इंदौर, 22 मई /मारपीट की घटना को रोकने पहुंची पुलिस टीम पर हमला कर शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने और पुलिसकर्मी को चोट पहुंचाने के मामले में न्यायालय ने 16 वर्ष पुराने प्रकरण में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
प्रभारी उप संचालक अभियोजन राजेन्द्र सिंह भदौरिया ने बताया कि 19 मई 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी इंदौर सूर्यपाल सिंह राठौर के न्यायालय ने थाना पंढरीनाथ के प्रकरण में फैसला सुनाते हुए आरोपी राजकुमार पिता कैलाशचंद्र कुरील, राजेन्द्र पिता कैलाशचंद्र कुरील, सुभाष पिता कैलाशचंद्र कुरील और प्रकाश पिता कैलाशचंद्र कुरील, सभी निवासी इंदौर को दोषसिद्ध पाया।
न्यायालय ने सभी आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 332 सहपठित धारा 34 के तहत एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास तथा एक-एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
अभियोजन के अनुसार घटना 11 जनवरी 2010 की है। उस दिन सुबह करीब साढ़े नौ बजे प्रधान आरक्षक दशरथ मंडलोई, उप निरीक्षक देवेन्द्र मरकाम और उप निरीक्षक राजन उईके थाना परिसर के गेट के पास मौजूद थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि पंढरीनाथ चौराहे पर चार युवक एक व्यक्ति को रोककर बेसबॉल डंडे, सरिया और लात-घूसों से मारपीट कर रहे हैं।
पुलिस टीम जब बीच-बचाव करने पहुंची तो आरोपियों ने पुलिसकर्मियों पर भी हमला कर दिया। अभियोजन के अनुसार एक आरोपी ने उप निरीक्षक देवेन्द्र मरकाम के सिर पर बेसबॉल डंडे से हमला कर दिया। घटना के दौरान चौराहे पर ड्यूटी पर मौजूद आरक्षक राकेश भी मौके पर पहुंचे। आरोपियों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और झूमाझटकी भी की।
घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस की मदद करते हुए चारों आरोपियों को पकड़ लिया। घायल पुलिस अधिकारी को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।
घटना के बाद थाना पंढरीनाथ में आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान घटनास्थल का निरीक्षण, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य जुटाए गए। विवेचना पूरी होने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।
प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी अजय प्रताप सिंह बुदेला और सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी पंकज सिंह बघेल ने की।
करीब 16 वर्ष पुराने इस मामले में न्यायालय के फैसले को शासकीय कार्य में बाधा और पुलिस पर हमले के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
