22 सितंबर से एयरपोर्ट के पास शुरू होगी सुरंग की खुदाई, याचिका में ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों और जलस्रोतों को नुकसान की आशंका जताई गई
(आचार्य नारायण वैष्णव)
इंदौर। इंदौर शहर में मेट्रो रेल परियोजना अब एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश करने जा रही है। एक ओर जहां यलो लाइन पर मेट्रो संचालन की तैयारियां तेज हैं, वहीं दूसरी ओर एयरपोर्ट से शहर के प्रमुख हिस्सों तक अंडरग्राउंड मेट्रो के लिए सुरंग निर्माण शुरू होने वाला है। इसी बीच प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो रूट को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।दावा किया जा रहा है कि प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो रूट के आसपास 200 मीटर की सीमा में शहर की कई ऐतिहासिक इमारतें, धार्मिक स्थल और जलस्रोत मौजूद हैं। नियमानुसार ऐसे संवेदनशील स्थानों से मेट्रो रूट की दूरी 300 मीटर होने की बात कही जा रही है। हालांकि, मेट्रो प्रबंधन की ओर से संबंधित स्थलों को निर्धारित रेंज से बाहर बताया गया है।मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोड़वानी ने इस संबंध में एमपी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अंडरग्राउंड मेट्रो की सुरंग निर्माण से ऐतिहासिक इमारतों, धार्मिक स्थलों और अन्य संरचनाओं को संभावित नुकसान की आशंका जताई है।
22 सितंबर से शुरू होना है टनल निर्माण
प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो परियोजना के तहत एयरपोर्ट के नजदीक से सुरंग निर्माण का कार्य 22 सितंबर से शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इसके चलते मेट्रो के निर्माण कार्य को लेकर शहरवासियों की नजर अब इस परियोजना पर टिकी हुई है।अंडरग्राउंड मेट्रो के निर्माण के लिए अत्याधुनिक तकनीक से सुरंग तैयार की जाएगी। सुरंग निर्माण के दौरान जमीन के भीतर होने वाली गतिविधियों का आसपास मौजूद पुरानी इमारतों और अन्य संरचनाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
दो चरणों में बनेगा इंदौर का अंडरग्राउंड मेट्रो रूट
इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो रूट का निर्माण दो चरणों में किया जाना प्रस्तावित है। पहले चरण में एयरपोर्ट से रीगल तक अंडरग्राउंड मेट्रो का निर्माण किया जाएगा। इस हिस्से में करीब 9 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग बनाई जाएगी।वहीं दूसरे चरण में खजराना से रीगल तक अंडरग्राउंड मेट्रो का रूट तैयार किया जाना है। इस हिस्से में करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग बनाए जाने की योजना है। दूसरे चरण के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी होने की जानकारी सामने आई है।
ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा पर उठे सवाल
अंडरग्राउंड मेट्रो रूट को लेकर सबसे बड़ा सवाल इंदौर की ऐतिहासिक विरासत की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। जानकारी के मुताबिक प्रस्तावित रूट की रेंज में शहर की कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों के आने की बात कही जा रही है।इनमें राजवाड़ा, छत्रियां, गांधी हॉल, रानी सराय, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट और जिला कोर्ट की इमारतें, अहिल्या लाइब्रेरी तथा हुकमचंद घंटाघर जैसे प्रमुख स्थल शामिल बताए जा रहे हैं।इंदौर की पहचान से जुड़े इन ऐतिहासिक स्थलों की संरचनाएं पुरानी हैं। ऐसे में सुरंग निर्माण के दौरान होने वाली खुदाई और भूमिगत गतिविधियों से इन पर किसी प्रकार का प्रभाव पड़ेगा या नहीं, इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
धार्मिक स्थलों की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता
प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो रूट के आसपास कई धार्मिक स्थल भी बताए जा रहे हैं। इनमें गोवर्धननाथ मंदिर, जानकीनाथ मंदिर, बड़ा गणपति मंदिर, छोटा गणपति मंदिर, गोपाल मंदिर, तेरापंथी जैन मंदिर और गायत्री मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थल शामिल होने की जानकारी सामने आई है।याचिकाकर्ता की ओर से इन धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। सवाल यह है कि भूमिगत सुरंग के निर्माण के दौरान कंपन, जमीन के भीतर होने वाले कार्य और अन्य निर्माण गतिविधियों का इन प्राचीन अथवा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों पर कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं।
जलस्रोतों को लेकर भी संशय
अंडरग्राउंड मेट्रो रूट को लेकर केवल ऐतिहासिक इमारतों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि भूमिगत जलस्रोतों को लेकर भी चिंता सामने आई है।प्रस्तावित रूट शहर के कई घनी आबादी वाले रहवासी इलाकों से होकर गुजरने की जानकारी सामने आई है। इनमें एमजी रोड, अहिल्या पल्टन, मल्हारगंज, जूनी इंदौर, रविंद्र नगर, तिलक नगर और सांई कृपा नगर जैसे क्षेत्र शामिल बताए जा रहे हैं।इन इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों द्वारा निजी बोरिंग और अन्य जलस्रोत बनाए गए हैं। ऐसे में मेट्रो की भूमिगत सुरंग इन जलस्रोतों की कितनी गहराई से होकर गुजरेगी और निर्माण के दौरान भूजल व्यवस्था पर इसका कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं, इसे लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
300 मीटर के नियम को लेकर विवाद
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा उन नियमों को लेकर है, जिनके अनुसार संवेदनशील ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण संरचनाओं को मेट्रो रूट से एक निश्चित दूरी पर रखने की बात कही जा रही है।याचिका में दावा किया गया है कि कुछ ऐतिहासिक इमारतें और धार्मिक स्थल प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो रूट से करीब 200 मीटर की दूरी में बताए जा रहे हैं, जबकि नियमों के अनुसार यह दूरी 300 मीटर होनी चाहिए।दूसरी ओर मेट्रो प्रबंधन द्वारा संबंधित स्थलों को निर्धारित रेंज से बाहर बताया जा रहा है। ऐसे में वास्तविक स्थिति क्या है और प्रस्तावित मेट्रो रूट की तकनीकी मैपिंग के अनुसार इन स्थानों की वास्तविक दूरी कितनी है, यह जांच का विषय बन गया है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, अब सभी की नजर सुनवाई पर
अंडरग्राउंड मेट्रो रूट से जुड़े इन सवालों को लेकर किशोर कोड़वानी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में ऐतिहासिक इमारतों, धार्मिक स्थलों और अन्य संरचनाओं को संभावित नुकसान की आशंका जताते हुए मामले पर गंभीरता से विचार करने की मांग की गई है।मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद अब इस बात पर नजर रहेगी कि न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है और संबंधित विभागों से किस प्रकार की जानकारी मांगी जाती है।
विकास भी जरूरी, विरासत की सुरक्षा भी
इंदौर के लिए मेट्रो रेल परियोजना शहर के भविष्य के परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बढ़ते यातायात, सड़क पर वाहनों के दबाव और शहर के विस्तार को देखते हुए आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।लेकिन इसके साथ ही इंदौर की ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।ऐसे में चुनौती यह है कि शहर में आधुनिक परिवहन व्यवस्था का विस्तार भी हो और वर्षों पुरानी ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। अंडरग्राउंड मेट्रो के निर्माण में तकनीक और सावधानी का संतुलन इस पूरे मामले में बेहद महत्वपूर्ण होगा।
शहरवासियों की नजर अब निर्माण और जांच पर
अंडरग्राउंड मेट्रो परियोजना को लेकर इंदौर के लोगों में उत्साह भी है और इस विवाद के बाद चिंता भी। शहरवासी चाहते हैं कि मेट्रो का विस्तार तेजी से हो, लेकिन साथ ही ऐतिहासिक इमारतों, मंदिरों, धार्मिक स्थलों और भूजल स्रोतों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।आने वाले समय में टनल निर्माण शुरू होने के बाद निर्माण एजेंसी द्वारा सुरक्षा के लिए किस प्रकार की तकनीकी व्यवस्था अपनाई जाती है और संवेदनशील क्षेत्रों में किस तरह की निगरानी रखी जाती है, यह महत्वपूर्ण होगा।फिलहाल अंडरग्राउंड मेट्रो के प्रस्तावित रूट को लेकर उठे सवालों ने इंदौर के विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन की बहस को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही और संबंधित विभागों की तकनीकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।
