दमोह, 24 जून 2026/वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर बुधवार को दमोह जिले के सिंग्रामपुर में आयोजित भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम में उनके अद्वितीय शौर्य, त्याग, राष्ट्रभक्ति और आदिवासी गौरव को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में केंद्रीय एवं प्रदेश सरकार के अनेक वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा रानी दुर्गावती के जीवन और आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि इतिहास में पहली बार महिलाओं को संगठित कर सैन्य प्रशिक्षण देने और उन्हें आत्मरक्षा व राष्ट्ररक्षा के लिए तैयार करने का कार्य वीरांगना रानी दुर्गावती ने किया था। उन्होंने महिलाओं को केवल सम्मान ही नहीं दिलाया, बल्कि उन्हें शासन और सुरक्षा व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान की।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना, लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्मी और लखपति दीदी जैसी योजनाओं ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान की है।
श्री उइके ने कहा कि देश की आदिवासी बेटी द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति पद तक पहुंचना करोड़ों आदिवासियों के सम्मान और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि हिंदी का “भारत माता की जय”, संस्कृत का “वंदे मातरम्” और गोंडी भाषा का “धरती दायिना सेवा-सेवा” एक ही भाव को व्यक्त करते हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश के आदिम जाति कल्याण एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री कुँवर विजय शाह ने कहा कि आदिवासी युवाओं को प्रशासनिक और न्यायिक सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराने के लिए जबलपुर में विशेष आवासीय प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। आगामी 15 अगस्त से आईएएस सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग सेंटर प्रारंभ होगा, जहां विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास, भोजन और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि क्लैट परीक्षा की तैयारी के लिए भी विशेष आवासीय प्रशिक्षण व्यवस्था की जाएगी। इसके तहत 50 छात्राओं और 50 छात्रों का चयन कर दो वर्षों तक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे न्यायिक और विधिक क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकें।
श्री शाह ने कहा कि प्रदेश सरकार आदिवासी संस्कृति और गौरव के संरक्षण के लिए ‘रानी दुर्गावती लोक’ की स्थापना की दिशा में कार्य कर रही है। यह परियोजना रानी दुर्गावती के शौर्य, त्याग और आदिवासी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
उन्होंने ग्राम चौरई स्थित बड़ा देव मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष पांच दिवसीय मेले के आयोजन हेतु 30 लाख रुपये की स्वीकृति की घोषणा की। साथ ही प्रियांशी भलावी की कलामंडली के सदस्यों को पांच-पांच हजार रुपये तथा प्रियांशी भलावी को 21 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा भी की। इस अवसर पर आदिवासी संग्रहालय स्थापित करने की भी घोषणा की गई।
प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा कि रानी दुर्गावती ने मुगल आक्रांताओं के सामने कभी सिर नहीं झुकाया और अंतिम क्षण तक मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहीं। उनका जीवन त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की ऐसी मिसाल है जो सदैव समाज को प्रेरित करती रहेगी।
उन्होंने कहा कि सिंगौरगढ़ क्षेत्र, जो कभी रानी दुर्गावती की राजधानी रहा, उससे जुड़ा होना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। वीरांगना की स्मृतियों को संजोना और उनके शौर्य की गाथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सिंगौरगढ़ क्षेत्र के विकास के लिए की गई विभिन्न घोषणाओं का भी उल्लेख किया। बताया गया कि वर्ष 2024 में प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक भी ऐतिहासिक सिंगौरगढ़ क्षेत्र में आयोजित की गई थी, जिससे इस क्षेत्र को नई पहचान मिली।
मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि रानी दुर्गावती केवल एक वीरांगना नहीं बल्कि साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति की अमर प्रतीक हैं। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमुदाय ने वीरांगना रानी दुर्गावती के आदर्शों को आत्मसात कर समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
