इंदौर, 22 मई /कोरोना महामारी के दौरान पत्नी की धारदार हथियार से हत्या करने वाले आरोपी पति को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रकरण में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने के बावजूद मृतिका के मृत्यु पूर्व दिए गए कथन और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को कठोर दंड दिया।
जिला अभियोजन कार्यालय इंदौर से प्राप्त जानकारी के अनुसार 20 मई 2026 को पंचम अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. अंबेडकर नगर, जिला इंदौर भरत कुमार व्यास के न्यायालय ने थाना मानपुर के अपराध क्रमांक 319/2020 में आरोपी पंकज (40 वर्ष), निवासी जिला धार को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और धारा 201 के तहत 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने आरोपी पर कुल दो हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।
शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक आनंद नेमा और विशेष लोक अभियोजक बलबहादुर सिंह अलावा ने पैरवी की।
सहायक निदेशक अभियोजन राजेन्द्र सिंह भदौरिया ने बताया कि प्रकरण में कोई प्रत्यक्षदर्शी साक्षी मौजूद नहीं था। इसके बावजूद अभियोजन पक्ष ने 20 गवाहों के बयान न्यायालय में प्रस्तुत किए। साथ ही मृतिका द्वारा मृत्यु से पहले गंभीर अवस्था में दिए गए कथनों को साक्ष्य के रूप में स्थापित किया गया, जिसके आधार पर न्यायालय आरोपी को दोषी मानते हुए कठोर दंड देने पर सहमत हुआ।
अभियोजन के अनुसार घटना 8 मई 2020 की है। कोरोना लॉकडाउन के दौरान मृतिका अपने पति पंकज के साथ महाराष्ट्र के जलाना क्षेत्र से मजदूरी कर वापस अपने गृह क्षेत्र लौट रही थी। दोनों ट्रक के माध्यम से मानपुर पहुंचे और वहां से पैदल अपने गांव की ओर जा रहे थे।
इसी दौरान पति-पत्नी के बीच पुराने विवाद को लेकर कहासुनी हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर आरोपी पंकज ने पत्नी के गले पर धारदार चाकू से हमला कर दिया और सामान लेकर मौके से फरार हो गया।
गंभीर रूप से घायल महिला किसी तरह सड़क तक पहुंची और बाद में बेहोश होकर गिर गई। सूचना मिलने के बाद उसे उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मानपुर लाया गया। अस्पताल में उपचार के दौरान महिला ने अपने मृत्यु पूर्व कथन में हमलावर के रूप में अपने पति का नाम बताया।
शुरुआत में पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था, लेकिन उपचार के दौरान महिला की मौत हो जाने के बाद मामले में हत्या की धारा जोड़ी गई। जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया गया।
प्रकरण में अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए न्यायालय ने आरोपी पति को दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
