टाइगर रिजर्व क्षेत्र के गांवों का दौरा, 10 जून को लगेगा विशेष शिविर, दो माह में निराकरण का भरोसा
दमोह, 06 जून 2026। वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में चल रही विस्थापन प्रक्रिया के बीच शनिवार को कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ग्रामीणों के बीच पहुंचे और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। ग्राम दुधिया रैयत, सिंहपुरी और उन्हारी खेड़ा के भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी भी पात्र व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा तथा सभी समस्याओं का समयबद्ध निराकरण किया जाएगा।
सुबह 6 बजे जिला मुख्यालय से रवाना होकर कलेक्टर सीधे प्रभावित गांवों में पहुंचे। उनके साथ वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के वनमंडलाधिकारी रजनीश कुमार सिंह सहित वन एवं राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने मुआवजा, विस्थापन, पात्रता और अन्य लंबित मामलों को लेकर अपनी समस्याएं रखीं, जिन पर कलेक्टर ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
कलेक्टर श्री यादव ने कहा कि ग्राम उन्हारी खेड़ा में 10 जून को विशेष शिविर आयोजित किया जाएगा, जहां वन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर मौके पर निराकरण की प्रक्रिया प्रारंभ करेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षेत्र के सभी लंबित प्रकरणों का निराकरण आगामी दो माह के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
दौरे के दौरान ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों का कहना था कि पहली बार कोई कलेक्टर उनके गांव पहुंचा है और सीधे उनकी समस्याएं सुन रहा है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास और उम्मीद बढ़ी है।
वनमंडलाधिकारी रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के अंतर्गत कुल 93 गांव तीन जिलों में आते हैं, जिनमें से 24 गांव दमोह जिले में स्थित हैं। कुछ गांवों का विस्थापन पूर्ण हो चुका है, जबकि कई गांवों में प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप विस्थापन से जुड़ी सभी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
ग्रामीण इमरत लाल ने कहा कि कलेक्टर और डीएफओ का गांव में पहुंचना उनके लिए बड़ी बात है। वहीं सेवानिवृत्त सैनिक जगभान पाराशर ने कहा कि वर्षों से लंबित समस्याओं को लेकर ग्रामीण चिंतित थे, लेकिन अब प्रशासन द्वारा सीधे संवाद स्थापित किए जाने से समाधान की उम्मीद जगी है।
ग्रामीणों और प्रशासन के बीच हुए इस संवाद ने क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बनाया है। अब सभी की निगाहें 10 जून को आयोजित होने वाले विशेष शिविर और आगामी दो माह में होने वाले निराकरण पर टिकी हैं।
