मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और परिवार पर लगे आरोप निराधार, तथ्यों को तोड़-मरोड़कर किया गया प्रचार : राज्य मंत्री लखन पटेल
दमोह /मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं उनके परिवार की संपत्तियों और भूमि खरीद-फरोख्त को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक आरोपों के बीच प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री लखन पटेल ने मुख्यमंत्री का पक्ष रखते हुए कहा है कि उपलब्ध दस्तावेजों और सार्वजनिक अभिलेखों के आधार पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं।
राज्य मंत्री लखन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विरुद्ध भ्रम फैलाने के लिए तथ्यों को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार की अधिकांश कृषि भूमि मुख्यमंत्री बनने से पहले ही खरीदी जा चुकी थी तथा इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या हितों के टकराव का मामला नहीं बनता।
उन्होंने बताया कि नवंबर 2023 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्वामित्व एवं अधिपत्य की कुल कृषि भूमि 17.967 एकड़ थी, जो जून 2026 में भी लगभग समान स्थिति में 17.967 एकड़ ही है। इसी प्रकार उनकी पत्नी श्रीमती सीमा यादव के पास नवंबर 2023 में 12.287 एकड़ कृषि भूमि थी, जो जून 2026 में 12.292 एकड़ दर्ज है। अधिकांश भूमि वर्ष 2008 से 2019 के बीच खरीदी गई थी, जो उनके मुख्यमंत्री बनने से काफी पहले की अवधि है।
राज्य मंत्री ने उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें सिद्धि विनायक ट्रेडकॉन प्राइवेट लिमिटेड को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह कंपनी वर्ष 2008 में कृषि कार्यों के लिए स्थापित की गई थी। डॉ. मोहन यादव और श्रीमती सीमा यादव वर्ष 2017 में ही कंपनी के निदेशक पद से अलग हो चुके थे तथा मार्च 2026 में अपने सभी शेयर भी त्याग चुके हैं। कंपनी के पास नवंबर 2023 में 68.43 एकड़ भूमि थी, जो जून 2026 में घटकर 65.69 एकड़ रह गई है।
लखन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव यादव द्वारा खरीदी गई भूमि भी मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने से पहले खरीदी गई थी। ग्राम नानाखेड़ी में वर्ष 2019 से मार्च 2023 के बीच 16.38 एकड़ कृषि भूमि का क्रय किया गया था। यह खरीद उज्जैन मास्टर प्लान-2035 लागू होने से पहले की गई थी, इसलिए इसे किसी सरकारी निर्णय से जोड़ना अनुचित है।
उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री की पुत्रवधू श्रीमती प्रांजलि यादव द्वारा वर्ष 2025 में ग्राम गांधीनगर क्षेत्र में खरीदी गई लगभग 10 एकड़ भूमि कृषि भूमि है और यह किसी विकसित या व्यावसायिक क्षेत्र की श्रेणी में नहीं आती। ऐसे में भूमि मूल्य वृद्धि या विशेष लाभ मिलने के आरोपों का कोई आधार नहीं है।
राज्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदार स्वतंत्र व्यक्ति हैं और वे अपने-अपने व्यवसाय एवं आर्थिक गतिविधियों का संचालन स्वयं करते हैं। किसी रिश्तेदार के निजी व्यवसाय या लेन-देन को सीधे मुख्यमंत्री से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से गलत और अनुचित है।
उन्होंने उज्जैन मास्टर प्लान-2035 को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मास्टर प्लान मई 2023 में ही प्रभावी हो चुका था, जबकि डॉ. मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसलिए सड़क, हाईवे या विकास परियोजनाओं को मुख्यमंत्री बनने के बाद विशेष रूप से प्रभावित कराने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। सभी विकास कार्य पूर्व निर्धारित मास्टर प्लान और नियमानुसार संचालित हो रहे हैं।
राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संपत्तियों और आय का पूरा विवरण विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान प्रस्तुत शपथ पत्र में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। ऐसे में पद के दुरुपयोग, हितों के टकराव या किसी प्रकार के अनुचित लाभ के आरोपों को तथ्यों का समर्थन प्राप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए मुख्यमंत्री और उनके परिवार की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और सार्वजनिक तथ्यों से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उनकी पत्नी तथा परिवार के सदस्यों की अधिकांश संपत्तियां और कृषि भूमि उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले की हैं। इसलिए जनता को भ्रमित करने वाली अपुष्ट जानकारियों के बजाय प्रमाणित तथ्यों पर विश्वास करना चाहिए।
राज्यमंत्री लखन पटेल ने प्रदेशवासियों से अपील की कि किसी भी समाचार या आरोप पर विश्वास करने से पहले उसके तथ्यों और आधिकारिक दस्तावेजों की जांच अवश्य करें तथा भ्रामक प्रचार से सावधान रहें।
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Dr. LN Vaishnav
Editor
लेखक वरिष्ठ पत्रकार है। विगत 30 वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। दैनिक समाचार पत्रों के अलावा पत्र-पत्रिकाओं में लगातार समाचारों का प्रकाशन होता है।
