाभ दमोह जिले की कानून-व्यवस्था को मिल सकता है।
दमोह के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अनुभव

इंदौर नगर पुलिस के जिस क्षेत्र में आनंद कलादगी कार्यरत रहे, वहां विविध सामाजिक संरचना, व्यस्त बाजार, तीव्र यातायात दबाव, रात्रिकालीन गतिविधियां और निरंतर कानून-व्यवस्था की चुनौतियां बनी रहती हैं। ऐसे वातावरण में कार्य करने वाला अधिकारी सामान्यतः—
- त्वरित निर्णय लेने में सक्षम होता है,
- क्षेत्र में निरंतर उपस्थिति बनाए रखता है,
- पुलिस बल की सघन निगरानी करता है,
- तकनीकी साधनों का प्रभावी उपयोग करता है,
- तथा छोटी घटनाओं को प्रारंभिक स्तर पर नियंत्रित करने की कार्यशैली अपनाता है।
इसी अनुभव के साथ आनंद कलादगी अब दमोह आ रहे हैं। इसलिए माना जा रहा है कि जिले में पारंपरिक पुलिस व्यवस्था के साथ-साथ अधिक गतिशील और तत्पर पुलिसिंग का वातावरण विकसित हो सकता है।
दमोह को किन क्षेत्रों में मिल सकता है लाभ
दमोह जिला लंबे समय से कुछ स्थायी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें शहरी यातायात अव्यवस्था, रात्रिकालीन तेज रफ्तार वाहन, अवैध परिवहन, ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की त्वरित पहुंच, छोटी आपराधिक घटनाओं की पुनरावृत्ति तथा बाजार क्षेत्रों में पुलिस की दृश्य उपस्थिति का अभाव प्रमुख हैं।
ऐसे में इंदौर जैसी सक्रिय पुलिस कार्यशैली का अनुभव रखने वाले अधिकारी के आने से निम्न क्षेत्रों में सुधार की संभावना व्यक्त की जा रही है—
- रात्रिकालीन गश्त अधिक प्रभावी हो सकती है,
- यातायात नियंत्रण में तकनीकी निगरानी बढ़ सकती है,
- अवैध परिवहन एवं नियम उल्लंघन पर संयुक्त कार्रवाई संभव हो सकती है,
- बाजार एवं संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित पुलिस पहुंच बढ़ सकती है,
- तथा ग्रामीण थाना क्षेत्रों की जवाबदेही और अधिक मजबूत हो सकती है।
इस प्रकार यह तबादला केवल अधिकारी परिवर्तन नहीं, बल्कि पुलिस संचालन की पद्धति में नवीनता का संकेत भी माना जा रहा है।
श्रुतकीर्ति सोमवंशी का कार्यकाल रहा संतुलित

वर्तमान पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी का कार्यकाल जिले में संतुलित प्रशासनिक नियंत्रण, संवेदनशील मामलों में संयमित दृष्टिकोण तथा महिला सुरक्षा संबंधी प्राथमिकता के लिए स्मरणीय रहा है। उन्होंने अनेक जटिल परिस्थितियों में पुलिस व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने का प्रयास किया। इसलिए उनका स्थानांतरण किसी नकारात्मक संकेत के रूप में नहीं, बल्कि शासन की व्यापक प्रशासनिक पुनर्संरचना का हिस्सा माना जा रहा है।
पुलिस विभाग में यह धारणा भी व्यक्त की जा रही है कि श्रुतकीर्ति सोमवंशी द्वारा स्थापित प्रशासनिक अनुशासन की आधारभूमि पर अब आनंद कलादगी सक्रिय मैदानी कार्यवाही और तेज निगरानी का नया अध्याय जोड़ सकते हैं।
अर्थात दमोह जिले को अनुभव की स्थिरता से युवा सक्रियता की ओर संतुलित संक्रमण प्राप्त हुआ है।
सरकार का स्पष्ट संकेत : छोटे जिलों में भी सक्रिय पुलिसिंग
राज्य शासन ने इस बार जिन युवा अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है, उनमें अधिकांश अधिकारी बड़े शहरों अथवा महत्त्वपूर्ण फील्ड दायित्वों का अनुभव लेकर आए हैं। इससे यह संकेत स्पष्ट है कि शासन अब छोटे और मध्यम जिलों में भी महानगरीय स्तर की सक्रिय, जवाबदेह और त्वरित पुलिस व्यवस्था स्थापित करना चाहता है।
आनंद कलादगी की नियुक्ति भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा मानी जा रही है।
जनता की अपेक्षाएं बढ़ीं
दमोह जिले में नए पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति के बाद आम नागरिकों और प्रशासनिक हलकों में यह उम्मीद बढ़ी है कि—
- यातायात व्यवस्था में सख्ती आएगी,
- अवैध परिवहन पर नियंत्रण होगा,
- रात्रिकालीन गश्त और अधिक सक्रिय होगी,
- थाना स्तर पर शिकायतों के निराकरण की गति बढ़ेगी,
- तथा अपराधियों में पुलिस का प्रभावी भय स्थापित होगा।
यदि इंदौर की कार्यसंस्कृति का कुछ अंश भी दमोह में लागू होता है तो निश्चित रूप से जिले को उसका सकारात्मक लाभ मिल सकता है। दमोह जिले को केवल नया पुलिस अधीक्षक नहीं मिला है, बल्कि प्रदेश के सर्वाधिक सक्रिय नगरीय पुलिस तंत्र में कार्य कर चुके एक युवा अधिकारी का अनुभव मिला है। अब देखने वाली बात यह होगी कि आनंद कलादगी अपनी कार्यशैली से जिले की पुलिस व्यवस्था में कितनी नई गति और प्रभावशीलता ला पाते हैं। फिलहाल इतना निश्चित है कि आने वाले समय में दमोह पुलिस प्रशासन अधिक सक्रिय, अधिक मैदानी और अधिक उत्तरदायी स्वरूप में दिखाई दे सकता है।
