एफआईआर की पुनर्जांच की मांग, शिक्षकों ने कहा— निर्दोष शिक्षक पर कार्रवाई से टूट रहा मनोबल
दमोह। जिले के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में पदस्थ भौतिक शास्त्र के शिक्षक आदित्य चौरसिया के विरुद्ध दर्ज एफआईआर के विरोध में मंगलवार को मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे। शिक्षकों ने कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष पुनर्जांच कराने तथा दर्ज एफआईआर को निरस्त किए जाने की मांग की। इस दौरान शिक्षक समुदाय ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो मामला प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर व्यापक आंदोलन भी किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे शिक्षकों का कहना था कि आदित्य चौरसिया जिले के प्रतिष्ठित एवं परिणामोन्मुख शिक्षकों में शामिल हैं। उन्होंने वर्षों से उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम दिए हैं और विद्यार्थियों के बीच उनकी छवि एक अनुशासित एवं समर्पित शिक्षक की रही है। शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि आदित्य चौरसिया के खिलाफ शिकायत करने वाला छात्र उनकी ही कक्षा का विद्यार्थी है, जो लंबे समय से अनुशासनहीन गतिविधियों में संलिप्त रहा है और पढ़ाई में भी अपेक्षित रुचि नहीं लेता था।
जांचों में निर्दोष पाए जाने का दावा
शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि संबंधित छात्र द्वारा पिछले लगभग एक वर्ष से विभिन्न स्तरों पर शिकायतें की जा रही हैं। शिकायतें कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी सहित मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेजी गईं। इन शिकायतों के आधार पर कई बार जांच कराई गई। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित जांच समितियों ने विद्यालय पहुंचकर शिक्षकों, विद्यार्थियों और अन्य संबंधित पक्षों के बयान लिए।
शिक्षक संघ का दावा है कि सभी जांचों में आदित्य चौरसिया के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं हुए और उन्हें निर्दोष पाया गया। इसके बावजूद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने से शिक्षक समुदाय में गहरा आक्रोश व्याप्त है। संघ का कहना है कि जब जांचों में कोई गंभीर तथ्य सामने नहीं आए, तब एफआईआर दर्ज किए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार होना चाहिए।
अनुशासन बनाए रखने को लेकर उठा विवाद
शिक्षक प्रतिनिधियों के अनुसार विद्यालयों में सैकड़ों विद्यार्थी अध्ययन करते हैं और शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल पढ़ाना ही नहीं, बल्कि अनुशासन बनाए रखना भी होती है। उनका कहना है कि संबंधित छात्र को कई बार समझाइश दी गई थी ताकि वह पढ़ाई पर ध्यान दे और कक्षा का वातावरण प्रभावित न हो। इसी दौरान शिक्षक और छात्र के बीच विवाद की स्थिति बनी, जिसके बाद शिकायतों का सिलसिला शुरू हुआ।
शिक्षक संघ का आरोप है कि कक्षा में अनुशासन बनाए रखने के प्रयास को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और व्यक्तिगत नाराजगी के चलते शिक्षक के खिलाफ लगातार शिकायतें की गईं। संघ ने कहा कि यदि शिक्षकों द्वारा अनुशासनात्मक समझाइश देने को भी अपराध की तरह देखा जाएगा तो विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होगा।
शिक्षकों में भय और असुरक्षा का माहौल
ज्ञापन में कहा गया कि इस प्रकार की कार्रवाई से पूरे शिक्षक समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है। शिक्षकों का कहना है कि यदि जांच में निर्दोष पाए जाने के बाद भी किसी शिक्षक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है, तो अन्य शिक्षक भी विद्यार्थियों को अनुशासित करने या उनकी शैक्षणिक प्रगति के लिए आवश्यक हस्तक्षेप करने से बचेंगे।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि विद्यालयों में अनुशासन और गुणवत्ता युक्त शिक्षा दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि शिक्षक भय के वातावरण में कार्य करेंगे तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ेगा। विशेष रूप से उन मेधावी विद्यार्थियों को नुकसान होगा जो बेहतर शैक्षणिक वातावरण की अपेक्षा रखते हैं।
प्रशासन से निष्पक्ष पुनर्जांच की मांग
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की पुनः निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच के निष्कर्षों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाए। संघ का कहना है कि यदि पूर्व में हुई जांचों में शिक्षक निर्दोष पाए गए हैं तो इस तथ्य को भी गंभीरता से ध्यान में रखा जाना चाहिए।
शिक्षकों ने यह भी कहा कि पूरे मामले की वस्तुनिष्ठ जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बना रहे।
प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
शिक्षक प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि यदि ज्ञापन के बाद भी मामले की पुनर्जांच नहीं कराई जाती और एफआईआर को लेकर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, तो मध्य प्रदेश शिक्षक संघ इस मुद्दे को प्रदेश स्तर पर उठाएगा। इसके तहत मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी उचित कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे मध्य प्रदेश के शिक्षक एकजुट होकर व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल एक शिक्षक का मामला नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय के सम्मान, सुरक्षा और मनोबल से जुड़ा विषय है।
