“बांदकपुर धाम आस्था का केंद्र, श्रद्धालुओं की सुविधा से नहीं होगा कोई समझौता” – कलेक्टर प्रताप नारायण यादव
दमोह, 30 मई 2026। विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल बांदकपुर धाम के विकास कार्यों में हो रही देरी और निर्माण गुणवत्ता को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट कहा कि बांदकपुर धाम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान कलेक्टर ने पाया कि कॉरिडोर एवं अन्य विकास कार्यों को पूर्ण करने के लिए निर्धारित की गई 30 मई की समय-सीमा बीत जाने के बावजूद कई कार्य अधूरे पड़े हैं। इस पर उन्होंने संबंधित निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी करने तथा नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है बांदकपुर धाम
कलेक्टर श्री यादव ने कहा कि बांदकपुर धाम केवल दमोह जिले का ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश और देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। वर्षभर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि महाशिवरात्रि और सावन जैसे अवसरों पर लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर चल रहे विकास कार्यों में देरी से न केवल श्रद्धालुओं को असुविधा होती है बल्कि जिले की छवि भी प्रभावित होती है। इसलिए सभी संबंधित विभाग और एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करें।
श्रद्धालुओं को मिलें विश्वस्तरीय सुविधाएं
समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बांदकपुर धाम का विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे श्रद्धालु सुविधा केंद्रित परियोजना के रूप में विकसित किया जाए।
उन्होंने कहा कि धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन, बेहतर आवागमन, स्वच्छता, सुरक्षा, पार्किंग, पेयजल और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। कॉरिडोर का निर्माण ऐसा हो कि श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और अव्यवस्था से मुक्ति मिले तथा उनकी धार्मिक यात्रा सुखद और यादगार बने।
निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल, विशेष जांच टीम गठित होगी
बैठक के दौरान विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर प्राप्त शिकायतों पर भी गंभीर चर्चा हुई। कलेक्टर ने कार्यपालन यंत्री को निर्देशित किया कि एक विशेष तकनीकी टीम गठित कर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की विस्तृत जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन से किए जा रहे विकास कार्यों में गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, तकनीकी कमी या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों की अनदेखी बनी कई समस्याओं का कारण
समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया कि परियोजना की प्रारंभिक रूपरेखा तैयार करते समय स्थानीय नागरिकों, मंदिर समिति, वरिष्ठजनों एवं क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित लोगों के सुझावों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
कलेक्टर ने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल के विकास में स्थानीय समाज की भागीदारी अत्यंत आवश्यक होती है। स्थानीय लोगों के अनुभव और सुझाव कई संभावित समस्याओं का समाधान पहले ही कर सकते हैं। भविष्य में किसी भी परियोजना के निर्माण से पूर्व जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों की राय अवश्य ली जाए।
बांदकपुर को बनाया जाएगा धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि प्रशासन की मंशा बांदकपुर धाम को एक आदर्श धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की है। यहां ऐसा भव्य और आकर्षक परिसर विकसित किया जाएगा जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति के साथ आधुनिक सुविधाओं का भी अनुभव कराए।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन, मंदिर समिति, जनप्रतिनिधियों, स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं के सहयोग से बांदकपुर धाम आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा।
बैठक में रहे मौजूद
इस अवसर पर मंदिर समिति के पदाधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, एसडीएम, मंदिर प्रबंधक सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विकास कार्यों की प्रगति, सुविधाओं के विस्तार और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई
