सितंबर 2026 से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होने की संभावना, 600 बिस्तरों का अत्याधुनिक अस्पताल और 800 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा
(डॉ. एल. एन. वैष्णव)
दमोह, 4 जून। बुंदेलखंड अंचल में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन की आधारशिला साबित होने जा रहा दमोह का नव निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। लगभग 350 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का गुरुवार को कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने विस्तृत निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने निर्माण एजेंसी, लोक निर्माण विभाग एवं संबंधित अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी प्राप्त की तथा शेष कार्यों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने मेडिकल कॉलेज परिसर, अस्पताल भवन, छात्रावास, शैक्षणिक ब्लॉक, प्रशासनिक भवन तथा अन्य अधोसंरचनात्मक सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना दमोह जिले के लिए ही नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी।
अंतिम चरण में पहुंचा निर्माण कार्य

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और अधिकांश संरचनात्मक कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। वर्तमान में आंतरिक साज-सज्जा, विद्युत व्यवस्था, जलापूर्ति, फर्नीचर स्थापना, सड़क निर्माण, लैंडस्केपिंग एवं अन्य तकनीकी कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
बताया गया कि यदि कार्य निर्धारित गति से चलता रहा तो जून माह के अंत तक भवन पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इसके बाद मेडिकल काउंसिल और संबंधित विभागों की औपचारिक प्रक्रियाएं पूर्ण कर कॉलेज को संचालन के लिए तैयार किया जाएगा।
पहले सत्र में 150 विद्यार्थियों को मिलेगा प्रवेश
दमोह मेडिकल कॉलेज में प्रथम शैक्षणिक सत्र से 150 छात्र-छात्राओं को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश दिए जाने की योजना है। इससे दमोह सहित सागर, छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़ और आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल कॉलेज के संचालन से क्षेत्र के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा तथा स्थानीय प्रतिभाओं को अपने ही क्षेत्र में उच्च शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी।
600 बिस्तरों वाला आधुनिक अस्पताल बनेगा वरदान
मेडिकल कॉलेज परिसर में लगभग 600 बिस्तरों की क्षमता वाला अत्याधुनिक शिक्षण अस्पताल भी विकसित किया जा रहा है। अस्पताल में विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सा विभाग, ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू, आपातकालीन सेवाएं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाइयां तथा आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
अस्पताल के प्रारंभ होने के बाद दमोह जिले के नागरिकों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए जबलपुर, भोपाल, सागर या अन्य बड़े शहरों का रुख कम करना पड़ेगा। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी तथा स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
छात्र-छात्राओं के लिए अत्याधुनिक छात्रावास
मेडिकल कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त छात्रावासों का निर्माण किया गया है। अधिकारियों के अनुसार यहां 400 छात्र और 400 छात्राओं के रहने की व्यवस्था की गई है।
छात्रावासों में अध्ययन कक्ष, पुस्तकालय, भोजनालय, खेल सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
नर्सिंग शिक्षा को भी मिलेगा बढ़ावा
मेडिकल कॉलेज परिसर में नर्सिंग शिक्षा एवं प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की जा रही है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ तैयार होगा और चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल कॉलेज के साथ नर्सिंग शिक्षा के विस्तार से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं में आएगा बड़ा बदलाव
दमोह जिले में लंबे समय से मेडिकल कॉलेज की मांग की जा रही थी। अब यह सपना साकार होने के करीब है। मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद न केवल चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा बल्कि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी, आधुनिक उपचार सुविधाएं विकसित होंगी और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को भी बेहतर चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिलेगा।
कलेक्टर ने दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जिले के भविष्य से जुड़ी है, इसलिए सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप और समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं।
उन्होंने परिसर में स्वच्छता, सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था, पेयजल, सड़क संपर्क, पार्किंग और अन्य मूलभूत सुविधाओं को भी प्राथमिकता के साथ विकसित करने के निर्देश दिए।
रोजगार और विकास के नए अवसर
मेडिकल कॉलेज के संचालन से जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अनेक अवसर पैदा होंगे। डॉक्टर, नर्स, तकनीकी कर्मचारी, प्रशासनिक स्टाफ तथा अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। साथ ही होटल, परिवहन, किराए के आवास और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
सितंबर 2026 से शैक्षणिक गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद
अधिकारियों के अनुसार सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समय पर पूरी होने पर सितंबर 2026 से मेडिकल कॉलेज में शैक्षणिक गतिविधियां प्रारंभ होने की संभावना है। इसके साथ ही दमोह प्रदेश के उन चुनिंदा जिलों में शामिल हो जाएगा जहां आधुनिक चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का समेकित केंद्र उपलब्ध होगा।
