सुभाष कॉलोनी से स्टॉप डैम तक किया पैदल निरीक्षण, नालों की सफाई, जल निकासी सुधार, छात्रावास व्यवस्थाओं और सफाई तंत्र को लेकर दिए सख्त निर्देश
(डॉ. एल. एन. वैष्णव)
दमोह। मानसून की दस्तक से पहले दमोह शहर की सबसे बड़ी और पुरानी समस्याओं में शामिल जलभराव, गंदगी और अव्यवस्थित जल निकासी व्यवस्था को लेकर प्रशासन सक्रिय नजर आया। रविवार सुबह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव स्वयं सुबह 7 बजे सड़कों पर उतरे और सुभाष कॉलोनी सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों का पैदल भ्रमण कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जलभराव, नालों की स्थिति, कचरा प्रबंधन, छात्रावास सुविधाओं, खेल परिसरों और नगर की स्वच्छता व्यवस्था का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
विशेष बात यह रही कि कलेक्टर ने केवल अधिकारियों से जानकारी लेने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि क्षेत्र के नागरिकों से सीधे चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं और सुझाव भी प्राप्त किए। इस दौरान लोगों ने वर्षों से चली आ रही जलभराव, गंदगी और विकास कार्यों में लापरवाही से जुड़ी समस्याओं को खुलकर रखा।
सुभाष कॉलोनी में हर साल बनते हैं बाढ़ जैसे हालात
सुभाष कॉलोनी उन क्षेत्रों में शामिल है जहां हर वर्ष बारिश के दौरान घरों में पानी भरने की शिकायतें सामने आती हैं। कई परिवारों को बरसात के दिनों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कॉलोनी के सामने बनी पुलिया में पानी निकासी के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है, जिसके कारण बारिश का पानी तेजी से निकल नहीं पाता और आसपास की बस्तियों में भर जाता है।
कलेक्टर ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिरिक्त पाइप लाइन डालकर जल निकासी की क्षमता बढ़ाई जाए और स्थायी समाधान की दिशा में तकनीकी प्रस्ताव तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसी समस्याओं को हर वर्ष अस्थायी उपायों से नहीं बल्कि दीर्घकालिक योजना बनाकर समाप्त किया जाना चाहिए।
नालों पर अतिक्रमण और सफाई की कमी बनी बड़ी समस्या
निरीक्षण के दौरान यह बात भी सामने आई कि शहर के कई प्रमुख नालों और नालियों की नियमित सफाई नहीं हो रही है। अनेक स्थानों पर अतिक्रमण और कचरे के कारण जल प्रवाह बाधित हो रहा है। यही स्थिति बरसात में जलभराव का प्रमुख कारण बनती है।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून शुरू होने से पहले सभी प्रमुख नालों की सफाई और गहरीकरण का कार्य पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में बारिश के दौरान नागरिकों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
नगर पालिका द्वारा संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाए जाने पर प्रशासन ने निजी क्षेत्र के सहयोग से मशीनरी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है, जिससे सफाई और गहरीकरण कार्य में तेजी लाई जा सके।
स्टॉप डैम की खामियों से बढ़ रहा बैक वॉटर का खतरा
बीज निगम क्षेत्र में स्थित स्टॉप डैम का निरीक्षण करते समय कलेक्टर ने पाया कि पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए ढांचे का अपेक्षित उपयोग नहीं हो रहा है। इससे बैक वॉटर का दबाव बढ़ता है और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति निर्मित होती है।
उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं और जल निकासी की प्राकृतिक व्यवस्था को बाधित करने वाले सभी अवरोध हटाए जाएं।
खुले में कचरा फेंकने पर जताई नाराजगी
सागर-दमोह रोड स्थित मंडी क्षेत्र में खुले में कचरा डाले जाने की स्थिति पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान केवल कागजों में नहीं बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने मंडी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कचरा केवल निर्धारित डंपिंग स्थल पर ही डाला जाए तथा वर्तमान में जमा कचरे को तत्काल हटाया जाए। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि शहर को गंदगी मुक्त बनाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
छात्रावास की समस्याओं ने भी खींचा ध्यान
पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास के निरीक्षण के दौरान छात्रों ने कलेक्टर को बताया कि बरसात के दिनों में उनके कमरों में डेढ़ से दो फीट तक पानी भर जाता है। यह जानकारी सामने आने के बाद कलेक्टर ने अधिकारियों को तत्काल समाधान के लिए योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने छात्रावास में पेयजल, भोजन और अन्य सुविधाओं की भी समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान भोजन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे, जिस पर कलेक्टर ने गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्रों को बेहतर वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
शहर की सफाई व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव
कलेक्टर ने बताया कि शहर में कार्यरत लगभग 300 सफाई मित्रों की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित किया जाएगा। उनके कार्यक्षेत्र, ड्यूटी समय और निगरानी प्रणाली को तकनीकी आधार पर पुनर्गठित किया जाएगा ताकि सफाई कार्य की जवाबदेही तय हो सके।
प्रशासन का मानना है कि यदि सफाई व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तो शहर की तस्वीर काफी हद तक बदली जा सकती है।
बंद पड़ी सरकारी संपत्तियों के उपयोग पर जोर
निरीक्षण के दौरान एसपीएम नगर खेल परिसर, इंडोर स्टेडियम और नगरपालिका के खंडे स्कूल भवन का भी जायजा लिया गया। कलेक्टर ने कहा कि वर्षों से अनुपयोगी पड़ी सरकारी परिसंपत्तियों को जनहित में उपयोग करने की आवश्यकता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खेल परिसर को पुनः सक्रिय करने तथा स्कूल परिसर को अतिक्रमण मुक्त कर सुरक्षित रखने की कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही नगरपालिका की आय बढ़ाने के लिए उपलब्ध भूमि के बेहतर उपयोग की संभावनाएं भी तलाशने को कहा।
कलेक्टर की सक्रियता से जगी उम्मीद
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव का सुबह-सुबह स्वयं क्षेत्र में पहुंचकर पैदल निरीक्षण करना आम नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद किसी वरिष्ठ अधिकारी ने जमीनी स्तर पर जाकर समस्याओं को समझने का प्रयास किया है।
क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई कि इस बार केवल निर्देश जारी करने तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए ठोस और स्थायी कार्रवाई भी दिखाई देगी।
लेकिन वर्षों की लापरवाही पर भी उठ रहे सवाल
जहां एक ओर कलेक्टर की सक्रियता की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर नगर की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में जल निकासी, नाला निर्माण, सफाई और विकास कार्यों के नाम पर पिछले कई वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन आज भी हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा।
नगर के जानकारों का कहना है कि यदि हर वर्ष मानसून से पहले प्रशासन को आपातकालीन तैयारियां करनी पड़ रही हैं, तो यह पूर्व में किए गए कार्यों की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जलभराव की समस्या क्यों बनी हुई है, इसका जवाब जनता जानना चाहती है।
जवाबदेही तय करने की मांग
नागरिकों का मानना है कि केवल निरीक्षण और निर्देशों से समस्या का समाधान नहीं होगा। वर्षों से लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय करना भी उतना ही आवश्यक है।
सूत्रों के अनुसार नगर पालिका से जुड़े पुराने वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से भी लोगों में असंतोष है। नागरिकों का कहना है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और खर्च हुई राशि की निष्पक्ष जांच समय की मांग है।
अब निगाहें अमल पर
फिलहाल शहरवासियों को उम्मीद है कि कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देश धरातल पर भी दिखाई देंगे। मानसून आने में अब बहुत कम समय बचा है और ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन निर्देशों को समय पर क्रियान्वित करने की है।
यदि नालों की सफाई, अतिक्रमण हटाने, जल निकासी सुधारने और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने का कार्य समय पर पूरा हो गया तो हजारों नागरिकों को राहत मिल सकती है। अन्यथा इस वर्ष भी बारिश के साथ जलभराव, गंदगी और अव्यवस्था की वही पुरानी तस्वीरें सामने आ सकती हैं, जिनसे दमोह के नागरिक वर्षों से जूझते आ रहे हैं।
