पीड़ित परिवार को आर्थिक राहत और रोजगार की मांग पर सकारात्मक संकेत, आंदोलन फिलहाल स्थगित
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठे सवाल, दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज
प्रेस वार्ता में संगठन पदाधिकारियों ने कहा— एक श्रमिक की जान की कीमत केवल सहायता राशि नहीं
दमोह/विद्युत विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी स्वर्गीय ओमकार कुशवाहा की करंट लगने से हुई मृत्यु के मामले ने अब जिले में जनचर्चा और सामाजिक आंदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया है। घटना के बाद पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सम्राट अशोक क्रांति सेना एवं समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों ने मोर्चा संभाल लिया है। प्रशासन द्वारा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिए जाने के बाद 12 जून को प्रस्तावित कलेक्ट्रेट घेराव और आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है, लेकिन संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समयसीमा में मांगों पर अमल नहीं हुआ तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
प्रेस वार्ता में उठी न्याय की मांग
दमोह में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सम्राट अशोक क्रांति सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं समाजवादी पार्टी युवजन सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष योगेंद्र कुशवाहा ने कहा कि ओमकार कुशवाहा की मृत्यु केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना है। उन्होंने कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, संगठन संघर्ष जारी रखेगा।
योगेंद्र कुशवाहा ने बताया कि घटना के बाद संगठन लगातार प्रशासन और विद्युत विभाग के अधिकारियों के संपर्क में रहा। कई दौर की चर्चाओं और ज्ञापनों के बाद प्रशासन ने पीड़ित परिवार को सात दिवस के भीतर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। इसी आश्वासन के आधार पर फिलहाल आंदोलन स्थगित किया गया है।
उन्होंने कहा कि संगठन प्रशासन को पर्याप्त समय देना चाहता है, लेकिन यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं हुई तो फिर आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा।
“एक जीवन की कीमत केवल 9 लाख रुपये नहीं हो सकती”
प्रेस वार्ता के दौरान योगेंद्र कुशवाहा ने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद दी जाने वाली सामान्य सहायता राशि उस परिवार के दर्द और भविष्य की चुनौतियों की भरपाई नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय ओमकार कुशवाहा अपने परिवार के मुख्य आधार थे और उनकी असमय मृत्यु ने पूरे परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया है।
उन्होंने कहा कि संगठन की प्रमुख मांगों में पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा, परिवार के एक योग्य सदस्य को शासकीय नौकरी, तथा घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई शामिल है।
विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
घटना के बाद विद्युत विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि विद्युत कार्य अत्यंत जोखिमपूर्ण होता है और ऐसे कार्यों में लगे कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और निगरानी उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार आउटसोर्स कर्मचारियों से सीमित संसाधनों और सुरक्षा इंतजामों के बिना जोखिमपूर्ण कार्य करवाए जाते हैं, जिसके कारण ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। संगठन ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने और सुरक्षा मानकों की समीक्षा की मांग की है।
परिवार को न्याय दिलाने के लिए एकजुट हुए संगठन
प्रेस वार्ता में उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक परिवार की सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के हजारों श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। यदि इस मामले में उदाहरण प्रस्तुत नहीं किया गया तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि जोखिमपूर्ण कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए प्रभावी सुरक्षा नीति लागू हो तथा दुर्घटना की स्थिति में पीड़ित परिवार को तत्काल राहत मिले।
समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन
संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासनों पर यदि निर्धारित समय में अमल नहीं हुआ तो जिलेभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके तहत धरना-प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट घेराव, जनजागरण अभियान तथा अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
योगेंद्र कुशवाहा ने कहा कि संगठन संघर्ष से पीछे हटने वाला नहीं है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।
प्रेस वार्ता में रहे ये प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित
प्रेस वार्ता में सम्राट अशोक क्रांति सेना के जिला अध्यक्ष मोहन कुशवाहा, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष साधना कुशवाहा, कार्यकारी जिला अध्यक्ष चाहत कुशवाहा, जिला सचिव रेनू कुशवाहा, मीडिया प्रभारी गोविंद कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि स्वर्गीय ओमकार कुशवाहा के परिवार को न्याय दिलाने और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संगठन निरंतर संघर्ष करेगा।
प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में जिलेवासियों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि पीड़ित परिवार को शीघ्र सहायता राशि उपलब्ध होती है और अन्य मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो मामला शांत हो सकता है। लेकिन यदि आश्वासन केवल कागजों तक सीमित रहे तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
एक ओर जहां परिवार अपने प्रिय सदस्य को खोने के दुख से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर पूरा समाज यह अपेक्षा कर रहा है कि इस घटना से सबक लेते हुए श्रमिक सुरक्षा और जवाबदेही की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
