डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति और पर्यावरण संरक्षण गतिविधि की पहल, घर-घर पहुंचकर जागरूक करेंगे स्वयंसेवक

इंदौर। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और लगातार गिरते भूजल स्तर के बीच जल संरक्षण आज देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है। आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने तथा भूजल स्तर को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति, इंदौर एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पर्यावरण संरक्षण गतिविधि ने एक व्यापक जनजागरण अभियान प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। इस अभियान के माध्यम से वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) और भूजल पुनर्भरण के प्रति समाज को जागरूक किया जाएगा तथा लोगों को अपने घरों और संस्थानों में जल संरक्षण की व्यवस्थाएं विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इसी उद्देश्य को लेकर शनिवार को सुदर्शन भवन, पंत वैद्य कॉलोनी, इंदौर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पर्यावरण संरक्षण गतिविधि की इंदौर विभाग टोली, जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञों, तकनीकी संस्थाओं, इंजीनियरों तथा सेवा प्रदाताओं ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल संचयन को लेकर एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करना और इसे जनभागीदारी का अभियान बनाना था।
इंदौर वाटर रिचार्ज मिशन को मिलेगी नई गति
डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के सचिव राकेश कुमार यादव ने बताया कि यह अभियान “इंदौर वाटर रिचार्ज मिशन” के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। मिशन का उद्देश्य केवल वर्षा जल को सहेजना ही नहीं, बल्कि भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपायों को आमजन तक पहुंचाना भी है।
उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण जल संकट की स्थिति गंभीर होती जा रही है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में पेयजल की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन सकती है। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को जल संरक्षण के इस अभियान से जोड़ना आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने साझा की तकनीकी जानकारी
बैठक में जल संरक्षण विशेषज्ञों ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग की विभिन्न प्रणालियों, भूजल पुनर्भरण संरचनाओं और उनकी तकनीकी बारीकियों पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि सामान्य नागरिक भी अपने घरों, विद्यालयों, कार्यालयों, धार्मिक स्थलों और व्यावसायिक भवनों में वर्षा जल संचयन की सरल व्यवस्थाएं विकसित कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्षा जल को सीधे भूजल स्तर में पहुंचाने के लिए रिचार्ज पिट, सोख्ता गड्ढे, रिचार्ज वेल और फिल्टर सिस्टम जैसे उपाय अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं। इससे न केवल जल का संरक्षण होगा बल्कि भूजल स्तर में भी सुधार आएगा।
घर-घर पहुंचेंगे स्वयंसेवक
बैठक में निर्णय लिया गया कि संघ के स्वयंसेवक और पर्यावरण संरक्षण गतिविधि से जुड़े कार्यकर्ता घर-घर जाकर नागरिकों को जल संरक्षण के महत्व से अवगत कराएंगे। उन्हें बताया जाएगा कि वर्षा जल का संचयन किस प्रकार किया जा सकता है तथा इससे परिवार, समाज और पर्यावरण को क्या लाभ मिल सकते हैं।
अभियान के तहत कॉलोनियों, आवासीय परिसरों, विद्यालयों, सामाजिक संगठनों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही लोगों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी बनाई जाएगी ताकि वे आसानी से अपने भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित कर सकें।
जल संरक्षण को बनाना होगा जनआंदोलन
बैठक में उपस्थित सभी विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जब तक नागरिक स्वयं जल बचाने और वर्षा जल संचयन को अपनी जीवनशैली का हिस्सा नहीं बनाएंगे, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।
इस अवसर पर जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार स्वच्छता अभियान में जनभागीदारी ने सफलता दिलाई, उसी प्रकार जल संरक्षण के क्षेत्र में भी सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए जरूरी है जल संरक्षण
बैठक में इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की गई कि वर्तमान पीढ़ी यदि जल संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं हुई तो भविष्य में जल संकट और गहरा सकता है। इसलिए वर्षा जल संचयन को केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।
डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति और पर्यावरण संरक्षण गतिविधि द्वारा शुरू किया जा रहा यह अभियान न केवल इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायी पहल माना जा रहा है। इससे समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और भूजल स्तर को समृद्ध बनाने की दिशा में ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद है।
