करैरा। विद्युत चोरी के मामलों में न्यायालयों द्वारा लगातार सख्त रुख अपनाया जा रहा है। इसी क्रम में करैरा के विशेष सत्र न्यायालय ने बिजली चोरी के एक पुराने लेकिन महत्वपूर्ण प्रकरण में आरोपी को दोषी ठहराते हुए छह माह के सश्रम कारावास तथा 59,040 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी निर्धारित अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है तो उसे एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह फैसला न केवल विद्युत चोरी करने वालों के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी संपत्ति और सार्वजनिक संसाधनों की चोरी को लेकर कानून कितना गंभीर है। विद्युत विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों में न्यायालय द्वारा दिए गए कठोर निर्णय भविष्य में बिजली चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में सहायक सिद्ध होंगे।
खेत में चल रही थी अवैध मोटर
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम सिलारपुर निवासी शिवराम लोधी पुत्र बालिकराम लोधी को 17 फरवरी 2021 को विद्युत विभाग की जांच टीम ने रंगे हाथों पकड़ा था। जांच के दौरान पाया गया कि आरोपी अपने खेत में खड़ी फसल की सिंचाई के लिए 2 एचपी की मोटर सीधे एलटी लाइन से जोड़कर चला रहा था। आरोपी के पास इस उपयोग के लिए कोई वैध विद्युत कनेक्शन नहीं था।
विद्युत विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो यह स्पष्ट हुआ कि मोटर अवैध रूप से विद्युत लाइन से संचालित की जा रही थी। इस प्रकार की गतिविधि न केवल विभाग को आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि विद्युत वितरण व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
जांच दल ने तैयार किया पंचनामा
कार्रवाई के दौरान जांच दल में प्रभारी दीपक कुमार एवं लाइन स्टाफ योगेंद्र मिश्रा शामिल थे। टीम ने मौके पर आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई करते हुए पंचनामा तैयार किया और विद्युत ऊर्जा चोरी का आकलन किया। जांच के बाद आरोपी पर 24,782 रुपये का अंतरिम निर्धारण किया गया तथा नियमानुसार राशि जमा करने के निर्देश दिए गए।
हालांकि आरोपी द्वारा निर्धारित राशि जमा नहीं की गई, जिसके बाद विभाग ने मामले को न्यायालय में ले जाने का निर्णय लिया।
न्यायालय में चला मुकदमा
अंतरिम निर्धारण की राशि जमा न होने पर तत्कालीन कनिष्ठ यंत्री मनेंद्र सिंह ने आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य, निरीक्षण रिपोर्ट, पंचनामा एवं गवाहों के बयान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी तथ्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण किया। प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यह प्रमाणित पाया गया कि आरोपी द्वारा विद्युत ऊर्जा की चोरी की गई थी।
विद्युत अधिनियम के तहत दोषी करार
विशेष सत्र न्यायाधीश करैरा दिनेश कुमार खटीक ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों एवं गवाहों के परीक्षण के उपरांत आरोपी को विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135(1)(क) के तहत दोषी पाया। न्यायालय ने आरोपी को छह माह के सश्रम कारावास तथा 59,040 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
प्रकरण में विद्युत मंडल की ओर से अधिवक्ता एल.के. चतुर्वेदी ने प्रभावी पैरवी की।
बिजली चोरी के खिलाफ सख्त संदेश
न्यायालय के इस फैसले को बिजली चोरी के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण और सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विद्युत विभाग लंबे समय से बिजली चोरी रोकने के लिए विशेष अभियान चला रहा है। विभाग का कहना है कि बिजली चोरी से न केवल राजस्व की हानि होती है, बल्कि ईमानदारी से बिल भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं पर भी इसका अप्रत्यक्ष भार पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में दोषियों को मिलने वाली सजा और आर्थिक दंड से समाज में जागरूकता बढ़ेगी तथा अवैध विद्युत उपयोग की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा। न्यायालय का यह फैसला स्पष्ट करता है कि बिजली चोरी को किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
