दमोह शहर में विकास कार्यों की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जबलपुर नाका स्थित सुखसागर से आमचौपरा होते हुए निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज तक प्रस्तावित लगभग 4 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण जिम्मेदार विभागीय उदासीनता और निर्माण एजेंसी की लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। तीन माह पूर्व बड़े जोर-शोर से शुरू किया गया यह निर्माण कार्य अब लगभग ठप पड़ा है। स्थिति यह है कि 4 किलोमीटर लंबी सड़क में महज 200 मीटर सीसी सड़क बनाकर एजेंसी मानो काम को भूल ही गई है। अधूरा निर्माण अब आम नागरिकों के लिए राहत नहीं बल्कि रोजाना की मुसीबत और हादसों का कारण बन चुका है।
200 मीटर बनी सड़क, बाकी 3800 मीटर इंतजार में

फरवरी माह के पहले सप्ताह में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत इस सड़क का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था। उद्देश्य था—जबलपुर नाका, चौपराखुर्द, बरपटी, अथाई सहित आसपास के ग्रामीण अंचल और शहर के हजारों लोगों को मेडिकल कॉलेज तक एक सुगम, चौड़ी और सुरक्षित सड़क उपलब्ध कराना।
लेकिन काम की शुरुआत पंचायत कार्यालय के सामने से की गई और एक ओर लगभग 200 मीटर लंबी सीसी सड़क डालने के बाद निर्माण एजेंसी ने मशीनें समेट लीं। इसके बाद से न तो मजदूर दिखे, न सामग्री और न ही विभागीय निगरानी।
तीन माह बीत जाने के बाद भी शेष सड़क अधूरी पड़ी है। धूल, गड्ढे, असमतल किनारे और बीच में ऊंची-नीची बनी सीसी सड़क लोगों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन चुकी है।
आधी सड़क ऊपर, आधी नीचे… वाहन चालक रोज जोखिम में
निर्माण एजेंसी ने सड़क का केवल एक हिस्सा सीसी कर ऊंचा बना दिया, जबकि दूसरी ओर पुरानी कच्ची/डामरी सतह लगभग आधा फीट नीचे रह गई। इस कारण सड़क पर वाहन चलाना अत्यंत खतरनाक हो गया है।
दोपहिया वाहन चालक जरा-सी असावधानी में फिसल रहे हैं, वहीं चारपहिया वाहन क्रॉसिंग के दौरान संतुलन खो रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार रात के समय यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि सड़क के ऊंचे-नीचे किनारे स्पष्ट दिखाई नहीं देते। न तो पर्याप्त संकेतक लगाए गए हैं और न ही कोई बैरिकेडिंग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई लोग अंधेरे में सड़क की ढलान समझ नहीं पाते और वाहन सीधे नीचे उतर जाने से गिर जाते हैं। बरसात आने पर यह स्थिति और भयावह हो सकती है।
शुरुआत से ही निर्माण में गड़बड़ी, गलत स्थान से शुरू किया काम
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि सड़क निर्माण की पूरी प्रक्रिया शुरू से ही सवालों में रही। नियमानुसार निर्माण कार्य दमोह-जबलपुर हाईवे से शुरू होना था, ताकि मुख्य कनेक्टिविटी पहले तैयार हो सके। लेकिन एजेंसी ने पंचायत भवन के सामने बीच हिस्से से निर्माण शुरू कर दिया।
इतना ही नहीं, सड़क चौड़ीकरण के लिए पहले दोनों ओर दो-दो फीट तक खुदाई कर गड्ढे छोड़ दिए गए। अतिक्रमण चिन्हित तो हुआ, लेकिन हटाया नहीं गया। इसके बावजूद सीसी सड़क डाल दी गई। परिणाम यह हुआ कि कुछ ही दिनों बाद काम रोकना पड़ा और अधूरी खुदाई व अधूरा निर्माण जस का तस छोड़ दिया गया।
वर्तमान सड़क की चौड़ाई लगभग 3.50 मीटर है, जिसे बढ़ाकर 5.50 मीटर किया जाना है, लेकिन फिलहाल आधी सड़क उपयोग में और आधी निर्माणाधीन स्थिति में होने से आवागमन बेहद मुश्किल है।
गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल, दो माह में उड़ने लगी परत
जिस 200 मीटर हिस्से को बनाकर एजेंसी चली गई, उसकी गुणवत्ता भी अब कटघरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की ऊपरी सतह से कई जगह धूल उड़ने लगी है। कुछ स्थानों पर सीमेंट की ऊपरी परत झड़ रही है और नीचे की गिट्टी बाहर दिखाई देने लगी है।
ऐसे में यह आशंका गहराने लगी है कि यदि निर्माण का यही स्तर रहा तो पूरी सड़क बनने के पहले ही मरम्मत की नौबत आ जाएगी।
नागरिकों का कहना है कि जो सड़क दो माह में अपनी मजबूती खोने लगे, उसकी गुणवत्ता प्रमाणित करने वाले अधिकारी भी उतने ही जिम्मेदार हैं जितनी निर्माण एजेंसी।
पूर्व मंत्री जयंत मलैया भी कर चुके निरीक्षण, फिर भी नहीं सुधरी स्थिति
सड़क निर्माण में मिल रही शिकायतों के बाद दमोह विधायक एवं पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया ने भी स्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सड़क निर्माण निर्धारित मापदंडों, तकनीकी गुणवत्ता और समयसीमा के अनुसार किया जाए।
लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि निरीक्षण और निर्देश केवल औपचारिकता बनकर रह गए। विभागीय मशीनरी ने न तो निर्माण एजेंसी पर दबाव बनाया और न ही कार्य को पुनः प्रारंभ कराने की तत्परता दिखाई।
मेडिकल कॉलेज के लिए लाइफलाइन है यह मार्ग
बरपटी पहाड़ी पर बन रहा मेडिकल कॉलेज आने वाले महीनों में दमोह जिले की स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। मेडिकल कॉलेज लगभग अंतिम चरण में है। यहां प्रतिदिन मरीजों, डॉक्टरों, स्टाफ, विद्यार्थियों और एंबुलेंस की भारी आवाजाही होगी।
ऐसे में यह सड़क मेडिकल कॉलेज के लिए सबसे छोटा, सीधा और सुविधाजनक मार्ग मानी जा रही है। यदि यही सड़क अधूरी, संकरी और जर्जर हालत में रही तो भविष्य में मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस मार्ग को मेडिकल इमरजेंसी की लाइफलाइन बनना था, वही आज स्वयं दुर्घटनाओं का कारण बना हुआ है।
जिम्मेदारों का तर्क: अतिक्रमण नहीं हटा, अब बारिश में होगा काम
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के महाप्रबंधक डी.एस. साहू का कहना है कि फरवरी माह में सड़क निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन बाद में अतिक्रमण हटाने की समस्या सामने आई, जिसके चलते काम रोकना पड़ा। राजस्व विभाग द्वारा अतिक्रमण हटते ही कार्य पुनः प्रारंभ किया जाएगा। हालांकि अब तेज गर्मी के कारण निर्माण कार्य बारिश के मौसम में ही शुरू हो सकेगा।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि अतिक्रमण पहले से मौजूद था तो बिना संपूर्ण कार्रवाई के निर्माण शुरू क्यों किया गया? और यदि काम रोकना ही था तो अधूरी ऊंची-नीची सड़क बनाकर जनता को जोखिम में क्यों छोड़ा गया?
जनता पूछ रही—विकास या दिखावा?
स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि निर्माण कार्य केवल दिखावे के लिए शुरू किया गया, ताकि कागजों में प्रगति दिखाई जा सके। जबकि धरातल पर जनता को धूल, दुर्घटना और अव्यवस्था मिली।
मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण संस्थान तक जाने वाला यह मार्ग यदि समय रहते दुरुस्त नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यह प्रशासन और निर्माण एजेंसी दोनों की बड़ी विफलता माना जाएगा।
