दो आरोपी भोपाल से गिरफ्तार, 45 लाख की संपत्ति जब्त; लग्जरी कारें और लाखों की नकदी बरामद

दमोह। जिले के चर्चित संजीवनी अस्पताल फर्जी डॉक्टर भर्ती प्रकरण में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस ने जांच के दौरान दो आरोपियों को भोपाल से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से तीन लग्जरी वाहन और 5 लाख 36 हजार 900 रुपये नकद सहित लगभग 45 लाख रुपये का मशरूका जब्त किया गया है।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई अपराध क्रमांक 479/26 एवं 480/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(3), 338, 336(3) एवं 340(2) के अंतर्गत की गई है। यह मामला राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टरों की भर्ती से जुड़ा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीएमएचओ जांच रिपोर्ट के बाद खुला मामला
जानकारी के अनुसार 16 मई 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय से पुलिस को जांच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ था। जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि डॉ. कुमार सचिन यादव निवासी ग्वालियर एवं डॉ. राजपाल गौर निवासी सीहोर की नियुक्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कराई गई थी।
रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच प्रारंभ की। तकनीकी साक्ष्यों, दस्तावेजों और अन्य जानकारियों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की पुष्टि होने पर आरोपियों की तलाश शुरू की गई।
भोपाल से दबोचे गए आरोपी
जांच के दौरान पुलिस ने मामले में संलिप्त पाए गए दो आरोपियों को भोपाल से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में:
- हीरा सिंह कौशल (44 वर्ष) पिता रामप्रकाश कौशल, निवासी कोहेफिजा, भोपाल
- आदिल सिद्दीकी (37 वर्ष) पिता स्वर्गीय अफजल सिद्दीकी, निवासी बाग दिल खुश, भोपाल
शामिल हैं।
पुलिस का मानना है कि दोनों आरोपी फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने और संबंधित व्यक्तियों को नियुक्ति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
तीन लग्जरी कारें और लाखों की नकदी जब्त
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में संपत्ति जब्त की है। जब्त सामग्री में शामिल हैं—
- काले रंग की महिंद्रा थार (एमपी 04 जेडके 0111) – अनुमानित कीमत 15 लाख रुपये
- सफेद रंग की ह्युंडई आई-20 (एमपी 04 वाईक्यू 4623) – अनुमानित कीमत 10 लाख रुपये
- सफेद रंग की महिंद्रा स्कॉर्पियो (एमपी 04 जेडवाई 6569) – अनुमानित कीमत 15 लाख रुपये
- नकद 5,36,900 रुपये
इस प्रकार कुल जब्त मशरूका लगभग 45 लाख रुपये का बताया गया है।
स्वास्थ्य विभाग में फर्जीवाड़े की आशंका, जांच जारी
सूत्रों के अनुसार यह मामला केवल दो नियुक्तियों तक सीमित नहीं हो सकता। पुलिस और संबंधित विभाग इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि कहीं भर्ती प्रक्रिया में कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था। जांच एजेंसियां दस्तावेजों की सत्यता, नियुक्ति प्रक्रिया और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
मामले ने स्वास्थ्य विभाग में नियुक्तियों की प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक मनीष कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अहम भूमिका निभाई। कार्रवाई में उपनिरीक्षक नीतेश जैन, प्रधान आरक्षक सौरभ टंडन (साइबर सेल), प्रधान आरक्षक राकेश अठ्या (साइबर सेल), प्रधान आरक्षक अजीत दुबे, प्रधान आरक्षक हेमंत अवस्थी, प्रधान आरक्षक अभिषेक चौबे, आरक्षक ओमप्रकाश रैकवार, आरक्षक आयुष मिश्रा एवं आरक्षक नवल यादव का विशेष योगदान रहा।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और जल्द ही इससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण खुलासे भी सामने आ सकते हैं।
